Dizziness during pregnancy | Zealthy

प्रेगनेंसी में चक्कर आने की समस्या दूर करने के उपाय

How to deal with dizziness during pregnancyin hindi

Pregnancy mein chakkar aane ki samasya ko door karne ke upay aur pregnancy me chakkar ka ilaj

एक नज़र

  • गर्भवती स्त्री को चक्कर हार्मोनल बदलाव एवं हाइपरटेंशन के कारण आ सकते हैं।
  • चक्कर आने पर महिला को ऐसा कुछ खाना चाहिए जिससे उसके शरीर में शुगर का स्तर बढ़ जाये।
  • गर्भावस्था में चक्कर आने की स्थिति में कहीं भी अकेले जाने से बचना चाहिए।

प्रेगनेंसी में चक्कर आना सामान्य बात है। ज़्यादातर गर्भावस्था के पहले तीन महीनों में चक्कर ज्यादा आती है, लेकिन कुछ महिलाओं को चक्कर आने की परेशानी पूरी प्रेगनेंसी के दौरान रहती है। प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में हार्मोनल स्तर में उतार-चढ़ाव आता है जिसके कारण रक्तचाप (blood pressure) में बार-बार बदलाव आता है। रक्तचाप में बार-बार बदलाव आने के कारण ही प्रेगनेंसी में महिला को चक्कर आने लगते हैं। इसके अलावा खून की कमी और कम रक्तचाप होने के कारण भी चक्कर आते हैं। प्रेगनेंसी के पांचवे महीने के बाद भी अगर चक्कर आने की समस्या बनी रहती है तो हाइपरटेंशन (hypertension) भी इसका एक कारण होता है। प्रेगनेंसी के दौरान आपको चक्कर के कारण ज़्यादा परेशानी हो रही हो तो आपको हमेशा अपने डॉक्टर के साथ चक्कर आना और अन्य लक्षणों पर चर्चा करनी चाहिए। कुछ मामलों में, आपको तत्काल चिकित्सा की आवश्यकता हो सकती है।

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इस लेख़ में/\

  1. प्रेगनेंसी में चक्कर आने के कारण
  2. प्रेगनेंसी में चक्कर आने की समस्या को दूर करने के लिए क्या खाएं?
  3. प्रेगनेंसी में चक्कर आने से बचने के लिए अन्य उपाय क्या हैं?
  4. निष्कर्ष
 

1.प्रेगनेंसी में चक्कर आने के कारण

Causes of dizziness in pregnancy in hindi

pregnancy me cahkkar aane ke karan in hindi

गर्भावस्था के दौरान चक्कर आने का कारण प्रेगनेंसी की तिमाही पर निर्भर हो सकता हैं। चक्कर आना कभी कभी चिंता का कारण बन सकता है पहली तिमाही के दौरान, प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण जैसे चक्कर आना मॉर्निंग सिकनेस से संबंधित हो सकता है। आइये जानते है की प्रेगनेंसी में चक्कर आना किन कारणोंकी वजह से निर्माण होता है।

1. एनीमिया या खून की कमी (anaemia)

जब महिला के शरीर में हीमोग्लोबिन (hemoglobin) बनाने के लिए पर्याप्त लोहा (iron) नहीं होता है - जिससे आप चक्कर या कमजोर महसूस कर सकती हैं। प्रेगनेंसी में हीमोग्लोबिन की कमी को आपके डॉक्टर आपके रेगुलर परीक्षण नोटिस करेंगे और आमतौर पर इसका इलाज आयरन सप्लीमेंट के साथ किया जाता है।

2. शरीर में पानी की कमी (dehydration)

गर्भवती महिलाओं को उनकी पूरी प्रेगनेंसी में हाइड्रेटेड रहने की आवश्यकता होती है क्योंकि तरल पदार्थ बच्चे के विकास के लिए आवश्यक है। लेकिन मॉर्निंग सिकनेस, पानी पीना अच्छा ना लगना और काम में व्यस्त होने के कारण पर्याप्त रूप से वह पानी या तरल पदार्थों का सेवन नहीं कर पाती हैं और उन्हें डिहाइड्रेशन की वजह से चक्कर का सामना करना पड सकता है।

3. शिराओं में शिथिलता आना (veins relaxing)

महिलाओं की शरीर की शिराओंमें शिथिलता आनेके परिणामस्वरूप चक्कर आने का अनुभव हो सकता है, जो हार्मोन में वृद्धि के कारण होता है। प्रेगनेंसी में रक्त की मात्रा में बदलाव के साथ, बहुत सारी रक्त वाहिकाएं फैल जाती हैं और अधिक विकृत हो जाती हैं। इस वजह से रक्त के लिए पैरों से लेकर हृदय तक, मस्तिष्क तक और शिशु के पास वापस जाना मुश्किल हो सकता है। जब आप बहुत जल्दी खड़े हो जाते हैं तो यह अंतराल आपको चक्कर आने का कारण बनता है।

