हिस्टेरोसलपिंगोग्राम - बेस्ट फैलोपियन ट्यूब टेस्ट - प्रक्रिया व जोख़िम

Hysterosalpingogram - Best fallopian tube test - procedure and risks in hindi

Hysterosalpingogram- fallopian tube test ki sabse acchi prakriya aur jokhim


एक नज़र

  • फैलोपियन ट्यूब (fallopian tube) की जांच करने के लिए हिस्टेरोसलपिंगोग्राम (hysterosalpingogram) प्रक्रिया सबसे उत्तम है।
  • हिस्टेरोसलपिंगोग्राम (hysterosalpingogram) प्रक्रिया के कई साइड-इफेक्ट्स होते हैं।
  • हिस्टेरोसलपिंगोग्राम टेस्ट के बाद कुछ समस्या आने पर तुरंत डॉक्टर से बात करनी चाहिए।
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Introduction

Hysterosalpingogram - Fallopian Tube Test in Hindi

अगर आप माँ बनना चाहती हैं और आपका सपना पूरा नहीं हो रहा है तो इस समस्या को नज़रअंदाज़ न करके तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए ताकि समस्या के जड़ तक पहुँचा जा सके और समय रहते इसका इलाज संभव हो सके।

गर्भधारण के लिए शरीर के विभिन्न अंगों का सुचारु रूप से काम जरुरी होता है, जैसे-अंडाशय का अंडा उत्पादन करने का काम, गर्भाशय का आकार सही होना और साथ ही साथ फैलोपियन ट्यूब का ब्लॉक न होना आदि। क्या आपको पता है, गर्भधारण न होने के कारणों में से एक है फैलोपियन ट्यूब में ब्लॉकेज की समस्या। [1]

महिलाओं की फैलोपियन ट्यूब (fallopian tube) में अक्सर कई तरह की समस्याएं हो जाती हैं। समस्या का इलाज करने के लिए सबसे पहले समस्या के बारे में जानने की आवश्यकता होती है। इसलिए, डॉक्टर फैलोपियन ट्यूब का टेस्ट करते हैं।

फैलोपियन ट्यूब की समस्याओं का पता लगाने के लिए डॉक्टर कई तरह के टेस्ट करते हैं। इन्हीं टेस्ट्स में से एक है हिस्टेरोसलपिंगोग्राम टेस्ट (hysterosalpingogram test)।

हिस्टेरोसलपिंगोग्राम एक प्रकार का एक्स-रे टेस्ट (X-RAY test) है जो फैलोपियन ट्यूब का एक्स-रे करता है। लेकिन, इसके एक्स-रे लेने की प्रक्रिया, आम एक्स-रे की प्रक्रियाओं से पूरी तरह भिन्न है। [2]

आइये इसकी पूरी प्रक्रिया को जानते हैं, साथ में यह भी जानेंगे कि आखिर डॉक्टर इस प्रक्रिया से फैलोपियन ट्यूब की जांच कब नियुक्त करते हैं।

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इस लेख़ में

 

हिस्टेरोसलपिंगोग्राम की प्रक्रिया कैसे होती है?

What is the procedure of hysterosalpingogram in hindi

Hysterosalpingogram ki prakriya kaise hoti hai in hindi

हिस्टेरोसलपिंगोग्राम यानि एचएसजी टेस्ट (HSG test) एक प्रकार का एक्स रे (X-ray) टेस्ट है। यह टेस्ट उन महिलाओं के लिए है जो फैलोपियन ट्यूब में समस्या होने के कारण गर्भवती नहीं हो पा रही हैं।

डॉक्टर इस टेस्ट की सलाह आईवीएफ (IVF) या आईयूआई (IUI) ट्रीटमेंट से पहले देते हैं। इस टेस्ट को पहले करवाने से आप आईवीएफ (IVF) ट्रीटमेंट या आईयूआई (IUI) से बच सकते हैं।

अगर फैलोपियन ट्यूब में कोई ऐसी समस्या है जिसका इलाज करने पर महिला सामान्य तरीकों से गर्भधारण कर सकें तो महिला को यह टेस्ट करवाने की सलाह दी जाती है। यह टेस्ट फैलोपियन ट्यूब के साथ-साथ गर्भाशय की समस्या को जानने के लिए उपयुक्त है।

