Pregnant hone ki dava

बच्चा होने की दवा क्या है?

Fertility Drugs for Women in hindi

Pregnant hone ki dava, pregnant hone ki medicine

एक नज़र

  • कुछ महिलाओं का ओवुलेशन या डिंबोत्सर्जन का समय अनियमित होता है।
  • महिलाओं को दवा देने का उद्देश्य उन विभिन्न कारणों को दूर करना होता है, जो महिला को गर्भधारण करने में बाधा बनते हैं।
  • क्लोमीड दवा से होने वाले प्रभाव या साइड इफेक्ट बहुत प्रभावशाली नहीं होते हैं।

सामान्य रूप से कभी-कभी, विभिन्न प्रकार के उपायों के बाद भी महिलाओं को गर्भधारण करने में कठिनाई हो सकती है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर गर्भधारण का प्रयास कर रही महिलाओं को कुछ दवाओं के सेवन का सुझाव दे सकते हैं।

इन दवाओं को फर्टिलिटी ड्रग्स (fertility drugs) कहा जाता है। ये दवाएं महिलाओं में विभिन्न रूपों में काम करते हुए उनमें बच्चा पैदा करने की संभावनाओं को बढ़ा देती हैं। इन दवाओं की ज़रूरत किन स्थितियों में हो सकती हैं, इससे जुड़ी जानकारी के लिए यह लेख पढ़ें।

loading image

माँ बनने की तरफ उठाएं पहले कदम! IVF के बारे में अधिक जानकारी के लिए कॉल करें!

बुक करें

इस लेख़ में/\

  1. बच्चा होने की दवा की जरुरत क्यूँ होती है?
  2. बच्चा होने की दवा कैसे काम करती हैं?
  3. बच्चा होने की दवा – क्लोमीड कैसे काम करती है?
  4. बच्चा होने की दवा के रूप में हार्मोनल इंजेक्शन
  5. निष्कर्ष
 

1.बच्चा होने की दवा की जरुरत क्यूँ होती है?

What is the need to take medicine to get pregnant in hindi

pregnant hone ke liye dawa kab li jati hai in hindi

एक सामान्य महिला यह सोच सकती हैं कि बच्चा होने की दवा की जरुरत क्यूँ होती हैं? दरअसल, कभी-कभी महिलाओं को कुछ कारणों से गर्भधारण करने में परेशानी होती है। इस स्थिति में चिकित्सक बच्चा होने की दवा के रूप में प्रजनन शक्ति को बढ़ाने की दवा देने का निर्णय ले सकते हैं।

सामान्य रूप में महिला के गर्भधारण न कर पाने में महिला व पुरुष दोनों से संबंधित कारण हो सकते हैं। आमतौर पर ये स्थिति नीचे दी गई परेशानियों में से किसी एक या एक से अधिक के कारण हो सकती है।

बच्चा न होने में महिला संबंधी कारण : -

1. ओवुलेशन में परेशानी (Ovulation problems in hindi)

कुछ महिलाओं का ओवुलेशन या डिंबोत्सर्जन का समय अनियमित होता है। ऐसा मुख्य रूप से हार्मोनल असंतुलन के कारण हो सकता है। ऐसी स्थिति में गर्भधारण करने में परेशानी हो सकती है।

2. पोलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (Polycystic ovary syndrome -PCOS in hindi)

कभी-कभी हार्मोनल असंतुलन के कारण महिलाएं पोलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम या पी.सी.ओ.एस. की परेशानी से ग्रस्त हो जाती है। इस स्थिति में अंडाशय (ovary) में परिपक्व अंडे (matured eggs) बनने शुरू हो जाते हैं और इनमें से अधिकतर अंडाशय से बाहर नहीं आ पाते हैं।

अंडाशय में रहने वाले यही परिपक्व अंडे गांठ या सिस्ट (cyst) के रूप में अंडाशय के काम करने की प्रक्रिया में बाधा डाल देते हैं और महिला को गर्भ धारण करने में मुश्किल होने लगती है।

3. थायराइड असंतुलन (Thyroid disorders in hindi)

जब महिला थायराइड के असंतुलन की परेशानी होती है तब ओवरी से निकलने वाले अंडे और ओव्यूलेशन की प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है। थायराइड के लेवल कम होने पर ओवरी से प्रेग्नेंसी को प्रभावित करने वाले हार्मोन कम निकलते हैं और इसके कारण ओव्यूलेशन अनियमित हो जाता है। ऐसे में महिला के प्रेग्नेंट होने की संभावना कम होने लगती है।

