डिलीवरी के बाद पीरियड लाने के उपाय

Remedies to starts period in hindi

delivery ke baad period shuru karne ke upay kya ho sakte hain in hindi


एक नज़र

  • डिलीवरी के बाद महिला का पहला पीरियड कब शुरू होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह अपने शिशु को स्तनपान कराती है या नहीं।
  • यदि किसी स्थिति के कारण महिला स्तनपान को अधिक समय तक जारी नहीं रख पाती है तब उनका पीरियड जल्दी शुरू होने की संभावना बन जाती है।
  • डिलीवरी के बाद पीरियड आने पर महिला को कोई अन्य तकलीफ़ हो तो उन्हें तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
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Introduction

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पहली बार माँ बनने वाली महिलाओं के मन में एक ओर एक नन्हें शिशु को जन्म देने की खुशी होती है वहीं दूसरी ओर उनका मन कुछ चिंताओं से भरा होता है। इनमें से एक चिंता डिलीवरी के बाद पहले पीरियड (first period after delivery in hindi) को लेकर होती है।

डिलीवरी के बाद पहला पीरियड कब तक आयेगा और उन्हें इस बारे में क्या उपाय करने होंगें, ऐसे ही मन में उथल-पुथल रहती है। इन्हें सवालों को ध्यान में रखकर हम आपको डिलीवरी के बाद पीरियड लाने के उपाय (remedies to starts period in hindi) और इनसे जुड़े सवालों के जवाब देने के प्रयास कर रहे हैं।

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इस लेख़ में

 

डिलीवरी के बाद पहला पीरियड कब आता है?

When do my period starts after delivery in hindi

delivery ke baad period kab aa sakta hai in hindi

डिलीवरी के बाद महिला का पहला पीरियड कब शुरू होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह अपने शिशु को स्तनपान कराती है या नहीं।

यदि महिला स्तनपान नहीं कराती है तब डिलीवरी के 6-8 हफ्ते बाद, पीरियड (first period after delivery in hindi) शुरू हो सकता है, लेकिन यदि महिला अपने शिशु को केवल स्तनपान करवा रही है तब पीरियड स्तनपान रोक देने के बाद ही शुरू होगा। [1]

इसका कारण होता है प्रोलेक्टिन (prolactin) नामक हार्मोन जो दूध के उत्पादन में मदद करता है लेकिन ओवल्युशन को रोक देता है जिससे पीरियड्स भी रूक जाते हैं [2]

यदि किसी स्थिति के कारण महिला स्तनपान को अधिक समय तक जारी नहीं रख पाती है तब उनका पीरियड जल्दी शुरू होने की संभावना बन जाती है। यह अवधि एक माह से लेकर तीन माह तक कभी भी हो सकती है।

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डिलीवरी के बाद आने वाला पहला पीरियड कैसा होगा?

What is the first postpartum period like in hindi

delivery ke baad aane wala period kaisa hoga

महिला की डिलीवरी नॉर्मल हो या फिर सिजेरियन हो, उन्हें डिलीवरी के बाद रक्त्स्त्राव होना अनिवार्य होता है। डिलीवरी के बाद महिला के शरीर से पहले भारी और उसके बाद हल्का रक्त्स्त्राव होता रहता है।

यह रक्त गर्भाशय की वह पतली परत होती है जो पूरी प्रेग्नेंसी में गर्भाशय के चारों ओर बनी रहती है। पहले कुछ हफ्ते में यह स्त्राव, रक्त्स्त्राव के रूप में होता है और उसके बाद यह स्त्राव कुछ थक्कों के रूप में बदल जाता है।

कुछ समय बाद ये थक्के भी योनि स्त्राव के रूप में बदल जाते हैं। यह स्त्राव पारदर्शी और क्रीमी रंग का होता है। इसे लोकिया (lochia) कहा जाता है। [3]

योनि से होने वाले इस रक्त्स्त्राव को महिला लगभग 6-8 हफ्ते तक महसूस कर सकती है। यदि महिला अपने शिशु को स्तनपान नहीं करवा रही है तब इसी अवधि में पीरियड भी शुरू हो सकता है।

और पढ़ें:गर्भावस्था में नॉर्मल डिलीवरी के उपाय
 

प्रसव के बाद स्तनपान कराने वाली महिलाओं को पीरियड देर से क्यूँ आता है?

Why breastfeeding mothers get their Periods delayedin hindi

Breastfeeding mothers ka period der se kyun aata hai in hindi

प्रसव के बाद जो महिलाएं अपने शिशु को स्तनपान करवाती हैं, उन्हें डिलीवरी के बाद पहले पीरियड (first period after delivery in hindi) तब तक नहीं आता है जब तक वो स्तनपान करवाती रहती हैं। इसका कारण है कि स्तन से दूध का उत्पादन करने वाला प्रोलैक्टिन (prolactin) हार्मोन महिलाओं के ओवुलेशन (ovulation) को शुरू होने से रोक देता है। इसी के कारण डिलीवरी के बाद स्तनपान करवाने वाली महिलाओं को पीरियड देर से आता है।

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क्या डिलीवरी के बाद पहले पीरियड से स्तन के दूध में कोई बदलाव आएगा?