हिस्टेरोसलपिंगोग्राम यानि एचएसजी टेस्ट (HSG test) टेस्ट की प्रक्रिया निम्न है : [3]

  • इस टेस्ट के दौरान डॉक्टर एक पतली ट्यूब को महिला की योनि से गर्भाशय तक प्रवेश करवाते हैं।
  • गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब एक-दूसरे से जुड़े होते हैं।
  • अब इस पतली ट्यूब की मदद से डॉक्टर महिला के गर्भाशय में एक प्रकार की डाई (DYE) डालते हैं।
  • यह डाई महिला के फैलोपियन ट्यूब की बारीक़ से बारीक़ जानकारी प्रदान करने में मददगार होती है।
  • जैसे ही डाई अंदर जाती है, पूरी प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
  • डाई के अंदर जाने के बाद एक्स रे (x-ray) बीम की हाई फ्रीक्वेंसी (high frequency beam) पास करके रिपोर्ट तैयार की जाती है।
  • यह रिपोर्ट फैलोपियन ट्यूब की कई समस्याओं का पता लगाती है। जिनमें से एक है फैलोपियन ट्यूब में ब्लॉकेज का पता लगाना।
  • ब्लॉकेज की वजह से एग ट्रांसप्लांट (egg transplant) और स्पर्म मूवमेंट (sperm movement) नहीं हो पाता है जिससे महिला गर्भवती नहीं हो पाती है।

फैलोपियन ट्यूब के ब्लॉकेज का इलाज होने पर महिला को आईवीएफ़ या आईयूआई ट्रीटमेंट करवाने की जरुरत नहीं पड़ती है।

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हिस्टेरोसलपिंगोग्राम टेस्ट क्यों किया जाता है?

What is the reason behind hysterosalpingogram test in hindi

Hysterosalpingogram test kyun kiya jata hai in hindi

हिस्टेरोसलपिंगोग्राम टेस्ट करने के कुछ कारण निम्न हैं :

  1. हिस्टेरोसलपिंगोग्राम टेस्ट महिला के फैलोपियन ट्यूब में ब्लॉकेज का पता लगाने के लिए किया जाता है।
  2. जब महिला की फैलोपियन ट्यूब की ब्लॉकेज का इलाज हो जाता है तो महिला गर्भधारण कर सकती है।
  3. अगर गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब का स्ट्रक्चर (structure) सामान्य नहीं है तो महिला को गर्भवती होने में समस्या होती है।
  4. हिस्टेरोसलपिंगोग्राम टेस्ट का इस्तेमाल महिला के गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब का स्ट्रक्चर पता करने के लिए भी होता है। [4]
  5. इसके अलावा एचएसजी टेस्ट (HSG test) फैलोपियन ट्यूब या गर्भाशय की कई आंतरिक समस्याओं का पता लगाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।
  6. फैलोपियन ट्यूब की नसबंदी करवाने के कुछ महीनों बाद एचएसजी टेस्ट (HSG test) किया जाता है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि फैलोपियन ट्यूब पूरी तरह से अवरुद्ध हुई है या नहीं।
  7. हिस्टेरोसलपिंगोग्राम टेस्ट का इस्तेमाल फैलोपियन ट्यूब या गर्भाशय में किसी भी प्रकार की सर्जरी करने के बाद यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि सर्जरी सफल हुई है या नहीं।
और पढ़ें:अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान की सफलता को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक
 

हिस्टेरोसलपिंगोग्राम टेस्ट के दौरान कैसा महसूस होता है?

How it feels during hysterosalpingogram test? in hindi

Hysterosalpingogram test ke dauran kaisa mehsoos hota hai in hindi

हिस्टेरोसलपिंगोग्राम टेस्ट के दौरान आपके पेट में ऐंठन होगी। यह ऐंठन पूरी तरह से पीरियड्स के समय होने वाली ऐंठन की तरह होगी।

इसके अलावा यह दर्द इस बात पर निर्भर करेगा कि डॉक्टर किस हिस्से की जांच और इलाज कर रहे हैं।

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हिस्टेरोसलपिंगोग्राम टेस्ट के क्या जोखिम हैं?