4. खान-पान में खराबी (Eating disorders in hindi)

विभिन्न प्रकार की शोध में यह स्पष्ट हो चुका है कि वो महिलाएं जो अपनी डाइट में अधिक से अधिक फल और सब्जियों को शामिल करती हैं, उनके गर्भधारण करने की संभावना अधिक रहती है।

इसका मुख्य कारण है कि प्रोटीन जो शरीर की हर प्रक्रिया को प्रभावित करता है, मुख्य रूप से वनस्पति स्त्रोत अथार्थ फल और सब्जियों के द्वारा ही मिल सकता है।

मुख्य रूप से ऐसी महिलाएं जो किसी न किसी रूप में ओवरी संबंधी परेशानियों से ग्रस्त हैं। उन्हें अपनी डाइट में अधिक से अधिक पोषण-युक्त खाद्य पदार्थ को शामिल करना चाहिए।

5. शारीरिक वज़न में परेशानी (Weight related problems in hindi)

महिला का शारीरिक वज़न सामान्य से कम हो या अधिक हो, दोनों ही रूप में यह प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है। अगर महिला मोटापे या अधिक वजन की शिकार है, तब उसका ओव्यूलेशन अनियमित हो सकता है। इसके साथ ही अगर महिला आईवीएफ प्रक्रिया का सहारा लेना चाहती है तब भी अधिक वजन की परेशानी इस उपाय में बाधा बन सकती है।

अगर महिला का वज़न सामान्य से कम है तब शरीर में प्रेग्नेंसी हार्मोन या एस्ट्रोजेन के बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इससे गर्भधारण में कठिनाई हो सकती है।

6. फैलोपिन ट्यूब में खराबी (Issues related with Fallopian Tube in hindi)

कभी-कभी किसी कारण से यदि महिला की फैलोपिन ट्यूब बंद हो जाती है, तब उसमें से अंडे ओवरी से गर्भाशय तक नहीं पहुँच पाते हैं। इस स्थिति में शुक्राणु (sperm) से अंडाणु (female egg) का मिलना मुश्किल हो जाता है और इसी कारण प्रेग्नेंसी शुरू होने में भी रुकावट आ सकती है।

7. महिला की उम्र का 40 से अधिक होना(Female’s age above 40 for pregnancy in hindi)

जब महिला की उम्र 40 या इससे अधिक हो जाती है तब अधिकतर यह देखा गया है कि महिला का अंडाशय या ओवरी के काम करने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इस स्थिति में महिला का गर्भधारण थोड़ा कठिन हो जाता है।

8. पोषण की कमी (Lack of nutrition to getting pregnant in hindi)

वो महिलाएं जो बच्चा पैदा करने की इच्छा रखती हैं, उन्हें अपने भोजन में अधिक से अधिक पोषक तत्वों को शामिल करना चाहिए। इसके लिए उन्हें ऐसा भोजन करना चाहिए जिसमें फोलिक एसिड, आयरन और सभी अन्य ज़रूरी पोषक तत्व शामिल हों। ऐसा न होने पर महिला की प्रजनन क्षमता पर बुरा असर हो सकता है।

9. असंतुलित प्रोलैक्टीन (Excess prolactin in hindi)

प्रोलैक्टीन वह हार्मोन है जिसका निर्माण शरीर की पिट्यूटरी ग्लेण्ड (pituitary gland) में होता है और जिसके कारण गर्भधारण और स्तन के दूध के निर्माण में मदद मिलती है।

अगर किसी कारण से महिला के शरीर में इस हार्मोन का निर्माण सामान्य स्तर से अधिक होने लगता है तब महिला का मासिक चक्र और ओवुलेशन दोनों ही अनियमित हो जाते हैं।इससे उसे गर्भधारण में कठिनाई हो सकती है।

10. सिलिएक बीमारी का होना (Celiac Disease in hindi)

सिलिएक दरअसल, पेट संबंधी बीमारी होती है, जिसमें महिला को पेट में सूजन, पेट फूलना, उल्टी और दस्त की शिकायत रहने लगती है। यह एक प्रकार की ऑटो-इम्म्यून (auto-immune disease) बीमारी मानी जाती है, जो अधिकतर आनुवंशिक होती है।

