बच्चे के जन्म से पहले और बाद में मानसिक स्वास्थ्य का महत्व

Importance of mental health before and after baby in hindi

Bachhe ke janam se pehle aur baad mei mansik swasthya ka mahatva in hindi


एक नज़र

  • गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में कई प्रकार के शारीरिक और मानसिक बदलाव आते हैं।
  • एक गर्भवती स्त्री को हार्मोन्स में बदलाव की वजह से मूड स्विंग्स (Mood Swings) होते हैं।
  • गर्भधारण करने से पहले एवं बाद में महिलाओं को नकारात्मक विचार आते हैं जो कि मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं।
  • बेहद जरूरी है कि स्त्री का मानसिक स्वास्थ्य गर्भधारण से पहले एवं बाद में अच्छा रहे अन्यथा बच्चे को नुकसान हो सकता है।
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Introduction

Bachhe ke janam se pehle aur baad mei mansik swasthya ka mahatva in hindi

दाम्पत्य जीवन में बहुत सारी जिम्मेदारियां एक स्त्री को निभानी होती है, फिर चाहे वह घर संसार की ज़िम्मेदारी हो या परिवार की ज़िम्मेदारी।

शहरों में तो अधिकतर स्त्रियां काम काजी हैं तो उनके ऊपर मानसिक दबाव एवं काम का भार भी होता है।

ऐसे में तनाव होना बेहद आम है। बात जब माँ बनने की आती है और खासतौर पर जब आप पहली बार माँ बनने जा रही हो तो ये तनाव और भी बढ़ जाता है।

जरूरी है कि मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखा जाये।

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इस लेख़ में

 

बच्चे के जन्म के पहले मानसिक स्वास्थ्य का महत्व

Importance of mental health before pregnancy in hindi

Bache ke janam ke pehle mansik swasthya ka mahatva in hindi

गर्भधारण करने से पहले स्त्री का मानसिक स्वास्थ्य ठीक होना बहुत जरूरी है।

जब नव दम्पत्ति अपने परिवार को आगे बढाने का विचार करते हैं तो सबसे जरूरी यह है कि वह दोनों इस ज़िम्मेदारी का बोझ उठाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो एवं एक दूसरे के साथ हो।

कई बार देखा जाता है कि ऐसे फैसले जल्दबाजी में ले लिए जाते हैं फिर पति पत्नी उस बोझ को सह नहीं पाते एवं खुद ही एक दूसरे से लड़ने लग जाते हैं एवं अपना दाम्पत्य जीवन खराब कर लेते हैं।

गर्भावस्था में स्त्री को मात्र खुशी ही नहीं बल्कि शारीरिक एवं मानसिक तनाव भी होता है तो ऐसे में बहुत जरूरी है कि वह गर्भ धारण करने से पहले इससे होने वाले शारीरिक एवं मानसिक तनाव से जूझने के लिए मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ हो।

उसे पहले से कोई बीमारी अथवा तनाव न हो अथवा वह अवसाद ग्रसित हो सकती है जिसकी वजह से बाद में उसके एवं उसके शिशु के विकास में काफी बाधा आ सकती है।

इस समय आपको बेहद नकारात्मक विचार घेर लेते हैं और बाइपोलर डिसआर्डर (bipolar disorder) की समस्या भी हो जाती है।

इसलिए जरूरी है कि आप अपने मस्तिष्क को सभी आशंकाओं से दूर रखे। अच्छा भोजन करें और अच्छा सोचें।

बच्चे के जन्म से पहले आप जितना खुश रहेंगी, आपका शिशु भी जन्म के बाद उतना ही मानसिक रूप से स्वस्थ रहेगा।

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बच्चे के जन्म के बाद मानसिक स्वास्थ्य का महत्व

Importance of mental health after pregnancy in hindi

Bache ke janam ke baad mansik swasthya ka mahatva in hindi

जब एक स्त्री बच्चे को जन्म देती है तो उसी वक़्त से उसकी ज़िम्मेदारी अपने बच्चे के प्रति और ज्यादा बढ़ जाती है।

उसे बच्चे के खान पान एवं हर चीज़ का ध्यान बड़ी बारीकी से रखना पड़ता है क्योंकि बच्चे के लिए बचपन में उसकी माँ ही सबसे करीब होती है।

एक बच्चे को सभी पोषण एवं उसकी सारी बातें सिर्फ माँ ही उसके बिना बोले समझ सकती है, ऐसे में यह जरूरी है कि बच्चे का ख्याल रखने के लिए उसकी माँ का मानसिक स्वास्थ्य पूरी तरह से ठीक हो।

अगर माँ का स्वास्थ्य ठीक नहीं होगा तो बच्चा कभी भी ठीक नहीं हो सकता। कई बार देखा गया है कि माँ बच्चे की ज़िम्मेदारी पड़ने के कारण अवसाद ग्रसित हो जाती है एवं बच्चे का और खुद का ढंग से ध्यान नहीं रख पाती जिसकी वजह से कई बार बच्चे का मानसिक विकास अवरुद्ध हो जाता है।

और पढ़ें:अकेलापन कैसे दूर करें
 

निष्कर्ष

Conclusion in hindi

Nishkarsh in hindi

जरूरी है कि परिवार की तरफ से भी स्त्री को पूरा साथ मिले एवं रखें और मानसिक स्वास्थ्य चाहे स्त्री हो या पुरुष, बच्चा हो या बड़ा, सभी का अच्छा होना जरूरी है।

जब बात एक स्त्री की आ जाती है तो गर्भ से पहले, गर्भ के वक़्त एवं प्रसव के बाद स्त्री के मानसिक स्वास्थ्य में कई प्रकार के बदलाव आते हैं जिनका स्त्री एवं उसके परिवार को पूरी तरह से ध्यान रखना चाहिए क्योंकि इस मामले में जरा सी लापरवाही स्त्री और उसके बच्चे के लिए हानिकारक तो होगी ही परन्तु परिवार में भी काफी अशांति पैदा कर सकती है।

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आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 10 Jun 2019

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