रजोनिवृत्ति में मूड स्विंग्स के लिए घरेलू उपचार

Home remedies for mood swings during menopause in hindi

rajo nivrutti me mood swings ke liye gharelu upchar


एक नज़र

  • रजोनिवृति यानि मेनोपॉज़ के दौरान अवसाद, तनाव और बीपी (Blood pressure) की समस्या होती है।
  • अनिद्रा, वज़न बढ़ना, मूड स्विंग्स और चिड़चिड़ापन इस दौरान आम बात है।
  • इन समस्याओं से बचने के लिये डॉर्मोन थेरेपी (dormon therapy) का सहारा लेना चाहिये।
  • संतुलित आहार का सेवन करें और नियमित व्यायाम रूटीन में शामिल करें।
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Introduction

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महिलाओं में मेनोपॉज़ 40-50 साल की उम्र में होता है।

यह वह वक़्त होता है जब महिलाओं के पीरियड्स आना बंद हो जाते हैं, और साथ ही प्रजनन की क्षमता भी खत्म हो जाती है।

चिड़चिड़ापन, हाई बीपी (high B.P.), निराशा, डिप्रेशन (depression) जैसी बीमारियां हावी हो जाती हैं, अनिद्रा की शिकायत रहती है, वज़न बढ़ने लगता है, हृदय संबंधी रोगों की संभावना भी बढ़ जाती है।

इस दौरान मूड स्विंग्स का प्रभाव सबसे अधिक रहता है।

जिन महिलाओं को हॉर्मोन्स के लिये दवाईयां लेनी पड़ती हैं, या जिनके यूटरस (uterus) किसी कारण से निकाल दिये गए हों, उनमें मेनोपॉज़ के दौरान मूड स्विंग्स सबसे ज्यादा होती हैं।

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इस लेख़ में

 

मूड स्विंग्स के दौरान महिलाओं को होने वाली समस्याएं

Problems for women suffering from mood swings in hindi

Mood swings ke dauran mahilaon me hone wali samasyayein

मेनोपौज़ के वक्त महिलाओं के जीवन पर मूड स्विंग्स बहुत असर करते हैं।

इस दौरान महिला या तो बहुत खुश, या बहुत दुखी हो जाती हैं।

हर बात पर रोना आता है या गुस्सा स्वभाव का हिस्सा बन जाता है।

महिलाओं के बदलते स्वभाव से उनकी निजी ज़िंदगी भी प्रभावित होती है।

आइये देखते हैं इस दौरान महिलाओं को किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है :

  • मेनोपौज़ के दौरान चिड़चिड़ापन हावी हो जाता है (Irritability is dominant during menopause)

    70% महिलाएं मानती हैं कि सबसे ज्यादा परेशानी उन्हें मेनोपॉज़ की शुरूआत में होती है। उन्हें हर बात से चिढ़ होती है।

    बर्दाश्त करने की क्षमता कम हो जाती है, और हर चीज़ में उन्हें कमी नज़र आती है।

    जो बातें पहले उनके लिये मायने भी नहीं रखती थीं, उन्हें मेनोपॉज़ के दौरान उन बातों से भी गुस्सा आने लगता है।

  • मेनोपॉज़ में डिप्रेशन करता है परेशान (Depression challenges during menopause)

    मेनोपॉज़ के लक्षण जैसे-जैसे महिलाओं पर प्रभावी होने लगते हैं वैसे-वैसे उन्हें डिप्रेशन घेरने लगता है।

    हर 5 में से एक महिला का मन अनजाने सोच में घिरा रहता है।

    किसी काम में मन नहीं लगता और वे इमोश्नल होने लगती हैं।

  • रजोनिवृति के दौरान बेवज़ह चिंता सताती है (Unwanted worries during menopause)

    कई महिलाएं तो हर वक्त तनाव में रहने लगती हैं।

    किसी न किसी बात का भय उन्हें सताता रहता है।

    चिंता में उनका मन इतना व्याकुल हो जाता है कि उन्हें कई बार पैनिक अटैक (panic attack) का भी सामना करना पड़ता है।

  • मेनोपॉज़ के दौरान बात-बात पर रोना आता है (Weeping tendency during menopause)

    रजोनिवृति के चरण में महिलाओं को रोने के लिये उनका दिमाग उन्हें मजबूर कर देता है।

    हर छोटी बात उन्हें रुला देती हैं।

    छोटी नोंक-झोंक जो हर परिवार के अभिन्न अंग की तरह हैं, उनपर भी उन्हें रोने का मन करने लगता है।

