लैप्रोस्कोपी सर्जरी की प्रक्रिया

Laparoscopic surgery process in hindi

Laparoscopic Surgery ki prakriya hindi me in hindi


एक नज़र

  • पेट दर्द या पेल्विक में दर्द की जांच करने के लिए लैप्रोस्कोपी काफी लाभदायक होती है।
  • पेट मे ट्यूमर की जांच लिए कुछ टेस्ट किये जाते हैं जैसे एंडोस्कोपी (endoscopy), एक्स-रे (x-ray), सीटी (CT), लैप्रोस्कोपी आदि।
  • लैप्रोस्कोपिक सर्जरी डायग्नोस्टिक (diagnostic) और ऑपरेटिव (operative), दो तरह की होती है।
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Introduction

Laparoscopic surgery process | Zealthy

अगर कोई महिला काफी समय से गर्भवती होने का प्रयास करने के बावजूद सफल नही हो पा रही हो तो यह बांझपन की समस्या हो सकती है।

इसी बांझपन की समस्या को दूर करने के लिए लैप्रोस्कोपी सर्जरी की मदद ली जा सकती है।

लैप्रोस्कोपी से पहले कुछ टेस्ट जैसे एंडोस्कोपी (endoscopy), एक्स -रे (x-ray), सीटी (CT) आदि की जाती है।

लैप्रोस्कोपी के जरिये महिला के गर्भवती होने के आसार बढ़ जाते हैं क्योंकि इससे यह पता चल जाता है कि परेशानी क्या है ?

समस्या का पता चलने के कारण इसके सफल उपचार की संभावना अधिक हो जाती है।

आइये इस लेख माध्यम से लैप्रोस्कोपी सर्जरी के बारे में विस्तार से जानते हैं।

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इस लेख़ में

 

लैप्रोस्कोपिक सर्जरी क्या है?

What is laparoscopic surgery? in hindi

Laparoscopic surgery kya in hindi

लैप्रोस्कोपी एक तरह की सर्जिकल डायग्नोस्टिक प्रक्रिया (diagnostic process) या ऑपरेटिव प्रक्रिया (operative process) होती है जिसके प्रयोग पेट के अंदरूनी अंगों को देखने के लिए किया जाता है।

यह प्रक्रिया ज्यादा जोखिम भी भरी नहीं होती है।

इस प्रक्रिया के दौरान अंदरूनी अंगों तक पहुँचने के लिए लैप्रोस्कोप नामक यंत्र (device) का प्रयोग किया जाता है।

यह 1-2 घंटे की प्रक्रिया है और इसके लिए हॉस्पिटल में एक दिन रुकना काफी रहता है।

अगर कुछ डायग्नोस्टिक प्रक्रिया की जाती है तो रोगी 7 दिनों के अंदर ही सामान्य महसूस करने लगता है।

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लैप्रोस्कोपी क्यों की जाती है?

Why do you have laparoscopic surgery?in hindi

Laparoscopic kyon ki jaati hai in hindi

किसी भी महिला की लैप्रोस्कोपी उसके प्रजनन प्रणाली, मूत्राशय या पाचन तंत्र में किसी भी समस्या को जानने और उस समस्या का निदान करने के लिए की जाती है।

आइये जानते है किसी भी महिला की लैप्रोस्कोपी करने के विभिन्न कारण :

  • पेट दर्द या पेल्विक दर्द की जांच करने और उसका कारण पता लगाने के लिए अक्सर लैप्रोस्कोपी की जाती हैं।
  • इस विधि का प्रयोग तब किया जाता है जब बिना किसी अन्य प्रक्रिया से पेट की समस्या का ठीक से निरीक्षण ना हो पाए।
  • लैप्रोस्कोपी का उपयोग पेट मे ट्यूमर की जांच के लिए किया जाता है।
  • इसके अलावा किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या जैसे पीआईडी (PID), इनफर्टिलिटी का कारण,फाइब्रॉएड, एक्टोपिक प्रेगनेंसी, ओवेरियन सिस्ट, लिम्फ नोड्स आदि के लिए भी इस विधि का प्रयोग किया जाता है।
और पढ़ें:अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान की सफलता को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक
 

लैप्रोस्कोपी सर्जरी की प्रक्रिया कैसे होती है?

What is the procedure of laparoscopic surgery? in hindi

Laparoscopic surgery ki prakriya kaise hoti hai in hindi

लैप्रोस्कोपी सर्जरी की प्रक्रिया में तीन चरण होते हैं।

प्रक्रिया से पहले का चरण, प्रक्रिया के दौरान और प्रक्रिया के बाद का चरण।

लैप्रोस्कोपी प्रक्रिया के तीन चरण इस प्रकार हैं :