सिलिएक बीमारी के होने पर व्यक्ति ग्लूटन युक्त खाने की चीजें, जैसे गेहूं, जौ और राई इत्यादि का सेवन नहीं कर सकता है। कुछ शोधों में इस प्रकार के परिणाम सामने आए हैं जिनसे पता चलता है कि कुछ महिलाओं को इस बीमारी के कारण एमीनिया (रक्त की कम) और अनियमित मासिक धर्म की शिकायत भी हो सकती है जो कहीं न कहीं बाध्यता का कारण भी बन जाती है।

इसके अतिरिक्त, इस बीमारी के कारण महिला के शरीर में कैल्शियम और विटामिन डी की कमी होने लगती है जिसके कारण गर्भधारण की प्रक्रिया में बाधा आ सकती है। यहाँ तक की आईवीएफ की प्रक्रिया में भी विटामिन डी को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

बच्चा न होने के पुरुष संबंधी कारण : -

1. असंतुलित हार्मोन (Disbalancing of Male Harmon in hindi)

जब पुरुषों की पिट्यूटरी ग्लेण्ड (pituitary gland) में बनने वाला प्रोलैक्टीन हार्मोन कम मात्रा में बनता है तब उनके शरीर में बनने वाले स्पर्म की प्रक्रिया और विकास दोनों में बाधा आने लगती है। इससे पुरुष बांझपन की परेशानी का शिकार होने लगते हैं।

2. वैरिकोसेल (Varicocele in hindi)

वैरिकोसेल वह परेशानी है, जो पुरुष के अंडकोश या टेस्टीकल (testicle) की नसों में सूजन के रूप में हो जाती है। इसके कारण स्पर्म निर्माण में बाधा आती है और इसका सीधा असर पुरुष की प्रजनन क्षमता पर होता है।

3. फर्टिलिटी को प्रभावित करने वाली दवाएं (Side effect of fertility drugs in hindi)

कुछ दवाएं या पदार्थ ऐसे होते हैं जो पुरुष के स्पर्म निर्माण व उसके विकास में बाधा उत्पन्न कर देते हैं। इनमें सभी प्रकार की स्टीरियोड्स, मादक पदार्थ शामिल होते हैं। इनके प्रयोग से मांसपेशियों को तो ताकत मिलती है, लेकिन प्रजनन क्षमता पर इनका बुरा असर पड़ता है। इसके अलावा टेस्टोस्ट्रेटोन रिपलेसमेंट थेरेपी, कैंसर के इलाज के लिए ली जाने वाली दवाइयाँ, अल्सर और एंटीफ़ंगल दवाई भी स्पर्म काउंट पर बुरा असर डालती हैं।

4. एंटी-स्पर्म एंटीबाडीज का होना (Antisperm bodies in hindi)

एंटी-स्पर्म एंटीबाडीज या शुक्राणु निरोधक एंटीबॉडीज ऐसे इम्म्युन सिस्टम सेल्स होते हैं जो स्पर्म को बाहरी तत्व मानकर उनपर हमला करके उन्हें नष्ट करने का प्रयास करते हैं।

5. इजैक्यूलेशन संबंधी परेशानी (Ejaculation in hindi)

कभी-कभी पुरुषों को स्खलन या इजेक्यूलेशन संबंधी परेशानी का भी सामना करना पड़ता है। इसमें कभी-कभी सेक्स के बाद वीर्य (semen) पेनिस के रास्ते बाहर निकलने के स्थान पर मूत्राशय (bladder) में चले जाते हैं।

इस परेशानी को रेट्रोग्रेड एजाकुलेशन (retrograde ejaculation) या प्रतिगामी स्खलन कहा जाता है। ऐसा प्रायः तब होता है जब पुरुष मधुमेह, रीढ़ की हड्डी की चोट, मूत्राशय सर्जरी, प्रोस्टेट जैसे परेशानी से ग्रस्त होते हैं।

6. हानिकारक पर्यावरण व रासायनिक वातावरण (Harmful Chemical and environmental circumstances in hindi)

कभी-कभी अत्यधिक हानिकारक रसायानिक वातावरण व पर्यावरण में लगातार काम करने से भी स्पर्म निर्माण व विकास में परेशानी होती है। जब पुरुष को लगाता तेज़ रेडिएशन, गरम धातु, या तेज़ गंध वाले रसायानिक पदार्थों के बीच और साथ काम करना पड़ता है, तब उनके वृषाणु (testicles) गरम हो जाते हैं। ऐसे में स्पर्म निर्माण बाधित हो जाता है जो पुरुष बांझपन का कारण बन जाता है।

7. क्रोमोसोम विकार (Chromosome Defects in hindi)

