आईयूआई (IUI) उपचार के बाद गर्भावस्था (प्रेगनेंसी) के लक्षण

Pregnancy Symptoms after IUI in hindi

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एक नज़र

  • अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान प्रक्रिया के बाद 9-10 दिन में गर्भ-धारण होता है।
  • गर्भ-धारण के बारे में सही जानकारी के लिए अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान के 14 दिन बाद गर्भ-धारण परीक्षण करना चाहिए।
  • धब्बे और ऐंठन आईयूआई गर्भ-धारण के प्रमुख लक्षण होते हैं, मगर इनके अपवाद भी हो सकते हैं।
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Introduction

Pregnancy and symptoms of pregnancy after IUI | Zealthy

आईयूआई (IUI in hindi) प्रक्रिया को एक तरह की कृत्रिम गर्भधारण की प्रक्रिया हैं जिसमे पुरुष के शुक्राणु महिला के गर्भाशय के नज़दीक डाला जाता हैं, जिससे फर्टिलाइजेशन (महिला के एग और पुरुष के स्पर्म के मिलने के प्रक्रिया) के अवसर बढ़ जाते हैं और गर्भधारण में आसानी होती है। आईयूआई (IUI) के बाद महिलाओं में बेचैनी एक आम बात है। महिलाओं के मन में भय बना रहता है कि प्रक्रिया सफल हुई है या नहीं। IUI प्रक्रिया कृत्रिम गर्भाधान का एक रूप है जहां शुक्राणु सीधे महिला के गर्भाशय में डाले जाते है, इस प्रकार स्पर्म की योनि से गर्भाशय तक की यात्रा की दूरी को कम किया जाता है। इंट्रा-यूटेराइन इनसेमिनेशन (आईयूआई- IUI) अस्पष्टीकृत कारणों से होनेवाली इनफर्टिलिटी में जोड़ों के लिए व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला प्रजनन उपचार है। कृत्रिम गर्भाधान का यह विकल्प कम इनवेसिव (less invasive) है और इन विट्रो फर्टिलाइजेशन या आईवीएफ (IVF) की तुलना में महंगा नहीं होता है। [1] इस प्रक्रिया के कुछ साइड-इफेक्ट्स (side effects) भी होते हैं। कुछ मामलों में स्थिति जटिल हो जाती है जब साइड-इफेक्ट्स और गर्भ-धारण के लक्षणों के बीच फर्क कर पाना मुश्किल होता है। कई बार गर्भ धारण के कोई संकेत नहीं होते।

आइये इस लेख की मदद से जानते हैं कि आईयूआई (IUI in hindi) गर्भधान प्रक्रिया के बाद महिला को कैसा महसूस होता है, IUI प्रक्रिया के कितने समय बाद प्रेगनेंसी होती है, आईयूआई उपचार के लक्षण क्या हैं।

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इस लेख़ में

 

आईयूआई (IUI) कराने के बाद कैसा महसूस होता है ?

How does a patient feels after IUI in hindi

Antargarbhashayi garbhadhan karaane ke bad kaisa lagta hai in hindi

आईयूआई (iui) एक सरल एवं सुविधाजनक प्रक्रिया है। मगर इस प्रक्रिया के कारण कई शारीरिक बदलाव होते हैं। आईयूआई (IUI) के बाद एक महिला को महसूस होने वाले लक्षण निम्न हैं।

आईयूआई उपचार के बाद होने वाले अनुभव :

  • योनि स्त्राव (Vaginal discharge)

आईयूआई (IUI) कराने के बाद महिला के योनि से स्त्राव हो सकता है। इसमें घबराने की कोई बात नहीं है क्योंकि यह रिसाव सर्वाइकल म्यूकस (cervical mucus) है।

  • कोमल स्तन (Breast tenderness)

आईयूआई (iui) के बाद कुछ महिलाओं के स्तनों में नर्मी हो सकती है। आमतौर यह प्रजननता को बढ़ाने वाली दवाइयों का साइड इफ़ेक्ट होता है।

  • खून के धब्बे (Spotting)

कुछ महिलाओं को आईयूआई (IUI) कराने के बाद खून के धब्बे दिखाई दे सकते हैं, हालांकि यह भी सामान्य है।

  • ऐंठन एवं बेचैनी (Cramps and anxiety)

आईयूआई (IUI) कराने के बाद शरीर में ऐंठन एवं बेचैनी एक आम बात है। ऐसे में थोड़ा आराम करने के बाद महिला को धीरे-धीरे बेहतर महसूस होने लगता है। इसके अलावा डॉक्टर ऐंठन एवं बेचैनी को कम करने के लिए कुछ दवाइयां भी दे सकते हैं।

  • तीव्र दर्द (Severe pain)