  • पहला चरण - प्रक्रिया से पहले (First step - Before surgery)
    लैप्रोस्कोपी सर्जरी से पहले यह देखा जाता है कि महिला की सर्जरी डायग्नोस्टिक (diagnostic) है या ऑपरेटिव (operative) है।
    सर्जरी के प्रकार के आधार सर्जरी से पहले की तैयारियां की जाती हैं।
    सर्जरी वाले डॉक्टर के लिए यह जानना महत्वपूर्ण होता है कि महिला कौन सी दवाएं ले रही है ताकि प्रक्रिया से पहले डॉक्टर उन दवाओं के साइड-इफेक्ट्स को जानकार उन्हें लेने या ना लेने की सलाह दे सकें।
    प्रक्रिया से पहले कुछ टेस्ट - रक्त परीक्षण, मूत्र विश्लेषण, छाती का एक्स-रे और साथ ही इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (electrocardiogram) होते हैं।
    लैप्रोस्कोपी सर्जरी से पहले महिला को कम से कम 8 घंटे बिना कुछ खाये -पिये रहना होता हैं।
    इस प्रक्रिया को शुरु करने से पहले एनीमा (anima) दिया जाता है।
    लैप्रोस्कोपिक प्रक्रिया शुरू होने से पहले एंटीकोआगुलंट्स (anticoagulants) और नॉन -स्टेरायडल एंटीबायोटिक्स (non-steroidal antibiotics) पेशेंट को दी जाती है।
    डॉक्टर आपको सभी दवाओं को लेने का निर्देश देते हैं।
    इसी के साथ डॉक्टर पेशेंट को प्रक्रिया शुरू होने से पहले क्या आहार या खुराक लेनी है, इसे भी निर्धारित करते हैं।
  • दूसरा चरण - प्रक्रिया के दौरान (Second step - During surgery)
    लैप्रोस्कोपी की प्रक्रिया की शुरुआत पेशेंट को एनैस्थिसिआ (anesthesia) देकर की जाती है ताकि पेशेंट को प्रक्रिया के दौरान कोई दर्द महसूस ना हो।
    सर्जन पेट में एक या एक से अधिक छोटे चीरे लगाते हैं।
    इसके बाद इन चीरों के माध्यम से पेट में एक लेप्रोस्कोप और कुछ छोटे सर्जिकल उपकरण डालकर पेट के चारों ओर निरीक्षण किया जाता है।
    पेट से गैस को बाहर निकालने के लिए भी पेट में एक ट्यूब डाली जाती है।
    अब ऑपरेशन शुरू किया जाता है। पेट में कार्बन डाइऑक्साइड गैस भरी जाती है जिसके द्वारा प्रजनन अंगों और उसमें होने वाले परिवर्तनों को देखा जा सके।
    इसी के साथ सर्जन लेप्रोस्कोपिक ट्यूब शरीर में लेकर जाते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रजनन प्रणाली के अन्य हिस्सों में कोई ओर रुकावट तो नहीं है।
    इन उपकरणों की मदद से ओवेरियन सिस्ट (ovarian cyst), अल्सर (cysts), फाइब्रॉएड (fibroids), एक्टोपिक प्रेगनेंसी (ectopic pregnancy) और एडीनोइड (adenoids) के होने की जांच की जाती है।
    सर्जन एक बायो कम्पेटिबल डाई (biocompatible dye) को गर्भाशय ग्रीवा के अंदर इंजेक्ट करते हैं।
    इसकी मदद से फैलोपियन ट्यूब (fallopian tubes) को वीडियो मॉनिटर पर स्पष्ट रूप से देखा जाता है।
    अगर आवश्यकता होती है तो सर्जन एंडोमेट्रियोसिस (endometriosis) करने के लिए एक टुकड़ा काट लेते हैं जिसको बायोप्सी के लिए माइक्रोस्कोप की मदद से जांचा जाता है।
    प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद कार्बन डाइऑक्साइड गैस को पेट से बाहर निकाल दिया जाता है, टांके लगाकर चीरों को बंद कर दिया जाता है और ड्रेसिंग कर दी जाती है।
    प्रक्रिया होने के एक दिन बाद ही पेशेंट घर जा सकते हैं और 7 दिनों के अंदर ही सामान्य महसूस करने लगते हैं।
    कुछ मामलों में डॉक्टर पेशेंट को ऑब्जरवेशन के लिए एक से ज्यादा दिन के लिए हॉस्पिटल में रख सकते हैं।
    सर्जरी के बाद पेशेंट को डॉक्टर के निर्देशों का पालन करना होता है जैसे अधिक से अधिक फ्लुइड्स (fluids) लेना ताकि शरीर हाइड्रेट (hydrate) रह सकें और समस्या को जानकर उसका निदान किया जा सके और जल्द से जल्द उपचार प्रक्रिया शुरू हो सके।
  • तीसरा चरण - प्रक्रिया के बाद (Third step - After surgery)
    लेप्रोस्कोपी प्रक्रिया होने के बाद आपको पेट के आस-पास थोड़ा दर्द महसूस हो सकता है।
    सर्जरी के बाद कुछ महिलाओ को कंधे में भी दर्द की समस्या होती है।
    कभी-कभी पेट में गैस का दबाव होने से दर्द उठता है जो सामान्य है।
    2-3 दिनों भीतर ही यह दर्द चला जाता है।
    सर्जरी की रिपोर्ट आने के बाद अपने डॉक्टर से अवश्य पूछें कि आपके शरीर में सब कुछ सामान्य है या नहीं।
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निष्कर्ष

Conclusionin hindi

Nishkarsh

लैप्रोस्कोपी एक सामान्य प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक महिला के प्रजनन अंगों के साथ-साथ किसी अन्य समस्या जैसे ओवेरियन सिस्ट (ovarian cyst),अल्सर (cysts), फाइब्रॉएड (fibroids), एक्टोपिक प्रेगनेंसी (ectopic pregnancy) और एडीनोइड (adenoids) आदि के होने की जांच की जाती है।

इसी के साथ पेट मे ट्यूमर और गर्भ धारण ना कारण पाने की समस्या में भी लैप्रोस्कोपी प्रक्रिया का सहारा लिया जाता है।

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आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 03 Jun 2020

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