अधिकतर स्थितियों में क्रोमोज़ोम विकार आनुवंशिक होते हैं जो पुरुष के शरीर में दो एक्स (X) और एक वाई (Y) क्रोमोज़ोम होते हैं। इनके कारण पुरुष जननांग (male reproductive organs) का विकास अनियमित और विकारयुक्त हो सकता है। इससे भी पुरुष की प्रजनन क्षमता बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है।

8. खराब जीवनशैली (Bad lifestyle in hindi)

जब पुरुष अत्यधिक तनावपूर्ण वातावरण, अवसाद और अत्यधिक शारीरिक वजन जैसी परेशानियों से ग्रस्त होने के साथ ही शराब, तंबाकू और अन्य मादक पदार्थों का सेवन करते हैं तब इसका उनकी प्रजनन क्षमता पर बुरा असर पड़ता है।

loading image

माँ बनने की तरफ उठाएं पहले कदम! IVF के बारे में अधिक जानकारी के लिए कॉल करें!

बुक करें

 

2.बच्चा होने की दवा कैसे काम करती हैं?

How do medicine to get Pregnant works in hindi

Pregnant hone ke liye li jane vaali dava kaise kaam karti hai in hindi

चिकित्सा जगत में आधुनिक तकनीकों के कारण अब वो दंपत्ति जो किसी कारण से माता-पिता बनने का सुख नहीं उठा पाते हैं, उनके लिए विभिन्न प्रकार के उपाय उपलब्ध हो गए हैं। यह उपाय महिला व पुरुष दोनों के लिए होते हैं। विभिन्न उपायों में से एक है बच्चा पैदा करने की दवा जो सामान्य रूप से महिला के लिए और कुछ देशों में पुरुषों के लिए भी उपलब्ध हो गई है।

बच्चा होने की दवा इस तरह करती है काम : -

1. महिलाओं के लिए प्रेग्नेंट होने वाली दवा (Fertility Drugs for Women in hindi)

महिलाओं को दवा देने का उद्देश्य उन विभिन्न कारणों को दूर करना होता है, जो महिला को गर्भधारण करने में बाधा बनते हैं। इस समय महिलाओं की प्रजनन क्षमता को बढ़ाने वाली विभिन्न प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं।

अधिकतर दवाओं का काम महिलाओं अंडाशय को उत्तेजित करके अंडाणु निर्माण की प्रक्रिया को बढ़ाकर गर्भधारण की संभावना को बढ़ाना होता है। इसके अतिरिक्त कुछ दवाएं समय से पहले होने वाले ओवुलेशन को रोक कर और समयानुसार कर के महिला को प्रेग्नेंट होने में मदद करती हैं।

2. पुरुषों की प्रजनन शक्ति बढ़ाने वाली दवा (Fertility Drugs for Men in hindi)

विश्व के कुछ देशों में पुरुषों की प्रजनन शक्ति को बढ़ाने वाली दवा भी उपलब्ध हो गई है। यह दवा उन कारणों को दूर करने का प्रयास करती है, जिनके कारण पुरुषों के स्पर्म निर्माण व विकास में बाधा आती है।

इस प्रकार इस दवा का काम स्वस्थ स्पर्म को अधिक से अधिक मात्रा में बनाना व उनकी गतिशीलता को बनाए रखना है। स्वस्थ स्पर्म का अधिक समय तक बने रहने से ही महिला को प्रेग्नेंट होने में सुविधा होती है।

 

3.बच्चा होने की दवा – क्लोमीड कैसे काम करती है?

How Clomid works in hindi

clomid kaise kaam karti hai in hindi

विश्व में अधिकतर चिकित्सक महिलाओं को बच्चा होने की दवा -क्लोमीड के रूप में उपचार करना पसंद करते हैं। इसका मुख्य कारण है कि यह दवा पिछले 40 वर्ष से अधिक समय से सफलतापूर्वक इस्तेमाल की जा रही है।

अधिकतर यह उन महिलाओं को दी जाती है, जिनका ओव्यूलेशन समय से और नियमित रूप से नहीं होता है। दरअसल, यह एक एस्ट्रोजेन-अवरोध ड्रग है या दूसरे शब्दों में कहें तो यह एस्ट्रोजेन के प्रभाव को कम कर देती हैं।

इसके परिणामस्वरूप महिला के शरीर में निम्न दो हार्मोन का लेवल बढ़ने लगते हैं : -

1. फॉलिकल-स्टिमुलेटिंग हॉर्मोन - एफ.एस.एच. (FSH)

यह हार्मोन गर्भाशय में से अंडाणु को परिपक्व होने और उत्सर्जित होने में मदद करता है।

