ओवुलेशन स्पोटिंग - पीरियड्स के बीच स्पोटिंग की पहचान कैसे करे ?

Ovulation Bleeding- How to identify spotting between periodsin hindi

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एक नज़र

  • ओवुलेशन रक्तस्राव आपके नियमित माहवारी के बाहर होने वाला रक्तस्राव है।
  • केवल 3 प्रतिशत महिलाएं ओवुलेशन रक्तस्राव या स्पॉटिंग का अनुभव करती हैं।
  • ओवुलेशन रक्तस्राव गर्भाधारण के लिए प्रयास करने का सबसे अच्छा समय माना गया है।
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Introduction

ओवुलेशन रक्तस्राव - क्या यह सामान्य है और इसकी पहचान कैसे करें

ओवुलेशन रक्तस्राव या ओवुलेशन स्पॉटिंग हल्का रक्तस्राव है, जो उस समय के आसपास होता है जब आप ओवुलेेट करती हैं।

ओवुलेशन तब होता है जब आपका अंडाशय (ovaries) एक अंडा (egg) जारी करती हैं। पीरियड्स के बाद ओवुलेशन तक आने वाले दिनों में, महिला शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर लगातार बढ़ता है।

महिला के अंडाशय (ovaries) एक अंडा (egg) जारी करने के बाद, एस्ट्रोजन का स्तर कम हो जाता है, और प्रोजेस्टेरोन का स्तर बढ़ने लगता है।

एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन के स्तर के बीच का असंतुलन हल्के रक्तस्राव का कारण बन सकता है, जो आमतौर पर एक नियमित अवधि की तुलना में बहुत हल्का होता है।

ज्यादातर मामलों में, इसे सामान्य माना गया है और किसी अन्य लक्षण का कारण नहीं बनता है।

यदि कोई व्यक्ति अन्य लक्षणों का अनुभव करता है, जैसे कि योनि से रक्तस्राव अधिक समय तक रहता है याने एक या दो दिन से ज्यादा, और इसके साथ शरीर में ऐंठन रहता है, तो इसका ओवुलेशन रक्तस्राव के अलावा कुछ और अंतर्निहित कारण हो सकता है।

जो लोग नियमित रूप से ओव्यूलेट नहीं करते हैं उनमें असामान्य रक्तस्राव पैटर्न हो सकते हैं, जैसे कि बहुत दिनों तक बहुत हल्का रक्तस्राव या २-३ महीनों में एक अवधि का होना

पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम (PCOS) और एंडोमेट्रियोसिस(endometriosis) सहित कई चिकित्सा स्थितियां, अनियमित चक्र का कारण बन सकती हैं।

हर महिला ओवुलेशन स्पॉटिंग का अनुभव नहीं करेगी।

एक अध्ययन में पाया गया है कि केवल 3 प्रतिशत महिलाएं दो मासिक धर्म चक्रों के बीच में स्पॉटिंग का अनुभव करती हैं।

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इस लेख़ में

 

ओवुलेशन स्पॉटिंग की पहचान कैसे करें?

How to identify ovulation bleedingin hindi

ovulation spotting ki pehchan kaise kare

यदि आप अपने दो मासिक धर्म चक्रों के बीच में स्पॉटिंग नोटिस करती हैं, तो यह ओवुलेशन स्पॉटिंग हो सकता है।

स्पॉटिंग हल्का योनि रक्तस्राव है, जो आपके नियमित माहवारी के दौरान नहीं, बल्कि उसके बाहर होता है

आमतौर पर, यह रक्तस्राव आपकी माहवारी के दौरान होने वाले रक्तस्राव से बहुत हल्का होता है।

खून का रंग स्पॉटिंग के कारण का सुराग दे सकता है, क्योंकि रक्तस्राव की गति के आधार पर उसका रंग बदलता है। कुछ महिलाओं में ओवुलेशन स्पॉटिंग हल्के गुलाबी या लाल रंग के रूप में होती है।