  • मेनोपॉज़ के दौरान महिलाओं की नींद होती हैं प्रभावित (Sleep gets affected during menopause)

    मूड स्विंग्स की एक बहुत बड़ी परेशानी यह भी है कि यह महिलाओं की नींद को प्रभावित करती है।

    40-50 प्रतिशत महिलाएं इसका सामना करती हैं।

    इस दौरान उन्हें पूरी रात बेचैनी सी लगती है और अच्छी नींद नहीं आती।

और पढ़ें:अजवायन से पाएं पीरियड्स के दर्द से छुटकारा
 

मेनोपॉज़ के दौरान होने वाली समस्याओं का घरेलू उपचार

Home remedies for problems during menopause in hindi

Menopause ke dauran samasyao ke gharelu upchar

कई महिलाएं आज भी डॉक्टरी सलाह लेने से बचती हैं।

शरीर में हो रहे बदलावों को प्राकृतिक मानकर महिलाएं इन्हें जीवन का हिस्सा बना लेती हैं।

मगर इस दौरान होने वाले प्रभावों को दरकिनार नहीं किया जा सकता।

ऐसी परिस्थियों से निपटने के लिये हम बता रहे हैं आपको कुछ घरेलू उपाय : -

  • मेनोपॉज़ के दौरान तनाव मुक्त रहें (Stay tension free during menopause)

    रजोनिवृति के दौरान अनवांछित तनाव को कम करें। तनावमुक्त रहने के लिये योग, ब्रीथिंग (breathing), एक्सरसाइज (exercise) और ध्यान (meditation) जैसी चीजों पर समय व्यतित करें।

    सुबह-शाम 30 मिनट टहलने के लिये निकलें।

    लोगों से मिलें, मन बदला रहेगा और तनाव से मुक्ति मिलेगी।

  • रजोनिवृति के वक्त संतुलित आहार लें (Balanced diet during menopause)

    संतुलित आहार लेना इस बदलाव के वक्त में बहुत ज़रूरी है।

    तेल, मसाले, मैदा जैसे खाद्य पदार्थों को खाने से बचें।

    हरी सब्ज़ियाँ, फल प्रचूर मात्रा में अपने भोजन में शामिल करें।

    सोया प्रोड्क्ट्स (soya products) जैसे सोयाबीन (soyabean), टोफू (tofu), सोयामिल्क (soyamilk) और रोस्टेड सोया नट (roasted soya nut) लेना फायदेमंद होता है।

    शरीर में इन चीजों से भरपूर एनर्जी बनी रहती है।

    थकान ज्यादा महसूस नहीं होगी और आप फ्रेश महसूस करेंगी।

  • व्यायाम या एक्सरसाइज रजोनिवृति के लक्षणों में लाभकारी है (Exercise is helpful to reduce the effects of menopause)

    नियमित तौर पर व्यायाम को अपने रूटीन (routine) में शामिल करें।

    जिससे आपका स्वास्थ्य तो अच्छा रहेगा, और नींद भी अच्छी आयेगी। चिड़चिड़ापन कम होगा।

    ज्यादा वक्त आप व्यस्त रहेंगे तो ज्यादा सोचने का वक्त नहीं मिलेगा, और तनाव से आप खुद ही दूर हो जाएंगे।

  • मेनोपॉज को चैलेंज करने के लिये सकारात्मक रवैया अपनाएं (Keep positive attitude to challenge menopause)

    जीवन के प्रति एक सकारात्मक रवैया अपनाएं।

    भले ही आपको पता है कि जिस वक्त से आप गुज़र रही हैं उसमें थोड़ी शारीरिक और मानसिक परेशानियां होती हैं, पर आप उन्हें चुनौती दें।

    हर बात में से नकारात्मक पहलू के बारे में ना सोचें।

    सकारात्मक नज़रिये से हर मुश्किल आसान हो जाती है।

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निष्कर्ष

Conclusionin hindi

Nishkarsh

जैसे प्यूबर्टी शरीर के लिये अनिवार्य है, वैसे ही मेनोपौज़ महिलाओं के शरीर की एक प्रकृतिक अवस्था है।

इस दौरान महिलाओं को कई शारीरिक व मानसिक बदलावों से गुजरना पड़ता है।

थोड़ी जागरूकता, थोड़ी जानकारी से इस मुश्किल वक्त का सामना आप आसानी से कर सकती हैं।

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आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 06 Jul 2019

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