प्रेगनेंसी के दौरान चक्कर आने की समस्या को कुछ घरेलू उपाय, खाद्य सामग्री और दिनचर्या में बदलाव लाकर दूर किया जा सकता है। इस लेख के माध्यम से प्रेगनेंसी में चक्कर आने की समस्या को दूर करने के कुछ उपाय साझा किए गए हैं।

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2.प्रेगनेंसी में चक्कर आने की समस्या को दूर करने के लिए क्या खाएं?

What to eat during dizziness in pregnancy? in hindi

Chakkar aane ki samasya ko door karne ke upay in hindi

प्रेगनेंसी में चक्कर आने की समस्या निम्न के सेवन से हो सकती है दूर :

  • तुलसी के पत्ते (basil leaf)

गर्भावस्था के दौरान तुलसी के रस में चीनी मिलाकर खाने से या तुलसी के पत्तों में शहद लगाकर चाटने से चक्कर आने की परेशानी से राहत मिलती है।

  • लौंग (cloves)

आधे गिलास पानी में 2-3 लौंग उबालकर पीने से सिर घूमने की समस्या कम होती है।

  • आंवला पाउडर (amla powder)

दस ग्राम आंवले का पाउडर और बराबर मात्रा में धनिया पाउडर एक गिलास पानी में भिगोकर रखें। सुबह उठने के बाद मिश्रण को अच्छी तरह मिलाकर पी लें। इस पेय से प्रेगनेंसी के दौरान चक्कर आने बंद हो जाते हैं।

  • खरबूज के बीज़ (melon seeds)

चक्कर आने की समस्या को कम करने में खरबूज के बीज़ भी बहुत फ़ायदेमंद हैं। खरबूज के बीजों को देशी घी में भूनकर रख लें और थोड़े-थोड़े बीज सुबह-शाम नियमित रूप से खायें, कुछ दिन ऐसा करने से चक्कर आने की समस्या दूर जाएगी।

  • नींबू (lemon)

चक्कर आने की स्थिति में नींबू का उपयोग सबसे सरल और प्रभावी घरेलू उपाय माना जाता है। चक्‍कर आने पर एक गिलास पानी में आधे नींबू के रस को और 2 चम्मच या स्वादानुसार चीनी मिलाकर पी लें।

  • काली मिर्च (black pepper)

एक गिलास पानी में एक चम्मच नींबू का रस, एक चुटकी पिसी काली मिर्च और नमक डालकर पीने से चक्कर आने की समस्या में लाभ होता है।

  • आंवला (amla)

आंवला विटामिन ए (vitamin A) और विटामिन सी (vitamin C) से भरपूर होता है। इससे प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, रक्त संचार अच्छा होता है और चक्कर की समस्या से निजात पाने में भी मदद मिलती है। 10 ग्राम आंवला, 3 ग्राम काली मिर्च और 10 ग्राम बताशे को पीस लें और 15 दिनों तक इसका नियमित रूप से सेवन करने से चक्कर आना बंद हो जाता है। इसके अलावा दो आंवलों को पीस कर पेस्ट बना लें। फिर इसमें दो चम्मच धनिये के बीज और एक कप पानी मिलाकर रात भर के लिए रख दें और सुबह इस मिश्रण को छानकर पी लें। कुछ दिन तक ऐसा करने से चक्कर आने कम हो जायेंगे।

  • शहद (honey)

शहद खून में शुगर के स्तर को कम नहीं होने देता और एनर्जी लेवल को बढ़ाता है और चक्कर आने से रोकता है। एक गिलास पानी में शहद और नींबू का रस मिला कर पीयें या एक चम्मच शहद में दालचीनी पाउडर मिला कर सुबह खाने से भी चक्कर आने की समस्या कम होती है।

  • चाय और कॉफ़ी के अधिक सेवन से बचें (have less tea and coffee)

यदि संभव हो तो गर्भवती महिला को कॉफ़ी या चाय पीना बंद कर देना चाहिए या कम कर देना चाहिए क्योंकि इनके अधिक सेवन से चक्कर आने की सम्भावना बढ़ जाती है।

  • नारियल पानी पीयें (drink coconut water)

