गर्भावस्था में सिरदर्द कम करने के घरेलू उपाय

How to deal with headache during pregnancy in hindi

Pregnancy me sir dard ke karan aur gharelu upay in hindi


एक नज़र

  • गर्भवती महिला में बढ़ते रक्तप्रवाह के कारण सिरदर्द की परेशानी होती है।
  • मालिश, भाप और हर्बल उपायों से सिरदर्द में राहत मिलती है।
  • अत्यधिक सिरदर्द होने पर गर्भवती महिला को डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
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Introduction

Home Remedies - Headache during pregnancy | Zealthy

गर्भधारण करने के बाद शरीर में हार्मोनल स्तर में होने वाले बदलावों का असर कई तरह से देखने को मिलता है जिसमें एक है गर्भवती महिला को सिरदर्द होना।

गर्भावस्था के पहले 12 सप्ताह में बार- बार सिरदर्द या माइग्रेन (migraine) होने की समस्या ज्यादा सामने आती है जिसके पीछे शरीर में रक्त का अधिक प्रवाह (blood circulation) होना भी होता है।

इसके अलावा स्त्री को उसके जीवन में हो रहे बदलावों को लेकर कई तरह की चिंताएं और तनाव भी होते हैं जिसके चलते भी सिरदर्द होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

लेकिन इस परेशानी को कुछ आसान तरीकों से नियंत्रित और दूर किया जा सकता है जिनको इस लेख के माध्यम से बताया गया है।

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इस लेख़ में

 

गर्भावस्था में होने वाले सिरदर्द को दूर करने के उपाय क्या हैं?

What are the ways to deal with headaches during pregnancy? in hindi

Pregnancy mein hone wale sar dard ko door karne ke upay in hindi

गर्भावस्था में होने वाले सिरदर्द को दूर करने के उपाय निम्न हैं :

  • मालिश (Massage)

गर्भवती महिला को अपने सिर, कमर और गर्दन की मालिश करवानी चाहिए जिससे मांसपेशियों को आराम मिलता है और सिरदर्द के साथ-साथ शरीर में अन्य अंगों में भी दर्द कम होता है।

  • भाप लेना (Steam)

सिरदर्द होने पर गर्भवती स्त्री को गर्म पानी से भाप लेनी चाहिए जिससे सिर में भारीपन से राहत मिलती है।

भाप लेने के लिए एक बर्तन में पानी गरम करें और फिर एक कपड़े से सिर को ढँक कर थोड़ी-थोड़ी देर में भाप लें।

  • नहाना (Bath)

यदि महिला को सिरदर्द के चलते काफी परेशानी हो रही है तो वह सादे पानी से नहा कर शरीर को थोड़ा आराम दे सकती हैं जिससे सिरदर्द में भी आराम मिलता है।

इसके अलावा गर्म पानी में सेंधा नमक मिलाकर नहाने से भी सिरदर्द या माइग्रेन में आराम मिलता है।

  • सही ब्रा का चुनाव (Choosing right bra)

गर्भकाल में महिला के स्तनों का आकार बढ़ने लगता है जिससे गर्दन और पीठ पर दबाव पड़ने लगता है।

इसके चलते सिरदर्द होने की सम्भावना बढ़ जाती है और यदि सही आकार की ब्रा ना पहनी जाये तो यह दबाव बढ़ता है जिससे समस्या गंभीर हो सकती है।

इसलिए महिला को पहनी जाने वाली ब्रा पर भी ध्यान देना चाहिए।

  • हर्बल उपाय (Herbal)

नींबू की पत्तियों, लैवेंडर (lavender) और केमोमोइल (chamoille) से बनी हर्बल चाय के सेवन से सिरदर्द में आराम मिलता है।

स्वाद और बढ़ाने के लिए इस चाय को सौंफ और शहद के साथ पिया जा सकता है।

अदरक की चाय पीने से भी सिरदर्द में राहत मिलती है।

गर्म दूध में दालचीनी पाउडर डाल कर पीने से भी सिरदर्द में आराम मिलता है।

पानी में सेब का सिरका (apple cider vinegar) और शहद मिला कर पीने से सिर में हो रहे भारीपन को कम करने में फ़ायदा मिलता है।

  • भरपूर आराम (Rest)

गर्भवती महिला के शरीर को दोगुना काम करना होता है क्योंकि माँ के साथ-साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी पोषण देना अनिवार्य होता है।

ऐसे में महिला मानसिक और शारीरिक दोनों प्रकार से ही थक जाती है जिसके चलते सिरदर्द होना एक आम बात लगती है।

ऐसे में स्त्री को भरपूर आराम और अच्छी नींद लेनी चाहिए ताकि शरीर पर ज्यादा प्रभाव ना पड़े।

  • कैफीन युक्त पदार्थ कम लें (Take less caffeine)

चिकित्सकों के अनुसार कैफीन युक्त पदार्थ जैसे चाय, कॉफ़ी के कारण नींद में कमी या नींद ना आने की सम्भावना बढ़ जाती है।

इसके कारण गर्भवती स्त्री को सिरदर्द या माइग्रेन की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

