ladki ko pregnant kaise kiya jata hai

लड़की को प्रेग्नेंट कैसे किया जाता है?

How to make a woman pregnant in hindi

Ladki ko pregnant kaise kiya jata hain

एक नज़र

  • महिला एवं पुरुष की सेक्सुअल रिस्पांस साइकिल को चार चरणों को बांटा जाता है।
  • पुरुष के वीर्य की गुणवत्ता और उसमें शुक्राणु की मात्रा महिला की गर्भधारण करने में महत्वपूर्ण कारक होता है।
  • महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु का निषेचन होने पर गर्भ धारण होता है।

एक दंपति या एक परिवार तभी पूरा माना जाता है, जब उसमें शिशु का जन्म हो जाता है। लेकिन महिला को गर्भवती करना या स्त्री का गर्भवती होना इतना आसान भी नहीं होता।

हालांकि, अपनी प्रजनन प्रक्रिया (reproduction process) के बारे में मूलभूत जानकारी जैसे महिला मासिक धर्म का समय, महिला के डिंबोत्सर्जन (ovulation) का समय आदि पता होने पर स्त्री के गर्भ धारण करने की संभावना बढ़ जाती है।

इसके पीछे का कारण यह है कि इन सभी बातों को ध्यान में रख कर एक महिला और उसका साथी सही समय पर यौन क्रिया (sex) में लिप्त होकर अपने परिवार को आगे बढ़ाने की संभावना और अधिक बढ़ा सकते हैं। आइए लड़की को प्रेग्नेंट करने की संभावनों पर विशेष चर्चा करते हैं!

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इस लेख़ में/\

  1. सम्भोग के दौरान क्या होता है?
  2. सम्भोग के बाद क्या होता है?
  3. महिला को गर्भवती करने के आसान तरीके
  4. निष्कर्ष
 

1.सम्भोग के दौरान क्या होता है?

What happens during intercourse or sex in hindi

Sex ke dauran kya hota hai

सम्भोग या सेक्स के दौरान महिला एवं पुरुष दोनों के ही शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं, जिन्हें समझना और जानना आवश्यक है। यौन क्रिया के घटनाक्रम को सेक्सुअल रिस्पांस साइकिल (sexual-response cycle) के नाम से जाना जाता है, जिसके अंतर्गत शरीर द्वारा अनुभव किये जाने वाले वह सभी भाव आते हैं, जो महिला अथवा पुरुष के यौन क्रिया के कारण उत्तेजित होने के कारण महसूस करते हैं।

सेक्सुअल रिस्पांस साइकिल को चार चरणों को बांटा जाता है : -

  • उत्तेजना (excitement),
  • प्लेटयू (plateau),
  • चरमसुख (orgasm) एवं
  • रेसोल्यूशन (resolution)

इन सभी चरणों की कोई स्पष्ट शुरुआत या अंत नहीं होता है अपितु यह सभी यौन क्रिया की समस्त प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। महिला एवं पुरुष दोनों ही इन चारों चरणों का अनुभव करते हैं बस इनका समय अलग-अलग हो सकता है।

तथ्यों के अनुसार, पुरुषों को चरमसुख का अनुभव महिलाओं से पहले हो जाता है। इसलिए यौन क्रिया के दौरान महिला एवं पुरुष को एक ही समय पर चरमोत्कर्ष प्राप्त हो यह दुर्लभ ही देखा जाता है।

आइए इन चारों चरणों की विस्तार से चर्चा करते हैं : -

  • पहला चरण - उत्तेजना (excitement)

यह चरण सम्भोग के 10 से 30 सेकंड के अंदर शुरू हो जाता है जो कई घंटों तक रह सकता है। पुरुषों के लिंग (penis) के सीधा खड़े हो जाने पर और उनके निप्पल (nipple) कड़े हो जाने पर उन्हें उत्तेजित माना जाता है।

इसी तरह महिला में योनी से द्रव्य के स्त्राव शुरू हो जाने पर एवं योनी और स्तन के आकार में बदलाव पर उन्हें उत्तेजित माना जाता है। इसके अलावा महिला एवं पुरुष दोनों में ही दिल की धड़कन तेज़ होना, रक्तचाप बढ़ना एवं सांस कि गति बढ़ना देखा जाता है।

  • दूसरा चरण - प्लेटयू (plateau)

पहले चरण में आये बदलाव इस चरण में भी देखे जा सकते हैं। इसके अलावा, पुरुषों का लिंग पूर्ण रूप से खड़ा एवं कसा हुआ हो जाता है। इसके साथ ही वृषण (testes) वृषणकोष (scrotum) में चले जाते हैं।