गुलाबी धब्बा एक संकेत है कि रक्त में सर्विकल फ्लुइड (cervical Fluid) भी मिला हुआ है। महिलाएं आमतौर पर ओवुलेशन के समय अधिक सर्विकल फ्लुइड का उत्पादन करती हैं।

ओवुलेशन स्पॉटिंग आमतौर पर एक या दो दिन तक रहती है।

एस्ट्रोजन हॉर्मोन के स्तर में परिवर्तन अक्सर इस प्रकार के रक्तस्राव का कारण होता है, और ओवुलेशन समय के आसपास हल्की स्पॉटिंग आमतौर पर एक गंभीर समस्या का संकेत नहीं देती है।

कुछ लोग ओवुलेशन रक्तस्राव को "एस्ट्रोजन सफलता रक्तस्राव" ("Estrogen breakthrough bleeding")कहते हैं।

ओवुलेशन स्पॉटिंग के समय दर्द और अन्य कुछ लक्षण दिखाई दे सकते है हालाँकि अधिकांश महिलाएं कुछ भी महसूस नहीं करती हैं।

ओवुलेशन स्पॉटिंग कुछ हल्के साइड इफेक्ट्स के साथ आ सकता है जो आपको आमतौर पर पीरियड्स के दौरान महसूस होते हैं। जैसे की -

इन लक्षणों पर पूरा ध्यान देने से महिलाओं मे गर्भधारण करने में मदद मिल सकती है।

और पढ़ें:अजवायन से पाएं पीरियड्स के दर्द से छुटकारा
 

ओवुलेशन स्पॉटिंग कब होता है

When does ovulation bleeding occur in hindi

ovulation ke doran blood ka nikalna kab hota hai

ओवुलेशन आमतौर पर आपकी माहवारी के पहले दिन के बाद 11 और 21 दिनों के बीच कभी भी हो सकता है, हालांकि यह आपके मासिक चक्र की लंबाई के आधार पर जल्दी या बाद में भी हो सकता है।

एक महिला को, मासिक चक्र के दौरान, कई बार ओवुलेशन हो सकता है और हर महीने एक अलग दिन भी ओवुलेशन हो सकता है। और ओवुलेशन के समय स्पॉटिंग १ या २ दिन तक रहती है।

यदि आप दो मासिक धर्म चक्रों के बीच माहवारी मे गंभीर रक्तस्राव और दर्द का सामना करती हैं तो यह गंभीर जटिलताओं का सूचक हो सकता है।

यदि रक्तस्राव एक से अधिक बार हो चुका है, तो यह संभव है कि यह ओवुलेट का संकेत नहीं है।

गर्भाशय में पॉलीप्स (polyps) और एंडोमेट्रियोसिस (endometriosis) आदि अन्य समस्या रक्तस्राव का कारण हो सकती है।

ऐसे में आपको अल्ट्रासाउंड (ultrasound) और हिस्टेरोस्कोपी (hysteroscopy) टेस्ट करने और सही निदान के लिए डॉक्टर की सलाह लेनी ज़रूरी होगी।

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ओवुलेशन रक्तस्राव और प्रेग्नेंसी

Ovulation spotting and pregnancy in hindi

periods ke beech mein spotting aur pregnancy ka kya relation hai, pregnancy me spotting kab hoti hai, ओवुलेशन स्पॉटिंग और प्रेगनेंसी में स्पॉटिंग में क्या अंतर है

ओवुलेशन को ट्रैक कर गर्भवती होने के अवसर को बढ़ाया जा सकता है। कुछ महिलाएं गर्भधारण को रोकने के तरीके के रूप में ओवुलेशन को भी ट्रैक करती हैं।

यदि आप गर्भवती होने की कोशिश कर रही हैं, और यदि आपको ओवुलेशन रक्तस्राव दिखाई देता है, तो इस समय के आसपास गर्भधारण करने की कोशिश करना आदर्श हो सकता है।