इसलिए गर्भवती महिला को कैफीन युक्त खान-पीने की चीज़ों से दूर रहना चाहिए।

  • आहार का रखें ध्यान (Take care of diet)

गर्भवती महिला को अपने पोषण और आहार पर ख़ास ध्यान देना चाहिए।

इसके साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि गर्भ में पल रहे शिशु के पोषण को पूरा करने की ज़िम्मेदारी भी माँ के ही शरीर पर ही है।

गर्भवती महिला का पर्याप्त मात्रा में भोजन करना आवश्यक है ताकि कमज़ोरी के कारण होने वाली परेशानियाँ जैसे सिरदर्द, कमरदर्द आदि ना हो और साथ ही बच्चे को भी उचित पोषण मिल पाएँ।

  • व्यायाम करें (Exercise)

गर्भकाल में स्वास्थ्य को बनाये रखने और शांत चित्त रहने के लिए गर्भावस्था के अनुरूप योग, ध्यान और व्यायाम करने चाहिए।

इससे रक्तचाप (blood pressure) और रक्तप्रवाह (blood circulation) दोनों ठीक रहते हैं, जिसके कारण सिरदर्द की समस्या नहीं होती।

  • आँखों का रखें ध्यान (Take care of eyes)

कई बार आँखों के कमजोर होने पर भी सिरदर्द की समस्या सामने आती है।

इसलिए यदि गर्भवती महिला को देखने में थोड़ी भी दिक्कत हो तो उसे तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

  • अरोमाथेरेपी से करें इलाज़ (Aromatherapy)

सिरदर्द महसूस होने पर गर्भवती महिला रूमाल या टिश्यू पेपर पर लैवेंडर या पेपरमिंट ऑयल (peppermint oil) की कुछ बूँदें डाल कर सूंघ सकती हैं, जिससे मन और मस्तिष्क को शांति मिलती है।

  • एक्यूप्रेशर , एक्यूपंक्चर और रिफ्लेक्सोलॉजी (Acupressure, Acupuncture , reflexology)

बिना तेल या किसी मालिश के की जाने वाली इन सभी तरीकों से भी सिरदर्द में आराम मिलता है।

रिफ्लेक्सोलॉजी में हाथ और पैरों पर उँगलियों और हाथों से दबाव दिया जाता है और एक्यूप्रेशर एवं एक्यूपंक्चर में हाथ, पैर, गर्दन आदि को उत्तेजित किया जाता है जिससे सिरदर्द में आराम मिलता है।

  • ऑस्टियोपेथी एवं कायरोप्रेक्टिक (Osteopathy and chiropractic)

गर्दन या कन्धों में होने वाले दर्द के कारण यदि गर्भवती महिला को सिरदर्द का सामना करना पड़ रहा हो तो उस स्थिति में ऑस्टियोपेथी एक अच्छा विकल्प है जिसमें महिला के शरीर में बन रहे तनाव बिंदु को कम किया जाता है।

इसके विपरीत यदि दर्द बहुत अधिक हो तो कायरोप्रेक्टिक का प्रयोग किया जाना चाहिए जिसमें रीढ़ की हड्डी के माध्यम से इलाज़ किया जाता है।

लेकिन, यह सभी क्रियाएँ किसी एक्सपर्ट से ही करवाई जानी चाहिए।

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गर्भावस्था में सिरदर्द में कब ज़रूरी है डॉक्टर से मिलना?

When you should see a doctor for headaches during pregnancy? in hindi

Sirdard hone par doctor se kab milna zaroori hai

गर्भावस्था के दौरान सिरदर्द के लिए निम्न परिस्थितियों में डॉक्टर का परामर्श लेना अनिवार्य है :

  • यदि सिरदर्द के साथ-साथ देखने में परेशानी होने लगे और हाथ-पैर फूल जाएँ
  • सिरदर्द के साथ-साथ बुख़ार होना
  • सुबह उठते ही रोज़ सिरदर्द होना
  • सिरदर्द के साथ पेट, दांत, आँख और गर्दन में दर्द होना
  • सर में किसी प्रकार की चोट लगने के कारण सिरदर्द होना
  • असहनीय पीड़ा होना
और पढ़ें:30 की उम्र के बाद गर्भावस्था के जोखिम क्या हैं ?
 

निष्कर्ष

Conclusionin hindi

Nishkarsh

वैसे तो सिरदर्द किसी को भी कभी भी हो सकता है, लेकिन गर्भवती महिला को होने वाले सिरदर्द पर विशेष ध्यान ज़रूरी होता है क्योंकि इसका असर महिला और शिशु के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।

कभी भी खुद से किसी प्रकार की दर्द निवारक दवाई नहीं लेनी चाहिए, हमेशा डॉक्टर से अवश्य लें।

ऊपर दिए गए प्राकृतिक तरीकों का प्रयोग करके सिरदर्द को नियंत्रित किया जा सकता है लेकिन यदि समस्या बढ़ने लगे तो डॉक्टर से मिलने अवश्य जाएँ।

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आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 31 Jul 2020

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