महिला की योनि का बाहरी हिस्सा फूल जाता है और योनी का अंदरूनी भाग सिकुड़ जाता है। महिला एवं पुरुष दोनों की हृदय गति बढ़ जाती है और मांसपेशियों में ऐंठन महसूस होने लगती है जिसे “सेक्स फ्लश” (sex flush) के नाम से जाना जाता है।

  • तीसरा चरण - चरमसुख (Orgasm)

यह यौन प्रक्रिया का आखिरी चरण होता है जो सबसे छोटा होता है और कुछ सेकंड के लिए रहता है। पुरुष के मूत्रमार्ग भाग (uretheral bulb) में वीर्य (semen) एकत्रित हो जाता है जिसके चलते चरमसुख की प्राप्ति हो सकती है।

इसके बाद पुरुष के लिंग से वीर्य बाहर आता है, जिसके दौरान संकुचन (contraction) हो सकती है। महिला में योनि हर सेकंड के आठवें भाग में संकुचित होती है। इसके अलावा गर्भाशय में भी सकुंचन महसूस किये जा सकते हैं। इसके साथ ही सांस गति, हृदय गति एवं रक्तचाप बढ़ने लगते हैं और मांसपेशियों में ऐठन महसूस होती है।

  • चौथा चरण - रेसोल्यूशन (resolution)

इस चरण में पुरुष एवं महिला अपनी सामान्य स्थिति में आते हैं। यह चरण कुछ मिनट से आधे घंटे तक चल सकता है। पुरुष का लिंग अपनी सामान्य स्थिति में आ जाता है और महिला में उसका गर्भाशय एवं योनी अपनी सामान्य स्थिति में आ जाते हैं। दोनों में ही हृदय गति, सांस गति एवं मांसपेशियों की ऐंठन सही हो जाती है।

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2.सम्भोग के बाद क्या होता है?

What happens after intercourse or sex in hindi

Sex ke baad kya hota hai

गर्भधारण करना असल परिस्थिति में एक जटिल प्रक्रिया है। कई बार पुरुष का वीर्य महिला के अंडे (ovum) तक पहुँच ही नहीं पाता। इसलिए सिर्फ यौन क्रिया में लिप्त होने का अर्थ यह नहीं होता कि महिला गर्भवती हो ही जाएगी। असल में यौन क्रिया के चरणों के साथ-साथ उसके बाद होने वाली प्रक्रिया के बारे में जानना भी ज़रूरी है। नीचे सम्भोग के बाद होने वाली कुछ महत्वपूर्ण चीज़ों के बारे में बताया गया है।

महिला के अंडाणु (ovum) तक पुरुष के वीर्य को पहुँचने में लगने वाला समय – अंडाणु एवं शुक्राणु के सफलता पूर्वक मिलने और एक भ्रूण बनाने की प्रक्रिया में कई अन्य कारक शामिल होते हैं।

पुरुष के वीर्य की गुणवत्ता और उसमे शुक्राणु की मात्रा एवं शुक्राणु की गतिशीलता महत्वपूर्ण कारक हैं। एक पुरुष के वीर्य में 40 मिलियन से लेकर 160 मिलियन तक शुक्राणु हो सकते हैं।

शुक्राणु महिला के अंडाणु तक आधे घंटे में पहुँच सकते हैं। महिला के शरीर में 12-24 घंटों तक जीवित रहते हैं। महिला के शरीर में पहुंचे वीर्य में उपलब्ध करोड़ों शुक्राणुओं में से सिर्फ कुछ ही अंडाणु तक पहुँच पाते हैं। सबसे अधिक गति वाला शुक्राणु अंडाणु के साथ मिलकर भ्रूण बनाता है जो विकसित होकर शिशु का आकार ले लेता है।

महिला के सफलतापूर्वक गर्भधारण करने में कई चरण शामिल होते हैं। महिला के शरीर में डिंबोत्सर्जन (ovulation) होने के बाद यदि स्त्री एवं उसका साथी सम्भोग की क्रिया में लिप्त होते हैं तब गर्भवती होने की संभावना बढ़ जाती है। [1]

डिंबोत्सर्जन के बाद महिला का अंडाणु अंडाशय से फेलोपियन ट्यूब (fallopian tube) की तरफ चलता है। अंडाणु ट्यूब में तब तक रहता है जब तक शुक्राणु उसे निषेचित (fertilize) नहीं कर देता। यदि निषेचन नहीं होता है तो अंडाणु उसके मासिक धर्म के माध्यम से शरीर से बाहर आ जाता है।

यौन क्रिया के बाद यदि पुरुष का वीर्य महिला के शरीर में प्रवेश कर जाता है, तो शुक्राणु का महिला की फेलोपियन ट्यूब में मौजूद अंडाणु तक पहुँचना और उसके साथ मिलन गर्भधारण करने में महत्वपूर्ण चरण है। शुक्राणु के अंडाणु के साथ मिलने पर ही शिशु का लिंग भी निर्धारित हो जाता है। [2]