What are the risks associated with hysterosalpingogram test? in hindi

Hysterosalpingogram test ke kya khatre hain in hindi

हिस्टेरोसलपिंगोग्राम टेस्ट के जोखिम कुछ इस प्रकार हैं :

  1. एचएसजी टेस्ट (HSG test) के दौरान उपयोग की जाने वाली एक्स-रे आपके टिश्यू और सेल्स को नुकसान पहुँचा सकती है। इस दौरान सेल्स और टिश्यू बहुत ज्यादा डैमेज हो सकते हैं। इस ख़तरे को कम करने के लिए डॉक्टर एक निश्चित फ्रीक्वेंसी की एक्स-रे बीम की मदद लेते हैं।
  2. इस टेस्ट से महिला के टेस्ट किये गए हिस्से में इन्फेक्शन होने की संभावना बनी रहती है। इसके साथ महिला में पेल्विक इन्फेक्शन (pelvic infection) भी देखने को मिल सकता है। पेल्विक इन्फेक्शन का ख़तरा तब और ज्यादा हो जाता है जब महिला कुछ साल पहले ही पेल्विक इन्फेक्शन का शिकार हो चुकी हो।
  3. इस टेस्ट के दौरान गर्भाशय या फैलोपियन ट्यूब में छोटे-बड़े डैमेज होने का ख़तरा भी बना रहता है। लेकिन, इस ख़तरे के चांस बहुत कम होते हैं।
  4. अगर आपको किसी भी प्रकार की शेलफिश (shellfish) से एलर्जी है तो आपको टेस्ट के दौरान उपयोग की जाने वाली आयोडीन एक्स रे डाई (iodine X-ray dye) की वजह से इन्फेक्शन हो सकता है।
  5. अगर ऑयल डाई (oil dye) इस्तेमाल की जाती है और अगर यह गलती से खून में मिल जाती है तो ब्लड सर्कुलेशन (blood circulation) में प्रॉब्लम आ जाती है, जिससे मौत भी हो सकती है। हालांकि, टेस्ट के दौरान डॉक्टर वाटर डाई का इस्तेमाल करते हैं।
और पढ़ें:आईएमएसआई आईवीएफ क्या है?
 

हिस्टेरोसलपिंगोग्राम टेस्ट के बाद समस्या होने पर क्या करें?

What to do if you face problems after hysterosalpingogram test? in hindi

Test ke baad problems hone par kya kare in hindi?

अगर हिस्टेरोसलपिंगोग्राम टेस्ट के बाद आप निम्न समस्याओं को महसूस करते हैं तो आपको तुरंत डॉक्टर से बात करनी चाहिए : [5]

  • अगर बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो रही है और हर एक घंटे में एक पैड या टैम्पॉन (tampon) का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
  • पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द होने पर।
  • तेज़ बुख़ार होने पर, जो 1 दिन से ज्यादा रहे।
  • अगर योनि स्राव 3-4 दिन से ज्यादा हो।
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निष्कर्ष

Conclusionin hindi

Nishkarsh

हिस्टेरोसलपिंगोग्राम (Hysterosalpingogram) टेस्ट फैलोपियन ट्यूब और गर्भाशय की जांच करने के लिए उत्तम तकनीकों में से एक है। यह महिला की फैलोपियन ट्यूब की जांच करके, इससे जुड़ी समस्याओं के बारे में पता लगाता है।

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references

संदर्भ की सूचीछिपाएँ

1 .

WebMD. “What Tests Check for Blocked Fallopian Tubes”. WebMD, 10 November 2018.

2 .

NIH. "How is infertility diagnosed". NIH, 31 January 2017.

3 .

Mayoclinic. “Video: HSG test for female infertility”. Mayoclinic, 13 November 2018.

4 .

The American College of obstetricians and gynecologists." Hysterosalpingography". August 2011.

5 .

WebMD. “What Tests Check for Blocked Fallopian Tubes”. WebMD, 10 November 2018.

आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 18 Sep 2020

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