2. ल्यूटेनाइजिंग हॉर्मोन - एल.एच (LH)

यह हार्मोन अंडाशय के फॉलिकल्स में से परिपक्व अंडाणु को फैलोपियन ट्यूब में जाने के लिए प्रेरित करता है। चिकित्सक सामान्य रूप से इस दवा को मासिक चक्र शुरू होने के दूसरे दिन से शुरू करते हुए के बाद पाँच दिन तक लेने की सलाह देते हैं। यह दवा 50 मिलीग्राम की मात्रा में दिन में एक बार लेने की सलाह दी जाती है।

इस दवा को लेने के बाद सामान्य रूप से 5-12 दिनों के बाद ओवुलेशन शुरू हो सकता है। अगर ऐसा नहीं होता है तब चिकित्सक महिला को दवा की डोज़ या मात्रा बढ़ाने की सलाह दे सकते हैं। इसके साथ ही चिकित्सक दवा पूरी लेने के पांचवे दिन सेक्स करने की सलाह भी देते हैं।

एक बार क्लोमिड का कोर्स पूरा हो जाने के बाद डॉक्टर प्रोजेस्ट्रेन के लेवल और ओवुलेशन की जांच करने के लिए दवा की आखिरी गोली लेने के 14-16 दिन बाद एक ब्लड टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। यदि इस टेस्ट में ओव्यूलेशन के शुरू न होने का पता चलता है, तब चिकित्सक दवा की डोज़ बढ़ा भी सकते हैं।

इसके बाद जब ओवुलेशन शुरू हो जाता है तब चिकित्सक अगले 6 माह तक की अवधि के लिए इस दवा के प्रयोग को रोक सकते हैं। उसके छह माह बाद भी यदि महिला गर्भधारण नहीं कर पाती है, तब चिकित्सक महिला को गर्भधारण करने के अन्य उपाय अपनाने की सलाह दे सकते हैं।

क्लोमीड के दुष्प्रभाव (Side effects of Clomid in hindi)

क्लोमीड दवा से होने वाले प्रभाव या साइड इफेक्ट बहुत प्रभावशाली नहीं होते हैं।

ये प्रभाव निम्न रूप में दिखाई दे सकते हैं : -

  1. समय-समय पर होने वाले हॉट-फ्लैश
  2. कभी-कभी धुंधला दिखाई देना
  3. सिर चकराना और उल्टी जैसा महसूस होना
  4. पेट में गैस बनना
  5. अक्सर सिर में दर्द रहना
  6. मासिक धर्म होने के बाद भी रक्त्स्त्राव या हल्के धब्बे के साथ रक्त आना

हालांकि सभी महिलाओं को इस प्रकार के दुष्प्रभाव या साइड इफेक्ट दिखाई दें, यह ज़रूरी नहीं है। लेकिन, अगर इनमें से कुछ जैसे आँखों से धुंधला दिखाई देना, पेट में बहुत अधिक गैस बनना या फिर रक्त आता दिखाई दे, तब तुरंत अपने चिकित्सक से संपर्क करें। क्लोमिड के उपचार के बाद अक्सर महिलाएं एक से अधिक बच्चों को जन्म देने की संभावना रखती हैं।

loading image

अस्सिटेड रिप्रोडक्टिव तकनीक से मातृत्व का अनुभव करें| हम कर सकते हैं आपकी मदद!

बुक करें

 

4.बच्चा होने की दवा के रूप में हार्मोनल इंजेक्शन

Injectable Fertility Medicationin hindi

kyaa bachcha paida karne ke liye hormonal injection liye ja sakte hain in hindi

अगर किसी कारण से बच्चा पैदा करने की दवा क्लोमीड का असर नहीं हो पाता है, तब चिकित्सक महिला के ओवुलेशन को नियमित व संतुलित करने के लिए हार्मोनल इंजेक्शन का सुझाव दे सकते हैं।

बच्चा होने के लिए इस संबंध में कुछ प्रचलित हार्मोनल इंजेक्शन इस प्रकार हैं : -

1. ह्यूमन क्रोयनिक गोनाडोट्रोपीन (Human chorionic gonadotropin)

यह इंजेक्शन विभिन्न नामों जैसे नोवेरेल (novarel), ओविड्रेल (ovidrel), प्रेगनेल (pregnyl) और प्रोफासी (profasi) के रूप में मिलता है। इन इंजेक्शनों से ओवरी से अंडाणु को परिपक्व होकर उत्सर्जित होने में मदद करते हैं।

