पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) और मेनोपॉज़

Polycystic ovary syndrome and menopause in hindi

Polycystic ovary syndrome or menopause in hindi


एक नज़र

  • पीसीओएस और मेनोपॉज़ दोनों हॉर्मोन से संबंधित हैं।
  • इन दोनों के कुछ सामान्य लक्षण होते हैं।
  • पीसीओएस में ओवरी में सिस्ट हो जाती है।
  • जीवनशैली में बदलाव करना है ज़रूरी।
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Introduction

Polycystic ovary syndrome or menopause in hindi

जब एक साल तक महिलाओं को पीरियड्स नहीं होते हैं तो उस स्थिति को मेनोपॉज़ कहा जाता है।

वही पीसीओएस महिलाओं में होने वाली एक ऐसी समस्या है जिसमें ओवरी में सिस्ट यानी गांठ आ जाती है।

ऐसा हार्मोन्स में गड़बड़ी के कारण होता है और कई बार ये बीमारी जेनेटिक भी हो सकती है।

इसके अलावा खराब लाइफस्‍टाइल, खान-पान की गलत आदतें भी इसका बहुत बड़ा कारण हैं।

डॉक्टरों के अनुसार, पीसोओएस की समस्या पिछले 10 से 15 सालों में दोगुनी हो गई है।

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) और मेनोपॉज़ दोनों ही हार्मोन से संबंधित हैं, और आइये जानते हैं कि दोनों एक दूसरे से कैसे संबंधित हैं :

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इस लेख़ में

 

पीसीओएस और रजोनिवृत्ति से कौन से हार्मोन प्रभावित होते हैं

Which hormones are affected by PCOS and menopause in hindi

PCOS or menopause se kaun se hormone prabhavit hote hain in hindi

पीसीओएस वाली महिलाओं में आमतौर पर टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) सहित पुरुष हार्मोन के उच्च स्तर होते हैं।

पीसीओएस आपके शरीर को इंसुलिन (insulin) के प्रति कम संवेदनशील बनाता है। ये हाई ब्लड शुगर लेवल का कारण बनता है।

हाई ब्लड शुगर लेवल पुरुष हार्मोन (male hormone) को और बढ़ा सकता है, जिससे आपके पीसीओएस के लक्षण खराब हो सकते हैं।

पीसीओएस के साथ महिलाओं में महिला हार्मोन प्रोजेस्टेरोन (Progesteron) के स्तर कम भी हो सकते हैं।

प्रोजेस्टेरोन मेंस्ट्रुएशन को रेगुलेट करने और गर्भावस्था को बनाए रखने में मदद करता है।

मेनोपॉज़ शुरू होने से पहले, आपका शरीर स्वाभाविक रूप से कम एस्ट्रोजन (Estrogen) और प्रोजेस्टेरोन (Progesteron) का प्रोडक्शन शुरू करते हैं।

समय के साथ, एक बार महिला सेक्स हार्मोन का स्तर काफी कम हो जाने पर, एक महिला के गर्भ में ओवैल्यूशन होना बंद हो जाता है। यह मासिक धर्म को रोकने का कारण बनता है।

पीसीओएस और मेनोपॉज़ दोनों आपके ब्लड में प्रोजेस्टेरोन (Progesteron) के स्तर को प्रभावित करते हैं, लेकिन ये आपके हार्मोन को अलग-अलग तरीकों से प्रभावित करते हैं।

यही कारण है कि मेनोपॉज़ पीसीओएस का इलाज नहीं करती है।

और पढ़ें:अजवायन से पाएं पीरियड्स के दर्द से छुटकारा
 

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम और मेनोपॉज़ के लक्षण

Symptoms of Polycystic ovary syndrome and menopause in hindi

Polycystic ovary syndrome or menopause ke lakshan in hindi

जब आप पेरिमेनोपॉज़ और रजोनिवृत्ति तक पहुँचते हैं तो आपको पीसीओएस के लक्षण हो सकते हैं।

पेरिमेनोपॉज़ रजोनिवृत्ति से पहले की अवधि है जो अक्सर गर्म चमक और अनियमित अवधि जैसे लक्षणों के साथ होती है।

पेरिमेनोपॉज़ के दौरान, आपके हार्मोन का स्तर मेनोपॉज़ की तैयारी में बदलना शुरू हो जाता है। पेरिमेनोपॉज़ कई वर्षों तक रह सकता है।

जब आपको 12 महीने की तक पीरियड्स न हो तो माना जाता है कि यह मेनोपॉज़ की अवस्था है ।

पीसीओएस और मेनोपॉज़ के कुछ सामान्य लक्षण :

  • अनियमित या मिस्ड पीरियड्स (irregular or missed periods)

  • इनफर्टिलिटी (infertility)

  • मूड में बदलाव (mood swings)

  • सोने में कठिनाई (difficulty sleeping)

  • सिर के बाल पतले होना (thinning hair on head)

  • चेहरे या छाती पर अनचाहे बाल उगना (unwanted hair on face or breast)

  • वज़न बढ़ना (Weight gain)

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पीसीओएस और मेनोपॉज़ के लक्षणों में अंतर

Difference between PCOS and menopausein hindi

PCOS aur menopause ke lakshanon me antar in hindi

कुछ लक्षण पीसीओएस या मेनोपॉज़ के लिए यूनिक हैं।

इन अंतरों को जानने से दोनों स्थितियों को अलग करने में मदद मिल सकती है।

पीसीओएस के कुछ यूनिक लक्षण जो पेरिमेनोपॉज़ में नहीं होते हैं :

