IUI upchar ki kise padti hai avashyakta aur kya ye prakriya hoti hai dardnak in hindi

आईयूआई उपचार की प्रक्रिया दर्दनाक है ?

Is IUI/intrauterine insemination treatment painful in hindi

IUI upchar ki kise padti hai avashyakta aur kya ye prakriya hoti hai dardnak in hindi

एक नज़र

  • गर्भवती होने की आधुनिक तकनीकों में से एक है आईयूआई।
  • निसंतान दम्पत्तियों के लिए गर्भधारण करने की संभावना को बढ़ाती है ये प्रक्रिया।
  • कैथेडर की मदद से स्पर्म को गर्भाशय में किया जाता है इंजेक्ट।
  • सामान्य तौर पर ये प्रक्रिया दर्द-रहित होती है।

जब दंपत्ति प्राकृतिक रूप से माता-पिता बनने में सक्षम नहीं हो पाते हैं तो वो असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (Assisted Reprodcutive Technology) की मदद लेते हैं। इसी टेक्नोलॉजी के अंतर्गत आईयूआई की प्रक्रिया शामिल है।

दरअसल, iui प्रक्रिया प्रजनन उपचार के लिए की जाने वाली प्रक्रियाओं में से एक है। IUI उपचार में चरणों की एक श्रृंखला होती है, सभी चरणों के सफलता के बाद ही गर्भधान सफल हो पाता है और महिला गर्भधारण कर पाती है। हालांकि, ज़्यादातर लोगों को लगता है कि iui उपचार दर्दनाक है।

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इस लेख़ में/\

  1. IUI उपचार की आवश्यकता किसे है?
  2. IUI उपचार के चरण क्या हैं?
  3. IUI उपचार में दर्द से जुड़े मामले में रोगियों की राय
  4. IUI उपचार के दौरान और बाद में होने वाले दर्द पर डॉक्टरों की राय
  5. निष्कर्ष
 

1.IUI उपचार की आवश्यकता किसे है?

Who needs IUI treatment? in hindi

IUI upchar ki avashyakta kise hoti hai in hindi

आईयूआई यानि कि इंट्रायूटेरिन इनसेमिनेशन, एक सरल प्रजनन उपचार है। ये प्रजनन दवाओं के साथ या बिना भी किया जा सकता है।

निम्नलिखित मामलों में दंपत्ति के लिए आईयूआई उपचार की सिफारिश की जाती है:

  • पुरुष साथी की शुक्राणु संख्या (sperm count) कम होने पर या फिर शुक्राणु की गतिशीलता (sperm motility) में कमी होने पर
  • महिलाओं में सर्वक्ल म्यूकस (cervical mucus) को लेकर जटिलता
  • अक्षमता, चोट के कारण सेक्स करने में सक्षम ना होना या फिर शीघ्र-पतन होना
  • अस्पष्टीकृत बांझपन (unexplained infertility)

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2.IUI उपचार के चरण क्या हैं?

What are the steps of IUI treatment? in hindi

IUI upchar ke charan kya hain in hindi

आईयूआई प्रक्रिया सामान्य तौर पर बहुत आसान होती है, हालांकि इसे लेकर घबराहट महसूस करना सामान्य है। इस ट्रीटमेंट को प्रजनन क्लिनिक में ही किया जाता है।

जिसमें ये निम्नलिखित चरण शामिल होते हैं :

1. दवाओं का उपयोग (Usage of medicine)

IUI प्रक्रियाओं के मामले में दवाओं का सेवन काफी आम है। सबसे आम दवाओं में से एक क्लोमिड (clomid) है। ये पिट्यूटरी ग्लैंड हार्मोन जारी करने के लिए ज़िम्मेदार होता है।

इस हार्मोन से फॉलिकल स्टिम्युलेटिंग हार्मोन (follicle-stimulating hormone) और ल्यूटिनाइज़िंग हार्मोन (luteinizing hormone) निकलते हैं। इस हार्मोन की मदद से अंडे रिलीज़ होने के साथ-साथ मैच्योर भी होते हैं।

2. ओव्यूलेशन पर नज़र रखना (Monitoring of ovulation)

हर फर्टिलिटी ट्रीटमेंट में ओव्यूलेशन मॉनिटरिंग ज़रूरी होता है। इसे होम ओवुलेशन प्रेडिक्टर किट (ovulation predictor kit) की मदद से आसानी से किया जा सकता है।

ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (luteinizing hormone) की उपस्थिति या वृद्धि का पता लगाने के लिए महिला के यूरिन का टेस्ट किया जाता है। ओवुलेशन किट का पॉज़िटिव परिणाम संकेत देता है कि अगले 2-3 दिनों में ओव्यूलेशन होगा।

ये गर्भाशय (uterus) में शुक्राणु इंजेक्शन प्रक्रिया (sperm injection process) की योजना बनाने में मदद करता है।अल्ट्रासाउंड और ब्लड टेस्ट की मदद से यह मॉनिटर किया जाता है।

3. महिला साथी में इंजेक्ट करने के लिए स्पर्म को तैयार करना (Preparing sperm for injecting into the female partner)

अच्छे क्वालिटी, शेप और साइज़ वाले स्पर्म पाने के लिए इजाकुलेशन पर 2-4 दिनों तक कंट्रोल रखने बाद सीमेन का सैंपल घर या क्लिनिक पर निकालकर, स्टेराइल कलेक्शन कप (sterile collection cup) में दिया जाता है।

होम कलेक्शन के मामले में सीमेन के सैंपल को आधे घंटे के अंदर क्लिनिक या लैब में पहुंचाना होता है और जाने के क्रम के दौरान शरीर के तापमान के आधार पर और अंधेरे में रखा जाता है।

सीमेन सैंपल को कलेक्ट करने के बाद इसे गर्भाधान (insemination) के लिए लैब में तैयार किया जाता है। पुरुष साथी के सीमेन में स्पर्म होते हैं।

स्पर्म को लेबोरेटरी में "साफ़" करने के दौरान सीमेन से अलग किया जाता है। सफाई के बाद स्पर्म, फर्टिलाइज़ेशन की प्रक्रिया में उपयोग किए जाने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाता है।

इसके बाद ये सुनिश्चित किया जाता है कि सफल निषेचन (fertilization) और भ्रूण (embryo) के गठन के लिए केवल शुक्राणुओं (sperms) को गर्भाशय में इंजेक्ट किया जाता है। अगर अनजाने में या गलती से सीमेन (semen) इंजेक्ट हो जाता है, तो ये महिला साथी के लिए इन्फेक्शन का कारण बन सकता है।

4. गर्भाशय में शुक्राणु को इंजेक्ट करना (Injecting sperms into uterus)

इस प्रक्रिया के दौरान मेज़ पर लेटते समय, आप अपने पैरों को स्टीरप्स में डालेंगे और फिर एक स्पेक्युलम (speculum) आपकी योनि में डाला जाएगा।

इसके बाद एक लंबी, पतली, फ्लेक्सिबल ट्यूब (कैथेटर), जिसमें हेल्दी स्पर्म होते हैं उसे अटैच किया जाता। आपकी योनि में, आपके सर्वाइकल ओपनिंग के माध्यम से गर्भाशय में कैथेटर (cathetar) को इन्सर्ट किया जाता है।

इसके बाद ट्यूब के माध्यम से शुक्राणु के सैम्पल को पुश करके गर्भाशय तक पहुंचाया जाता है। फिर कैथेटर निकालने के बाद स्पेक्युलम को निकाला जाता है।

5. गर्भावस्था परिक्षण (Pregnancy test)

शुक्राणुओं को गर्भाशय में इंजेक्ट करने के 2 सप्ताह के बाद, गर्भावस्था परीक्षण किया जाता है।

यह निर्धारित करने में मदद करता है कि प्रक्रिया सफल हुई या नहीं। नकारात्मक परिणामों (negative test) के मामले में, गर्भावस्था परीक्षण फिर से किया जाता है।

फिर भी, अगर महिला प्रेग्नेंट नहीं होती है, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ आपको फिर से आईयूआई प्रक्रिया से गुज़रने की सलाह देंगी। आप अपने संबंधित स्त्री रोग विशेषज्ञ के साथ इस पर चर्चा कर सकते हैं।

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3.IUI उपचार में दर्द से जुड़े मामले में रोगियों की राय

Views of patients on IUI treatment pain in hindi

IUI upchar mei dard se jude mamle mei rogiyon ki rai

सामान्य तौर पर, इंट्रायूटेरिने इनसेमिनेशन उपचार दर्द-रहित होता है, लेकिन हर मरीज़ प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग अनुभव करते हैं।