ओवुलेशन रक्तस्राव आपकी प्रजनन क्षमता को दर्शाता है, यह आपके लिए गर्भाधारण के लिए प्रयास करने का सबसे अच्छा समय है। ओवुलेशन स्पॉटिंग बहुत कम महिलाओं में होती है।

आप स्पॉटिंग का अनुभव किए बिना भी ओव्यूलेट कर सकती हैं।

यदि आप गर्भधारण करने की कोशिश कर रही हैं, तो अपने मासिक धर्म चक्र को ट्रैक करें और ओवुलेशन के अन्य संकेतों को देखें, जैसे कि शरीर के तापमान में परिवर्तन।

ध्यान रखें कि एक अंडाणु निषेचन(fertilization) के लिए केवल 12-24 घंटों के दौरान उपलब्ध होता है।

शुक्राणु महिला के शरीर में तीन से पांच दिनों के लिए रह सकते हैं, अगर ओवुलेशन दिनों में या ओवुलेशन के ३-४ दिन पहले असुरक्षित यौन संबंध बनाती हैं, तो भी आप गर्भवती हो सकती हैं।

हालांकि, यदि आप ओवुलेशन के बाद दिन सेक्स करती हैं, तो आप गर्भवती होने की संभावना कम हो जाती है। अगर आप प्रेग्नेंट है तो ये कैसे जाने की ये प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली स्पॉटिंग है या ओवुलेशन दौरान होनेवाली स्पॉटिंग है।

कभी कभी महिलाये ओवुलेशन स्पॉटिंग और प्रेगनेंसी में स्पॉटिंग में अंतर कर नहीं पाती है

जबकि ओवुलेशन स्पॉटिंग उस समय के आसपास होती है जब आपका शरीर एक अंडा जारी करता है, आरोपण (implantation ) स्पॉटिंग तब होता है जब एक निषेचित अंडा आपके गर्भाशय के अंदरूनी परत से जुड़ जाता है।

प्रत्यारोपण स्पॉटिंग (Implantation spotting) गर्भावस्था के शुरुआती लक्षणों में से एक है।

लगभग एक तिहाई गर्भवती महिलाएं इसका अनुभव करती है।

ओवुलेशन स्पॉटिंग आमतौर पर आपके पीरियड्स के मध्य में शुरु होती है और इसके विपरीत पीरियड होने से कुछ दिन पहले इम्प्लांटेशन स्पॉटिंग हो सकती है जो प्रेगनेंसी के तरफ इशारा करती है।

इम्प्लांटेशन के दौरान महिलाये स्पॉटिंग के अलावा निम्नलिखित लक्षणों का भी अनुभव कर सकती है:

  • सिर दर्द
  • जी मिचलाना (nausea)
  • मूड के बदलाव (mood swings)
  • हल्की ऐंठन (light cramping)
  • स्तन कोमलता
  • पीठ दर्द
  • थकान

इम्प्लांटेशन के दौरान स्पॉटिंग होना चिंता की बात नहीं होती है और यह अजन्मे बच्चे के लिए कोई खतरे की बात नहीं होती है। अगर ज्यादा रक्तस्त्राव हो तो आपको अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।

यदि आप ६ महीने या एक वर्ष से अधिक समय से गर्भ धारण करने की कोशिश कर रहे हैं और यदि आप की उम्र ३५ से अधिक हैं - तो अपने डॉक्टर से बात करें।

वे यह देखने के लिए परीक्षण कर सकते हैं कि क्या आप अच्छे से ओवुलेट (ovulate) कर रही हैं या नहीं, यदि आप या आपके साथी को बांझपन की समस्या है या नहीं और प्रेगनेंसी न रहने का कारण क्या हो सकता है।