  • मुँहासे और त्वचा की समस्याएं (acne and skin problems)

  • सिर दर्द (headaches)

  • श्रोणि में दर्द (pain in the pelvis)

पेरिमेनोपॉज़ के कुछ यूनिक लक्षण जो पीसीओएस में नहीं होते हैं :

  • सेक्स ड्राइव में बदलाव (change in sex drive)

  • हॉट फ्लेशेज़ (hot flashes)

  • रात में पसीना आना (night sweats)

  • सेक्स के दौरान दर्द होनाया असहज महसूस करना (finding sex painful or uncomfortable)

  • यूरिन लीक होना (urine leakage)

  • योनि और यूरिनरी ट्रैक्ट में संक्रमण (infection in vagina and urinary tract)

  • योनि में टिश्यू का ड्राई और पतला होना (dryness and thinning of tissue in the vagina)

नोट :

  • जब पीसीओएस वाली महिलाएं पेरिमेनोपॉज़ से गुजरती हैं, तो वे एक ही समय में दोनों स्थितियों के लक्षणों का अनुभव करेंगी।

और पढ़ें:अनियमित माहवारी का इलाज
 

पेरिमेनोपॉज़ के दौरान पीसीओएस को मैनेज करना

Managing PCOS in perimenopause in hindi

Perimenopause ke dauran pcos ko manage karna in hindi

जिस तकनीक या बदलाव के ज़रिये पीसीओएस के लक्षणों को ठीक किया जायेगा उससे पेरीमेनोपॉज के भी कुछ लक्षण व्यवस्थित किये जा सकते हैं।

अपने वज़न को नियंत्रित करें (Control your weight) :

अधिक वज़न होने से आपको हार्ट अटैक और इंसुलिन प्रतिरोध (insulin resistance) का ख़तरा बढ़ सकता है।

इंसुलिन प्रतिरोध से टाइप 2 मधुमेह (diabetes) हो सकता है।

उन ज़ोखिमों (risk) को कम करने में मदद करने के लिए अपने वज़न को कंट्रोल करने और अपने डाइट को बेहतर बनाने के लिए नीचे बताई गयी बातों पर ध्यान दें:

  • प्लेट की साइज़ को कम करें

  • कार्बोहाइड्रेट का सेवन कम करें

  • ताज़े फल और सब्जियां खाएं

  • नियमित रूप से व्यायाम करें

नींद में सुधार (Improve your sleep) :

पीसीओएस और पेरिमेनोपॉज़ दोनों ही स्थितियों में नींद आने में परेशानी होती है। ऐसे में आप दिनचर्या में सुधार करके, खुद को अच्छी नींद लेने मौका दे सकती हैं।

किस तरह के बदलाव करें :

  • रात में हल्का खाना खाएं

  • नियमित समय पर सोए और उठे

  • बेडरूम में अव्यवस्था और इलेक्ट्रॉनिक स्क्रीन को कम करें

  • हर रोज़ व्यायाम करें (लेकिन बेड पर जाने से पहले नहीं)

  • बिस्तर पर जाने से पहले किताबें पढ़ें या मैडिटेशन करें

अनचाहे बालों का प्रबंधन (Managing unwanted hair) :

पीसीओएस और पेरिमेनोपॉज़ दोनों ही अनचाहे बालों के विकास का कारण बन सकते हैं, जो परेशान करने वाला हो सकता है।

वैक्सिंग, प्लकिंग, या हेयर रिमूवल क्रीम का उपयोग करने से मदद मिल सकती है।

जो लोग इससे परेशान हैं उनके लिए सबसे अच्छा होगा अपने डॉक्टर या ब्यूटी थेरेपिस्ट से अनचाहे बालों को हटाने के लिए सलाह लें। कुछ परिस्थितियों में डॉक्टर कोई ट्रीटमेंट प्रेसक्राईब कर सकता है।

हॉट फ्लेशेज़ राहत पाने की कोशिश करें (Ease hot flashes) :

पेरिमेनोपॉज़ के मुख्य और अलग लक्षणों में से एक है हॉट फ्लेशेज़, जो पीसीओएस वाली महिलाएं अनुभव नहीं कर सकती।

नीचे बताये जा रहे कुछ बातों पर ध्यान देकर फ्लेशेज़ को मैनेज करने में मदद मिल सकती है:

  • पतले कपड़े पहनना

  • ऐसे कपड़े पहनना जिसे हॉट फ्लेशेज़ का अनुभव करते ही हटाया जा सके

  • रूम टेम्परेचर ठंडा रखना

  • कैफीन, शराब और मसालेदार खाद्य पदार्थों से दूर रहना

  • अपने साथ एक हैंडी फैन रखना

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निष्कर्ष

Conclusion in hindi

Nishkarsh in hindi

पीसीओएस का कोई इलाज नहीं है, और आप मेनोपॉज़ के बाद भी इसके लक्षणों का अनुभव कर सकती हैं।

आम महिलाओं की तुलना में पीसीओएस वाली महिलाएं को मेनोपॉज़ देरी से शुरू हो सकता है।

अपने खान-पान में बदलाव करके और जीवनशैली में व्यायाम को शामिल करके पीसीओएस और पेरिमेनोपॉज़ के कुछ लक्षणों को दूर करने में या उसमें सुधार करने में मदद मिल सकती है।

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आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 26 Jun 2019

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