इसके पश्चात कोशिकाएं बढ़ती हैं और भ्रूण बन जाता है जो ट्यूब को छोड़ गर्भाशय की तरफ चला जाता है। गर्भाशय तक सफलतापूर्वक पहुँचने के बाद भ्रूण गर्भाशय में खुद को प्रत्यारोपित (implant) कर लेता है।

इसके बाद महिला के शरीर में गर्भधारण से जुड़े हॉर्मोन बनने लगते और उन्हीं की सहायता से महिला के गर्भवती होने का पता चलता है। इसके बाद नौ महीने या गर्भकाल के दौरान भ्रूण का विकास होता है और महिला के गर्भ में शिशु का जीवन आरम्भ हो जाता है।

 

3.महिला को गर्भवती करने के आसान तरीके

Easy ways to get a woman pregnant in hindi

Ladki ko kaise pregnant kare aasan tariko se

हालांकि, किसी भी महिला को गर्भवती करने का कोई जाना माना तरीका या फ़ॉर्मूला नहीं हैं, फिर भी कुछ मूलभूत जानकारी होने से गर्भवती होने की संभावना बढ़ाई अवश्य जा सकती है।

महिला को प्रेग्नेंट करने के आसान तरीके : -

  • महिला को अपनी प्रजनन चक्र (reproductive cycle) की जानकारी होनी चाहिए। इसमें मासिक धर्म एवं डिंबोत्सर्जन का समय पता होना शामिल होता है, ताकि उसके अनुसार ही महिला सम्भोग क्रिया में लिप्त हो सके। महिला एवं उसके साथी को कोशिश करनी चाहिए कि महिला के डिंबोत्सर्जन यानि ओवुलेशन वाले समय वे अधिक से अधिक सम्भोग की क्रिया करें।
  • महिला को अपने वजन पर ध्यान देना चाहिए। बहुत अधिक वजन होने पर गर्भधारण के लिए आवश्यक हॉर्मोन शरीर में बन नहीं पाते और अत्यधिक पतले या कम वजन होने पर गर्भाशय में शिशु को संभालने की ताकत नहीं रहती जिसके चलते गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है। महिला को पौष्टिक भोजन लेना चाहिए जिससे शरीर स्वस्थ बने और उसे शक्ति मिले। [3]
  • धूम्रपान एवं शराब का सेवन बंद करने से गर्भधारण में समस्या आने की संभावना कम हो जाती है।
  • सम्भोग करते समय गर्भवती होने में मदद करने वाली सेक्स पोजीशन में सेक्स करना सहायक होता है।

इसके अलावा यह ज़रूरी है कि महिला एवं पुरुष को अपनी आयु के अनुसार गर्भधारण में आने वाली दिक्कत के बारे में अपने डॉक्टर से परामर्श करें और उसी के अनुसार कदम उठाएं। इसके साथ ही बहुत समय से कोशिश करने के बाद भी यदि महिला गर्भवती ना हो पा रही हो तो जल्द से जल्द एक अच्छे डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।

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4.निष्कर्ष

Conclusionin hindi

Nishkarsh

सम्भोग या यौन क्रिया जहाँ एक ओर प्रेम का एक तरीका है, वही अपने परिवार को आगे बढ़ाने का एक माध्यम भी है। जो महिला माँ बनने का निर्णय लेती है उसे गर्भ धारण करने का इंतज़ार रहता है लेकिन जब यह समय बढ़ने लगता है तो चिंता होना आम है।

ऐसे में अपने शरीर, गर्भ धारण करने की प्रक्रिया और उससे जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें जानने से महिला को गर्भवती होने में सहायता मिल सकती है। साथ ही, यदि अपनी तरफ से हर संभव कोशिश करने पर भी गर्भधारण ना हो रहा हो, तो महिला एवं पुरुष दोनों के लिए ज़रूरी है कि वह डॉक्टर से सही सलाह लें और उसी के अनुसार आगे की योजना बनाएं।

आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि:: 01 Sep 2020

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संदर्भ/\

  1. NIH, Wilcox AJ, Weinberg CR et .al ‘Timing of sexual intercourse in relation to ovulation. Effects on the probability of conception, survival of the pregnancy, and sex of the baby’ N Engl J Med PMID: 7477165

  2. Smits LJ, de Bie RA et .al ‘Time to pregnancy and sex of offspring: cohort study.’ BMJ. PMID: 16356978

  3. Gaskins AJ, Chavarro JE. ‘Diet and fertility: a review.’ Am J Obstet Gynecol. PMID: 28844822

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