और पढ़ें:अनियमित माहवारी का इलाज
 

ओवुलेशन रक्तस्राव और पीरियड्स में अंतर

Difference between Ovulation spotting and Menstruationin hindi

ovulation spotting aur periods ke bleeding me kya antar hota hai in hindi

जब महिलाओं मे पीरियड्स आते है तब वे रक्तस्राव का अनुभव करती है लेकिन यह रक्तस्त्राव ओवुलेशन में होने वाले स्पॉटिंग से अलग होता है।

ओवुलेशन रक्तस्राव और पीरियड्स कैसे अलग होता है यह जानते है -

  • ओवुलेशन स्पॉटिंग में रक्त का प्रवाह में हल्का होता है और उसके लिए आपको पैड लेने की जरुरत नहीं पड़ती। लेकिन आपके मासिक धर्म के कारण होने वाले रक्तस्राव में आमतौर पर पैड, टैम्पोन या पीरियड्स में उपयोग में आने वाले कप की आवश्यकता होती है।
  • ओवुलेशन स्पॉटिंग केवल एक या दो दिन तक रहता है लेकिन पीरियड्स लगभग पांच दिनों तक रहता है और लगभग 30 से 80 मिलीलीटर (एमएल) रक्त बाहर निकलता है।
  • ओवुलेशन स्पॉटिंग आमतौर पर आपके पीरियड्स के मध्य में शुरु होती है और पीरियड्स महीने में हर 21 से 35 दिनों में होते हैं।
  • ओवुलेशन स्पॉटिंग में रक्त गुलाबी, लाल या भूरे रंग का होता है और पीरियड्स में का खून बहना आमतौर पर गहरे लाल रंग का होता है।
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ओवुलेशन स्पॉटिंग के कारण

Causes of ovulation spotting in hindi

periods ke beech mein rakh strav kyun hota hai

ओवुलेशन के दौरान तेजी से होने वाले हार्मोनल परिवर्तनों के कारण ओवुलेशन स्पॉटिंग हो सकती है।

एक अध्ययन में, ओवुलेशन के आसपास उन महिलाओं में ल्यूटियल प्रोजेस्टेरोन (luteal progesterone) और ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (luteinizing hormone - LH) के उच्च स्तर को देखा गया जिन्होंने ओवुलेशन रक्तस्राव का अनुभव किया था।

ओवुलेशन स्पॉटिंग के अन्य कारणों में शामिल हैं:

१. ओवुलेशन के दौरान एस्ट्रोजेन (Estrogen) का स्तर कम होने के कारण, गर्भाशय की परत की मोटाई कम हो जाती है क्योंकि यह लाइनिंग को बहाना शुरू कर देता है। यह ओवुलेशन के दौरान रक्तस्राव का कारण बन सकता है।

२. जब एक अंडा रिलीज होता है, तो मेच्युर फोल्लिकल (mature follicle) अंडाशय से फट कर बाहर निकलता है, जिससे रक्तस्राव हो सकता है।

और पढ़ें:अनियमित माहवारी या अनियमित पीरियड
 

निष्कर्ष

Conclusionin hindi

यदि आप दो मासिक धर्म चक्रों के बीच में ब्लीड करती हैं तो इसे देख आप स्वाभाविक रूप से चिंतित हो सकती हैं।

यह रक्तस्राव ओवुलेशन के कारण हो सकता है।

ओवुलेशन के दौरान स्पॉटिंग बहुत आम नहीं है और हार्मोनल उतार-चढ़ाव का संकेत हो सकता है।

हालांकि, यदि आपको भारी स्पॉटिंग और गंभीर दर्द और असुविधा के साथ दो मासिक चक्रों के बीच में रक्तस्राव होता है, तो यह अन्य जटिलताओं के कारण हो सकता है।

यदि आप यह अनुभव करती हैं, तो आपको रक्तस्राव का कारण जानने के लिए अल्ट्रासाउंड के लिए डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

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आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 02 Jul 2020

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