Prasvottar depression ke lakshano se rahat pane ke liye jeevan mein parivartan in hindi

प्रसवोत्तर अवसाद के लक्षणों से राहत पाने के लिए जीवन शैली में परिवर्तन

How to Cope with postpartum depression in hindi

Prasvottar depression ke lakshan se rahat pane ke liye jeevan mein parivartan in hindi

एक नज़र

  • मां बनने के बाद एक महिला ना सिर्फ मानसिक बल्कि शारीरिक और भावनात्मक बदलाव भी महसूस करती है।
  • जिम्मेदारियां बढ़ने से महिलाओं में प्रसवोत्तर अवसाद बहुत आम है।
  • जीवनशैली में बदलाव करके आपको खुद का भी ध्यान रखना होगा।
  • अपने पति और परिवार के साथ जिम्मेदारियां बांटे।

प्रसव के बाद जीवनशैली में बदलाव आना एक आम बात है।

घर में जब कोई नया मेहमान आता है, तो कुछ महीनों तक उसके समय के हिसाब से सबको चलना पड़ता है।

आराम के साथ शिशु की देखभाल में दिन भर निकल जाता है, तो कई बार रात को शिशु के जागने पर आपको भी अपनी नींद से समझौता करना पड़ सकता है।

ये बदलाव सामान्य है और लगभग सभी मांओं में देखने को मिलते हैं।

इसे सामान्य तौर पर जीवनशैली में परिवर्तन कहा जा सकता है और अगर आपका सीजेरियन हुआ है, तो ये बदलाव सामान्य तौर पर ज्यादा देखने को मिलेगा, क्योंकि इसमें आपको शिशु की देखभाल तो करना ही है। खुद पर भी ज्यादा ध्यान देना होता है और आराम भी जरूरी होता है।

अब बात आती है कि प्रसव के बाद जीवनशैली में बदलाव करके हम प्रसव के बाद के तनाव को कैसे दूर किया जा सकता है।

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  1. प्रसवोत्तर अवसाद के लक्षणों से राहत पाने के नींद से समझौता न करें
  2. प्रसवोत्तर अवसाद के लक्षणों से राहत पाने के खान पान में बदलाव जरूरी
  3. प्रसवोत्तर अवसाद के लक्षणों से राहत पाने के परिवार का साथ जरूरी
  4. निष्कर्ष
 

1.प्रसवोत्तर अवसाद के लक्षणों से राहत पाने के नींद से समझौता न करें

Do not compromise with sleep to cope with postpartum depression in hindi

Prasvottar avsad ke lakshano se raahat pane ke nind se samjhauta na kare in hindi

यूं तो नए मेहमान के आने से आपके सोने-जागने का रूटीन गड़बड़ा जाएगा, लेकिन सबसे ज्यादा आपको इसी का ध्यान रखने की जरूरत है।

यहीं तनाव को कम करने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है।

नवजात शिशु रात में कई बार उठता है जिसकी वजह से माँ को बार बार जागना पड़ना है और उसकी वजह से नींद पूरी नहीं हो पाती है।

इसलिए जरूरी है कि अपने सोने के टाइम को शिशु के अनुसार ढाले।

ऐसे समय में अपने पति को भी थोड़ी ज़िम्मेदारियाँ देकर रखें, ताकि आप पर अकेले बोझ ना पड़े।

दिन के समय में अक्सर शिशु सोते हैं, उसी समय आप भी अपनी बाकी की नींद पूरी कर सकती हैं।

और पढ़ें:10 भारतीय मशहूर हस्तियां जिन्हें एंग्जायटी या अवसाद है

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2.प्रसवोत्तर अवसाद के लक्षणों से राहत पाने के खान पान में बदलाव जरूरी

Changes in eating habits are necessary to cope with postpartum depression in hindi

Pravsottar avsad ke lakshan se rahat pane ke liye khan paan mein badlaav zaruri in hindi

जिस दिन से आपको पता लगता है कि आप मां बनने वाली हैं।

उस दिन से खान पान में बदलाव हो जाते हैं, लेकिन बच्चे के जन्म के बाद आप सही और सेहतमंद खा रही हैं या नहीं, इसका ध्यान रखा जाना बेहद जरूरी है।

यहीं जीवनशैली में बदलाव का सबसे बड़ा हिस्सा है।

अगर आपका खान-पान सही नहीं होगा तो शिशु और आपके स्वास्थ्य पर असर पड़ेगा और उसके स्वास्थ्य की चिंता आपको पोस्टपार्टम डिप्रेशन का शिकार बना सकती हैं।

बेहतर ये ही होगा की इस तनाव के कारण को ही दूर कर दिए जाएँ।

अपने भोजन में उन खाद्य पदार्थों को शामिल करें जो शिशु और आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छे हैं और स्तनों में दूध का निर्माण पर्याप्त मात्रा में करते रहें।

अगर आप आपका शिशु स्वस्थ रहेंगे तो कोई तनाव भी नहीं होगा और न ही अवसाद में जाने का डर रहेगा।

और पढ़ें:अकेलेपन को कैसे दूर करें

 

3.प्रसवोत्तर अवसाद के लक्षणों से राहत पाने के परिवार का साथ जरूरी

Family support is necessary to cope with postpartum depression in hindi

Pravsottar avsad ke lakshano se rahat pane ke parivar ka saath zaruri in hindi

परिवार का साथ हर तरह के तनाव को दूर कर देता है।

बच्चे के चेहरे की हंसी और परिवार का साथ आपके लिए फ़ायदेमंद होगा।

इसलिए प्रसव के बाद के तनाव को दूर करने के लिए आप सुनिश्चित करें कि परिवार आपके साथ हो।

साथ ही ये भी देखें कि आपकी हर समस्या को आप परिवार के साथ बांट सकें।

आप में आ रहे बदलाव की बात भी परिवार से साझा करें।

परिवार में आपसे उम्र में बड़ी महिलायें इस अनुभव से होकर गुज़री हैं और उनका अनुभव ही आपके लिए बेहद फ़ायदेमंद होता है।

संभव है की कोई ऐसी समस्या जिसे लेकर आप तनाव में हैं वो उसका चुटकियों में हल निकाल दे।

और पढ़ें:अच्छी नींद और मेटाबॉलिज्म बढ़ाने के लिए आहार

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4.निष्कर्ष

Conclusion in hindi

Nishkarsh in hindi

किसी भी तरह का अवसाद लम्बे समय तक किसी तनाव की वजह से ही होता है।

प्रसव के बाद का अवसाद भी कुछ इसी तरह से होता है।

बेहतर यहीं है कि कोई ऐसी वजह ही ना रहें जिससे कि आपको तनाव हो।

खुश रहें, स्वस्थ रहें और परिवार से मिलकर रहें।

कोई भी अवसाद आपके करीब भी नहीं आयेगा।

आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: 12 Jun 2019

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