आईयूआई (iui) के बाद अगर महिला को तीव्र पेट दर्द, रक्तस्त्राव या भारीपन लग रहा है तो उसे तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। यह संक्रमण के लक्षण भी हो सकते हैं।

  • यौन-क्रिया (Sexual activity)

कई महिलाओं में यह उलझन रहती है कि आईयूआई (iui) कराने के बाद सेक्स (sex) करना चाहिए या नहीं। आईयूआई करने के बाद यौन-क्रिया में कोई दिक्कत नहीं है बल्कि इससे फ़ायदा ही होता है। यौन-क्रिया के दौरान गर्भाशय की मांसपेशियों में संकुचन की वजह से शुक्राणुओं को फैलोपियन ट्यूब (fallopian tube) की तरफ जाने में मदद मिलती है जिससे फर्टिलाइजेशन की संभावना बढ़ जाती है।

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आईयूआई (IUI) कराने के कितने दिन बाद प्रेगनेंसी होती है?

How many days it takes for Pregnancy after IUI in hindi

Antargarbhashayi garbhadhaan (iui) karaane ke kitne samay bad garbh dharan hota hai in hindi, iui ke baad pregnancy ke lakshan

आईयूआई की प्रक्रिया के दौरान शुक्राणुओं को उस वक़्त गर्भाशय में डाला जाता है जिस वक़्त अंडा अंडकोष से उत्पादित हो चुका होता है। डॉक्टर अंडाशय में अंडे का निर्माण बढ़ाने के लिए कुछ दवाइयाँ भी देते हैं। इसके लिए डॉक्टर ओवुलेशन पीरियड कैलकुलेटर (ovulation period calculator) या कैलेंडर की भी सहायता ले सकते हैं। जिन महिलाओं में मासिक चक्र नियमित होता है, उनके प्राकृतिक चक्र को ध्यान में रखते हुए शुक्राणुओं को गर्भाशय में डाला जाता है। अंडे का फर्टिलाइजेशन फैलोपियन ट्यूब (fallopian tube) में होता है। इसके बाद फर्टिलाइज़ड एग फेलोपियन ट्यूब (fallopian tube) से गर्भाशय तक जाता है। इस दौरान अंडे में परिवर्तन होते हैं और यह ब्लास्टोसिस्ट (blastocyst) में परिवर्तित हो जाता है। इसमें करीब 6-7 दिन लगते हैं। ब्लास्टोसिस्ट (blastocyst) को गर्भाशय तक जाने और गर्भाशय की दीवार से जुड़ने में करीब 2-3 दिन का समय और लगता है। यहाँ डॉक्टर यह मान के चलते हैं कि जिस दिन अंडा अंडाशय से निकला है उसी दिन अंडे का फर्टिलाइजेशन हो गया है। अतः ओवुलेशन या आईयूआई (IUI) कराने के करीब 9-10 दिन में प्रेगनेंसी हो जाती है। घर पर प्रेगनेंसी टेस्ट करने से पहले IUI के बाद 14 दिनों तक प्रतीक्षा करने की आवश्यकता है।

और पढ़ें:अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान की सफलता को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक
 

आईयूआई (IUI) के बाद गर्भावस्था (pregnancy) के लक्षण

Symptoms of pregnancy after IUI ?in hindi

यह सही-सही कह पाना मुश्किल है की आईयूआई के बाद गर्भ-धारण के क्या लक्षण होते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि कोई भी लक्षण सीधे-सीधे गर्भधारण की तरफ इशारा नहीं करते। यह लक्षण असफल अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान प्रक्रिया के बाद भी आ सकते हैं।

कुछ महिलाओं में गर्भ-धारण बिना किसी लक्षण के हो जाता है जबकि कुछ महिलाएं निम्न लक्षणों को अनुभव कर सकती है :

  • इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग या स्पॉटिंग (Implantation bleeding or spotting)

जैसे ही ब्लास्टोसिस्ट (blastocyst) गर्भाशय की दीवार से जुड़ता है, वहाँ से कुछ सेल्स (cells) हट जाते हैं। जैसे ही महिला के पीरियड्स मिस होते हैं, ये सेल्स (cells) बाहर निकलते हैं और रक्त के धब्बे (blood spotting) के रूप में दिखाई देने लगते हैं इसे इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग या स्पॉटिंग कहा जाता है। लेकिन इनका रंग मासिक धर्म में निकले खून के रंग से अलग होता है। जहाँ गर्भधारण के दौरान निकला खून गुलाबी या हल्का भूरा होता है वहीं मासिक धर्म का खून गहरा लाल होता है। यह स्पॉटिंग या रक्तस्त्राव आईयूआई (IUI) प्रक्रिया के दौरान उपयोग किये गए कैथिटर की वजह से भी हो सकते हैं।