नारियल पानी से शरीर में पानी की कमी दूर होती है। सिर घूमने की समस्या को कम करने के लिए यह एक अच्छा प्राकृतिक तरीका है। इसका नियमित रूप से सेवन करने से चक्कर आने की समस्या से निजात मिलती है।

  • अदरक (ginger)

अदरक को किसी भी रूप में खाना चक्कर आने की समस्या में लाभकारी होता है। अदरक मस्तिष्क और शरीर के हिस्सों तक रक्त को प्रवाहित (blood flow) करता है जिससे चक्कर की समस्या दूर होती है। अदरक का सेवन, चाय के रूप में या एक छोटे टुकड़े को टॉफी की तरह चूसकर किया जा सकता है। अदरक के टुकड़े को चबाने मात्र से रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद मिलती है जिससे चक्कर आने की संभावना कम हो जाती है।

  • फलों का जूस (fruit juice)

चाय व कॉफी पीने की जगह रोज़ाना जूस पीने से चक्कर आने की परेशानी से बचा जा सकता है। ध्यान रखें, बजाय जूस में कुछ मिलाने के सादे जूस के सेवन करें। यदि आप जूस न पीना चाहें तो ताजे फल भी खा सकते हैं।

  • बादाम (almond)

बादाम एक पौष्टिक मेवा है। पीसे बादाम को गर्म दूध या किसी भी अन्य तरह के पेय में मिला कर पीने से शरीर ऊर्जावान बनता है और स्वास्थ्य को भी लाभ मिलता है। इसके चलते चक्कर आने के लक्षणों में भी कमी आती है।

 

3.प्रेगनेंसी में चक्कर आने से बचने के लिए अन्य उपाय क्या हैं?

How to avoid dizziness during pregnancy? in hindi

Chakkar aane se bachne ke kuch upay in hindi

प्रेगनेंसी में चक्कर आने से बचने के लिए अन्य उपाय क्या हैं :

  • नियमित रूप से व्यायाम और योग करें
  • अधिक से अधिक आराम करें, पर्याप्त नींद लें और तनाव से दूर रहें।
  • स्ट्रॉबेरी के साथ दही का सेवन करने से चक्कर आने में कमी आती है।
  • यदि महिला को चक्कर आते हैं तो उसे अकेले बाहर कम से कम जाना चाहिए।
  • चक्कर आने पर तुरंत सहारा लेकर बैठ जाना चाहिए और आँख बंद करके बिस्तर पर लेट जाना चाहिए।
  • गर्भवती महिला को ताजी हवा में पैदल घूमना चाहिए।
  • गर्भवती महिला को अचानक से खड़े, बैठने या उठने से बचना चाहिए क्योंकि इससे चक्कर आने की सम्भावना बढ़ जाती है।
  • महिला को अपने आहार में आयरन और प्रोटीन युक्त चीज़ें अधिक शामिल करनी चाहिए क्योंकि इससे खून में शुगर की मात्रा सही रहती है जिससे चक्कर कम आते हैं।
  • एक साथ अधिक खाना खाने से बेहतर है थोड़े-थोड़े समय में कुछ खाते रहना क्योंकि एक ही समय पर पूरा भोजन खाने या बहुत समय तक कुछ ना खाने से चक्कर आने की सम्भावना बढ़ जाती है।
  • महिला को अपने शरीर में पानी की मात्रा को संतुलित रखना चाहिए। यदि गर्भवती स्त्री को चक्कर आने की प्रकृति हो तो उसे अपने साथ हमेशा कुछ न कुछ खाने के लिए रखना चाहिए जैसे मेवे, फल आदि।
  • ऐसे में चक्कर आने पर महिला कुछ खा कर अपने शरीर में शुगर की मात्रा तो संतुलित रख सकेगी।
  • यदि महिला में खून की कमी होती है तो उसे विटामिन व आयरन की दवाईयाँ सही समय पर लेते रहना चाहिए।
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4.निष्कर्ष

Conclusionin hindi

Nishkarsh

गर्भकाल में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं जिसके चलते अनेक शारीरिक एवं मानसिक परेशानियाँ होती हैं जिसमें चक्कर आना एक आम समस्या के रूप में देखा जाता है। इससे माँ और शिशु पर कोई सीधा असर तो नहीं पड़ता, लेकिन बार-बार चक्कर आना या चक्कर आने के कारण किसी प्रकार कि चोट लग जाना हानिकारक हो सकता है। इसलिए भावी माँ को अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए कोशिश करनी चाहिए कि उसे कम से कम चक्कर आयें। इसके लिए ऊपर दिये गये प्राकृतिक उपाय और डॉक्टर की सलाह लेते रहें।

आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि:: 17 Jul 2020

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