Laser Assisted Hatching - IVF | Zealthy

लेज़र असिस्टेड हैचिंग - फ़ायदे और जोखिम

Laser assisted hatching - benefits and risks in hindi

Laser Assisted Hatching kya hai, fayde or jokhim

एक नज़र

  • लेज़र असिसटेंट हैचिंग आईवीएफ के क्षेत्र की एडवांस तकनीकों में से एक है।
  • लेज़र असिसटेंट हैचिंग, आईवीएफ के साथ प्रेगनेंसी की संभावना को बढ़ा सकती है।
  • अधिक उम्र वाली महिलाओं को गर्भ धारण करने में मदद करती है ये तकनीक।
  • इस तकनीक से मोनोज़ायगोटिक जुड़वा बच्चे होने का बढ़ जाता है रिस्क।

आईवीएफ की मदद से बांझपन का सामना कर रहे दंपत्ति के लिए माता-पिता बनना संभव हो गया है।

हालांकि कई बार जिन महिलाओं की उम्र अधिक होती है या फिर अगर किसी महिला को कभी ट्यूबरक्लोसिस (tuberclosis) रहा है या फिर जिन्हें पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम है, उनके लिए आईवीएफ के सफल होने की संभावना कम हो जाती है।

लेकिन मेडिकल साइंस में लगातार हो रही उन्नति ने इस समस्या का समाधान भी निकाल लिया है।

जी हां, अब इन समस्याओं से निपटने के लिए आईवीएफ के साथ लेज़र असिस्टेड हैचिंग (laser assisted hatching) तकनीक का इस्तेमाल होने लगा है।

इसकी मदद से भ्रूण के सफल इम्प्लांटेशन करने के साथ-साथ एक से अधिक बच्चे होने का रिस्क भी कम रहता है।

आइए आपको विस्तार से लेज़र असिस्टेड हैचिंग के बारे में बताते हैं और जानते हैं क्या है इसके फायदे और नुक्सान।

इस लेख़ में/\

  1. लेज़र असिस्टेड हैचिंग तकनीक क्या होती है?
  2. लेज़र असिस्टेड हैचिंग की सिफारिश कब की जाती है?
  3. लेज़र असिस्टेड हैचिंग के फ़ायदे
 

1.लेज़र असिस्टेड हैचिंग तकनीक क्या होती है?

What is laser assisted hatching technique? in hindi

Laser assisted hatching kya hai in hindi

विज्ञान और प्रौद्योगिकी में उन्नति ने लोगों के जीवन को काफी हद तक सुलझा दिया है।

प्रौद्योगिकी हमें हर क्षेत्र में काम करने में मदद कर रही है।

लेज़र हैचिंग असिस्टेड आईवीएफ के क्षेत्र में एडवांस तकनीकों में से एक है।

ये तकनीक उन महिलाओं के लिए वरदान सिद्ध हो सकती है जिनके पहले एआईवीएफ असफल हो चुके हैं , जो पीसीओडी की मरीज़ हैं, जो टीबी रोग से ग्रसित हैं या जिनकी उम्र अधिक है।

लेज़र असिस्टेड हैचिंग का इस्तेमाल इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (in-vitro-fertilisation) में किया जाता है।

ये तकनीक भ्रूण के आरोपण (implantation) को एक महिला के गर्भाशय के अस्तर (uterine lining) में सुधार करने में मदद करती है।

इसे आईवीएफ या आईसीएसआई की प्रक्रिया के दौरान फर्टिलाइज़ेशन होने के तीन दिन बाद किया जाता है।

इस प्रक्रिया में भ्रूण को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है।

इसके बाद एम्ब्र्यो को मरीज़ के यूटेरस में आरोपण के लिए वापस डाल दिया जाता है।

यह एक सुरक्षित तकनीक है, जो ज़ोन पेलुसीडा (zona pellucida) के एक छोटे से हिस्से को कमज़ोर और पतला करने में मदद करती है।

अगर ज़ोन पेलुसीडा बहुत सख्त होता है, तो मामला अधिक जटिल हो जाता है।

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अंडे बाहर नहीं निकलेंगे या बाहर निकलने के लिए अत्यधिक ऊर्जा का उपयोग कर सकते हैं, जिससे सफल इम्प्लांटेशन की संभावना कम हो जाती है।

ये प्रक्रिया लैब में की जाती है।

लेज़र असिस्टेड हैचिंग में भ्रूण के ऊपर खोल (protective outer shell), ज़ोना पेलुसीडा (Zona pellucida) को लेज़र शॉट देकर पतला कर दिया जाता है।

इससे भ्रूण आसानी से बाहर निकल जाता है और यूटरस में चिपक जाता है।

इस प्रक्रिया के बाद प्रेगनेंसी की संभावना बढ़ जाती है।

सफल गर्भावस्था के लिए, भ्रूण को प्रभावित किए बिना यह हैचिंग की जाती है।

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2.लेज़र असिस्टेड हैचिंग की सिफारिश कब की जाती है?

When laser assisted hatching is recommended in hindi

Laser assisted hatching ki sifarish kab ki jati hai in hindi

लेज़र असिस्टेड हैचिंग की सिफारिश निम्नलिखित मामलों में की जाती है :-

  • जिन महिलाओं की उम्र 37 वर्ष से अधिक है।
  • जिन महिलाओं में फ्रोजेन एम्ब्र्यो रिप्लेसमेंट (frozen embryo replacement) हुआ है।
  • जिन रोगियों ने एक असफल आईवीएफ (IVF) या आईसीएसआई (ICSI) उपचार का सामना किया है।
  • जिनके भ्रूण की गुणवत्ता (quality) और मात्रा (quantity) खराब हो।
  • जिनके पहले के आईवीएफ साइकिल में फर्टिलाइजेशन के रेट (rate) कम हैं।
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3.लेज़र असिस्टेड हैचिंग के फ़ायदे

Advantages of laser assisted hatching in hindi

Laser assisted hatching ke fayde in hindi

आईवीएफ के साथ लेज़र असिस्टेड हैचिंग के कई फायदे हैं :-

  • इस उपचार में, केवल भ्रूण को स्थानांतरित करने की आवश्यकता होती है।
  • असिस्टेड हैचिंग इंप्लांटेशन सक्सेस रेट बढ़ा सकती है।
  • इस तकनीक के माध्यम से ब्लास्टोसिस्ट कल्चर (blastocyst culture) भी संभव हो जाता है। जिसकी मदद से सबसे बेहतर और मज़बूत भ्रूण को महिला के गर्भाशय में रख दिया जाता है। इससे गर्भावस्था के सफल होने की संभावना 10-15 प्रतिशत और बढ़ जाती है।
  • यह तकनीक एक से अधिक बच्चे (multiple pregnancy) के होने के रिस्क को कम करती है।

आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: 09 Dec 2019

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