  • ऐंठन (Cramping)

ऐंठन यह गर्भधारण का सबसे महत्वपूर्ण लक्षण है मगर यह आईयूआई से गर्भ-धारण करने वाली मात्र 30-35 प्रतिशत महिलाओं में ही देखा जाता है। पेट में भारीपन कुछ महिलाओं में गर्भ-धारण की तरफ इशारा करता है। ऐंठन भी गर्भधारण का विशिष्ट लक्षण नहीं है क्योंकि यह लक्षण माहवारी के या अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान प्रक्रिया के कारण भी हो सकता है। गर्भधारण के बारे में सही-सही अंदाज़ा लगाने के लिए प्रेगनेंसी टेस्ट करना सबसे सही है। गर्भावस्था परीक्षण या प्रेगनेंसी टेस्ट, आईयूआई (iui) की प्रक्रिया के 14 दिन बाद ही करना चाहिए नहीं तो गलत परिणाम आने की संभावना रहती है।

  • पीरियड्स में देरी होना (Delayed or missed periods)

अगर पीरियड्स रेगुलर है तो पीरियड्स मिस होना प्रेग्नेंट होने की तरफ एक बड़ा संकेत है। जबकि बीच में स्पॉटिंग (blood spotting) या लाइट ब्लीडिंग भी हो सकती है। इसके बारे में आपको फिक्र करने की जरुरत नहीं है। यदि आप ब्लीडिंग को लेकर परेशान हैं, तो आप डॉक्टर से सलाह ले सकती हैं। लेकिन कभी कभी बिना प्रेगनेंसी के भी पीरियड्स में देरी हो सकती है।

  • स्तनों में दर्द और सवेदनशीलता का होना (Breast tenderness)

यदि आपके स्तन भारी, संवेदनशील और दर्द महसूस करते हैं, तो आप गर्भावस्था हो सकती हैं। स्तनों में सूजन और संवेदनशीलता वे लक्षण हैं जो पीरियड्स के दौरान भी आम हैं। लेकिन अगर ये लक्षण पीरियड्स के बाद भी बने रहते हैं, तो आपको प्रेगनेंसी टेस्ट करना चाहिए।

  • जी मचलाना या उल्टी होना (Nausea and Vomitting)

सामान्य लक्षणों में उल्टी होना, जी मचलाना या मॉर्निंग सीकनेस होना शामिल है। ऐसा कभी किसी गंध को सूंघने के वजह से होता है तो कभी बिना किसी कारण के भी हो सकता है। यह सिर्फ आपके शरीर में एस्ट्रोजेन हार्मोन (Estrogen) के बढ़ते स्तर के कारण होता है।

  • थकान महसूस होना (Tiredness)

प्रेग्नेंट महिलाये अपने शरीर में बढे हुए प्रोजेस्टेरोन हार्मोन (progesterone) के कारण बहुत थकान महसूस करती है क्योंकि यह हार्मोन नींद को प्रेरित करने के लिए जाना जाता है। इसके अलावा, ब्लडप्रेशर और ब्लडशुगर के स्तर भी, रक्त उत्पादन में वृद्धि के कारण कम हो जाते हैं। इससे प्रेग्नेंट महिला में थकान रहती है।

  • खाने के प्रति क्रेविंग या घृणा निर्माण होना (Food Craving)

अगर आप प्रेग्नेंट हो तो आपमें कुछ खाद्य पदार्थो के प्रति बहुत ज्यादा क्रेविंग निर्माण हो जाती है। और इसके विपरीत किसी विशेष खाद्य पदार्थ के प्रति घृणा निर्माण हो सकती हैं। यह प्रेगनेंसी का एक लक्षण है जो बच्चे का जन्म होने तक बना रहता है।

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निष्कर्ष

Conclusionin hindi

Nishkarsh

अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान प्रक्रिया के कुछ साइड फेफ्क्ट्स (side-effects) होते हैं। अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान प्रक्रिया के 9-10 दिन के अन्दर गर्भधारण हो जाता है। धब्बे एवं ऐंठन गर्भ-धारण के प्रमुख लक्षण हैं किन्तु यह विशिष्ट लक्षण नहीं है और अन्य कारणों से भी यह उत्पन्न हो सकते है। गर्भधारण का पता लगाने के लिए प्रेगनेंसी टेस्ट सबसे सटीक उपाय है।

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references

संदर्भ की सूचीछिपाएँ

1 .

Veltman-Verhulst SM, Hughes E, Ayeleke RO, et al. “Intra-uterine insemination for unexplained subfertility”. Cochrane Database Syst Rev. 2016;2:CD001838, PMID: 26892070.

आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 06 Jul 2020

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