2. फोलिसिल-स्टिम्युलेटिंग हार्मोन (Follicle-stimulating hormone FSH)

यह हार्मोन इंजेक्शन भी ओवरी में अंडाणु के विकास को बढ़ावा देते हैं। ये हार्मोनल इंजेक्शन ब्रेवेले (bravelle), फर्टिनेक्स (fertinex), फ़ोलिस्टीम (follistim) और गोनल-एफ (gonal-F) आदि विभिन्न नाम से मिलते हैं।

3. ह्यूमन मेनोपौसल गोनडोट्रोपीन (Human menopausal gonadotropin - hMG)

इन हार्मोनल इंजेक्शन में दो हार्मोन , फॉलिकल-स्टिमुलेटिंग हॉर्मोन - एफ.एस.एच.(FSH) और ल्यूटेनाइजिंग हॉर्मोन - एल.एच (LH) का मिश्रण होता है। बच्चा पैदा करने की दवा के इंजेक्शन की मात्रा महिला की स्थिति के अनुसार निर्धारित की जाती है। इनमें से कुछ इंजेक्शन स्किन के अंदर दिये जाते हैं तो कुछ सीधे ही मांसपेशियों में दे दिये जाते हैं।

चिकित्सक महिला की सुविधा के अनुसार इन इंजेक्शनों को पेट, बांह, जांघ या कूल्हे में लगा सकते हैं। आमतौर पर इन इंजेक्शनों का प्रयोग महिला की मासिक चक्र के शुरू होने के बाद दूसरे या तीसरे दिन से शुरू कर दिया जाता है। यह प्रयोग 7-12 दिन तक चलता है।

कभी-कभी इन इंजेक्शनों को क्लोमिड के साथ भी लिया जा सकता है। इस इंजेक्शन की सफलता का ग्राफ अभी तक ऊंचा ही रहा है। इस इंजेक्शन का प्रयोग करने के बाद महिला का ओवुलेशन शुरू होकर लगभग 50% महिलाएं गर्भधारण करने में सफल हो जाती हैं।

हार्मोनल इंजेक्शन के दुष्प्रभाव (Side effects of Hormonal Injections in hindi)

कभी-कभी कुछ महिलाओं को इन इंजेक्शनों के लेने के बाद साइड इफेक्ट के रूप में इंजेक्शन वाली जगह में कुछ प्रभाव देखे जा सकते हैं।

बच्चा पैदा होने के लिए दिए जाने वाले हार्मोनल इंजेक्शन के दुष्प्रभाव : -

  • सूजन
  • इन्फेक्शन
  • खून भरे छाले
  • जगह का नरम पड़ना

कभी-कभी महिलाओं की ओवरी में अनावश्यक वृद्धि और कोमलता दिखाई दे सकती है जिसे ओवरियन हाइपरस्टिम्युलेशन (ovarian hyperstimulation) कहा जाता है। इसके साथ ही इन इंजेक्शनों के सेवन के बाद महिला एक से अधिक बच्चों को जन्म देने की संभावना भी रखती है।

बच्चा पैदा करने में कठिनाई होने पर चिकित्सक मुंह से लेने वाली गोली या फिर इंजेक्शन की सलाह देते हैं। इन दोनों ही उपायों के बहुत हल्के और मामूली साइड इफेक्ट होते हैं जो कुछ समय बाद अपने आप ही दूर हो जाते हैं।

और पढ़ें:How to conceive a baby boy - A Scientific Approach

 

5.निष्कर्ष

Conclusionin hindi

Nishkarsh

परिवार में एक बच्चे का जन्म उसके माता-पिता के लिए अनेक ख़ुशियाँ का कारण होता है। लेकिन अगर कुछ स्थितियों में महिला-पुरुष इस खुशी को लेने में असमर्थ हो जाते हैं, तब वे चिकित्सीय उपाय देख सकते हैं।

ऐसे में बच्चा पैदा करने के लिए सबसे सरल उपाय के रूप में मुंह से लेने वाली गोली या फिर हार्मोनल इंजेक्शन लिए जा सकते हैं। हालांकि, इन उपायों के बाद महिला एक से अधिक बच्चों को जन्म देने की संभावना बन जाती है।

आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि:: 29 Jul 2020

क्या यह लेख सहायक था? हां कहने के लिए दिल पर क्लिक करें

विशेषज्ञ सलाहASK AN EXPERT

कॉल

व्हाट्सप्प

अपॉइंटमेंट बुक करें