Will there be any change in breast milk from the first period after delivery in hindi

Kya delivery ke baad first period se breastfeed milk mein koi change aayega in hindi

डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में विभिन्न प्रकार के हार्मोनल परिवर्तन होते हैं। ऐसा ही एक परिवर्तन तब होता है जब वे स्तनपान करवाती हैं और इसका कारण प्रोलेक्टिन (prolactin) हार्मोन होता है। इन्हें परिवर्तनों के कारण महिला के स्तन के दूध में उस समय परिवर्तन आ जाता है जब उनका पहला पीरियड शुरू होता है। यह परिवर्तन स्तन में दूध के निर्माण में कमी या स्वाद के रूप में हो सकता है। स्वाद में परिवर्तन का आभास शिशु द्वारा दूध पीने के अंतराल को बढ़ा देने से पता लग सकता है। हालांकि ये परिवर्तन बहुत मामूली होते हैं और इनका शिशु के स्तनपान प्रक्रिया पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ता है।

और पढ़ें:डिलीवरी के बाद पीरियड लाने के उपाय
 

मुझे कैसे पता लगेगा कि डिलीवरी के बाद पीरियड संबंधित कोई परेशानी हो रही है?

How do I know there is a problem in my periods after delivery in hindi

Mujhe kaise pata lagega ki delivery ke baad periods se judi pareshani ho rahi hai

डिलीवरी के बाद पहले पीरियड होने या न होने या उनकी मात्रा में बदलाव, विभिन्न कारणों से हो सकता है। ये कारण हैं महिला द्वारा डिलीवरी के लिए अपनाई गई विधि यानि नॉर्मल डिलीवरी या फिर सिजेरियन प्रसव(cesarean delivery), मेडिकल हिस्ट्री जैसे थाइराइड(thyroid), रक्तचाप(blood pressure) इत्यादि। ये डिलीवरी के बाद होने वाले पहले पीरियड पर प्रभाव डाल सकते हैं, लेकिन यदि महिला इस समय कुछ ऐसे लक्षण महसूस करें जो असामान्य हों तब उन्हें तुरंत अपनी गायनेकोलॉजिस्ट (gynecologist) से मिलना चाहिए।

ये परिवर्तन निम्न रूपों में हो सकते हैं : -

  1. बिना किसी कारण के बुख़ार आना
  2. पीरियड के रूप में 7 दिनों से अधिक रक्त्स्त्राव का होना
  3. रक्त्स्त्राव का अनुमानित मात्रा से अधिक का स्त्राव होना
  4. रक्त्स्त्राव में तेज़ बदबू का महसूस होना
  5. पीरियड के समय या अन्य किसी समय पेट या कमर में तेज़ दर्द का उठना
  6. यूरिन पास करते समय तेज़ दर्द की शिकायत होना
  7. रक्त्स्त्राव में बड़े-बड़े थक्कों का निकलना
  8. सांस लेने में बहुत अधिक परेशानी होना
  9. सिर में तेज़ दर्द का हर समय बने रहना

अगर महिला को इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हों तब उन्हें तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए, क्योंकि ये लक्षण ट्यूबल प्रेगनेंसी (tubal pregnancy), संक्रमण (infection) या फिर रीटेन्ड प्लेसेंटा (retained placenta) आदि में से किसी भी परेशानी का संकेत हो सकते हैं।

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निष्कर्ष

Conclusionin hindi

Nishkarsh

डिलीवरी के बाद पीरियड का आना महिला शरीर के लिए सामान्य स्थिति की ओर लौटने का संकेत होता है। डिलीवरी के बाद शरीर में होने वाले हार्मोनल परिवर्तन और शिशु को करवाया जाने वाला स्तनपान, उसके पहले पीरियड को प्रभावित करते है। जो शिशु स्तनपान नहीं करते हैं उनकी माँ को पहला पीरियड डिलीवरी के दो माह के भीतर हो जाता है। लेकिन यदि इस पीरियड के साथ महिला को कोई अन्य तकलीफ़ भी हो तब उन्हें तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

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references

संदर्भ की सूचीछिपाएँ

1 .

Chao s. "The effect of lactation on ovulation and fertility" Clin Perinatol. PMID: 3549114

3 .

Fletcher Susan et al. "Lochia patterns among normal women: a systematic review" J Womens Health (Larchmt). PMID: 23101487

आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 14 Sep 2020

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