कुछ महिलाओं को प्रक्रिया के समय वास्तविक रूप से दर्द महसूस होता है तो वहीं दूसरी ओर, कुछ महिलाओं इस उपचार के समय या उसके बाद में सिर्फ असहज महसूस करती हैं।

आईयूआई उपचार के विषय में दर्द के अनुभव काफी हद तक भिन्न होते हैं।पहली बार आईयूआई उपचार से गुज़रने वाली अधिकांश महिलाओं को अत्यधिक असुविधा तब महसूस होती है, जब शुक्राणुओं को इंजेक्ट कैथेडर की मदद से इंजेक्ट किया जाता है।

इस प्रक्रिया के पहले चरण में क्लोमिड दवा के सेवन से कुछ महिअलों को हॉट फ्लेशेज़ भी महसूस होती हैं।

वहीं कुछ महिलाओं को उस समय हल्का दर्द का अनुभव होता है, जब डॉक्टर ट्रीटमेंट के दौरान इंजेक्शन लगाते हैं।

जो महिलाएं कई बार आईयूआई की प्रक्रिया से गुज़र चुकी हैं, उन्होंने बताया कि बांझपन विशेषज्ञ या स्त्री रोग विशेषज्ञ के अनुभव के आधार पर उनके दर्द और परेशानी का अनुभव अलग-अलग था।

इसलिए, उनमें से अधिकांश ने इलाज के दौरान अत्यधिक दर्द या परेशानी से बचने के लिए अत्यधिक अनुभवी बांझपन विशेषज्ञ (highly experienced infertility specialist) का चयन करना पसंद किया।

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4.IUI उपचार के दौरान और बाद में होने वाले दर्द पर डॉक्टरों की राय

Opinion of doctors on pain during and after IUI treatment in hindi

IUI upchar ke dauran or baad mei hone wale dard par doctoron ki rai

अधिकांश डॉक्टरों का कहना है कि आईयूआई उपचार में प्रक्रिया के दौरान दर्द नहीं होता है। हालांकि, डॉक्टर ये ज़रूर कहते हैं कि कुछ हद तक असुविधा होती है, जो कि आईयूआई उपचार से गुज़रने वाली महिला के लिए काफी आम है। इस असुविधा की तुलना अक्सर पैप स्मीयर टेस्ट (pap smear test) से की जाती है, जो महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का पता लगाने किया जाता है।

हाल ही में आईयूआई उपचार से गुज़रने वाली कुछ महिलाओं में ऐंठन और हल्का रक्तस्राव देखा गया है, जो काफी आम बात है। ये आमतौर पर आईयूआई प्रक्रिया के पूरा होने के 24-48 घंटों के बाद महसूस किया जाता है।

वहीं डॉक्टरों का कहना है कि कुछ महिलाएं गर्भाशय और आस-पास संक्रमण से भी पीड़ित हो सकती हैं। हालांकि, ये इन्फेक्शन तब होता है, जब स्पर्म को इंजेक्ट करते समय या उसके बाद हाइजीन का ध्यान न रखा जाए।

डॉक्टर यह भी कहते हैं कि आईयूआई उपचार से गुज़रने वाली कुछ महिलाओं में हाइपरोव्यूलेशन सिंड्रोम (hyperovulation syndrome) देखा जाता है। हालांकि, ये इस उपचार का प्रत्यक्ष दुष्प्रभाव (direct side effect) नहीं होता है, लेकिन यह दवाओं का एक नकारात्मक परिणाम है, जो आईयूआई प्रक्रिया के शुरू होने से पहले लिए जाते हैं।

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5.निष्कर्ष

Conclusionin hindi

Nishkarsh

आईयूआई प्रक्रिया को विस्तार से समझने के बाद हम ये कह सकते हैं कि उपचार की प्रक्रिया के दौरान कुछ महिलाओं को ही हल्के दर्द का अनुभव होता है।

लेकिन अधिकांश महिलाओं को एक हल्के चुभन या असहजता के अलावा और कुछ नहीं होता है। ये कहना गलत नहीं होगा की आईयूआई निःसंतान दंपतियों को गर्भधारण करने का सबसे आसान तरीका है।

आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: 28 May 2020

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