भ्रूण असामान्यताओं का पता लगाने के लिए कोर्डोसेन्टेसिस टेस्ट

Cordocentesis test for diagnosing fetal abnormalities in hindi

Bhrun asamanyataon ka nidan karne ke liye cordocentesis test in hindi


एक नज़र

  • प्रेगनेंसी के 18वें सप्ताह के बाद किया जाता है कोर्डोसेन्टेसिस टेस्ट।
  • कोर्डोसेन्टेसिस टेस्ट भ्रूण में मौजूद असामान्यताओं का पता लगाने में करता है मदद।
  • प्रक्रिया के दौरान गर्भनाल से बच्चे के खून के नमूने लिए जाते हैं।
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Introduction

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गर्भावस्था के दौरान प्रेग्नेंट महिला के लिए खुद के साथ-साथ, गर्भ में विकसित हो रहे बच्चे का ख़्याल रखना आवश्यक होता है। प्रेगनेंसी के दौरान माँ के लिए खान-पान का जितना महत्व होता है उतना ही महत्व प्रेगनेंसी टेस्ट का भी होता है। टेस्ट की मदद से भी माँ के शरीर या फिर गर्भ में बढ़ रहे बच्चे की स्थिति के बारे में पता लगाया जाता है।

ऐसे में गर्भवस्था के समय प्रेग्नेंट महिला को अपने और भ्रूण के स्वास्थ्य की जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रसव पूर्व जांच करानी चाहिए। जांच के दौरान डॉक्टर की ओर से कोर्डोसेन्टेसिस (cordocentesis) नामक टेस्ट की भी सलाह दी जाती है। इस टेस्ट से बच्चे में मौजूद असामान्यताओं का पता चल सकता है।

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इस लेख़ में

 

कोर्डोसेन्टेसिस क्या होता है?

What is Cordocentesis test? in hindi

Cordocentesis test kya hota hai in hindi

कोर्डोसेन्टेसिस टेस्ट को परक्यूटेनेयस एम्ब्लिकल कॉर्ड ब्लड सैंपलिंग (Percutaneous Umbilical Cord Blood Sampling) टेस्ट भी कहते हैं।

यह टेस्ट प्रसवपूर्व (prenatal) गर्भ में पल रहे भ्रूण असामान्यताओं का पता लगाने के लिए किया जाता है। आमतौर पर ये टेस्ट प्रेगनेंसी के 18वें हफ्ते के बाद होता है।

यह जेनेटिक कंडीशन, ब्लड डिसऑर्डर और कई तरह के इन्फेक्शन की जांच के लिए किया जाता है। इस परीक्षण के लिए गर्भनाल (umbilical cord) से एम्ब्र्यो का ब्लड सैंपल लिया जाता है।

ज़रूरत पड़ने पर गर्भनाल (umbilical cord) के ज़रिए भ्रूण को दवा भी दी जा सकती है या खून भी चढ़ाया जा (blood transfusions) जा सकता है।

हालांकि, आज के समय में कोर्डोसेन्टेसिस टेस्ट पहले की तरह नहीं किया जा रहा है क्योंकि आज अन्य प्रीनेटल डायग्नोसिस टेस्ट मौजूद हैं।

आज के समय में किये जाने वाले टेस्ट जैसे -कोरियोनिक विलस सैंपलिंग (chorionic villus sampling) या एम्नियोसेंटेसिस (amniocentesis) टेस्ट, गर्भ में पल रहे भ्रूण के लिए कोर्डोसेन्टेसिस टेस्ट से कम रिस्क वाले हैं।

मगर अन्य परीक्षण की मदद से पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पाने की स्थिति में अभी भी कॉर्डोसेन्टेसिस किया जाता है।

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कोर्डोसेन्टेसिस कैसे किया जाता है?

How is cordocentesis performed? in hindi

Cordocentesis kaise kiya jata hai in hindi

सबसे पहले, एक एडवांस इमेजिंग अल्ट्रासाउंड (advanced imaging ultrasound) की मदद से प्लेसेंटा (placenta) में गर्भनाल (umbilical cord) के स्थान को निर्धारित किया जाता है।

गर्भनाल का स्थान ज्ञात होने के बाद अल्ट्रासाउंड की मदद से एब्डोमेन (abdomen) और यूटेरिन वॉल (uterine wall) के माध्यम से पतली सुई गर्भनाल तक डाली जाती है।

इसके बाद भ्रूण का ब्लड सैम्पल लेने के लिए सुई गर्भनाल में डाली जाती है। फिर, सैंपल को विश्लेषण के लिए लैब में भेजा जाता है।

आमतौर पर परीक्षण के परिणाम 72 घंटों के अंदर आ जाते हैं।

और पढ़ें:30 की उम्र के बाद गर्भावस्था के जोखिम क्या हैं ?
 

कोर्डोसेन्टेसिस कब किया जाता है?

When is cordocentesis performed? in hindi

Cordocentesis kab kiya jata hai

कोर्डोसेन्टेसिस का उपयोग मुख्य रूप से फीटल एनीमिया (एक विकासशील बच्चे में हेल्दी रेड ब्लड सेल्स की कम मात्रा का होना) जैसी रक्त से जुड़ी समस्याओं का पता लगाने और उनका इलाज करने के लिए किया जाता है।

कोर्डोसेन्टेसिस, आमतौर पर तब किया जाता है जब एमनियोसेंटेसिस (amniocentesis), सीवीएस (CVS), या अल्ट्रासाउंड (ultrasound) के माध्यम से सटीक जानकारी प्राप्त नहीं की जा सकती है।

गर्भधारण के 17वें सप्ताह के बाद कोर्डोसेन्टेसिस किया जाता है।

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कोर्डोसेन्टेसिस टेस्ट के परिणाम क्या बताते हैं?

What does the result of cordocentesis test tells? in hindi

Cordocentesis test se kya pta chalta hai in hindi

कॉर्डियोसेंटेसिस टेस्ट, गुणसूत्र असामान्यताएं (chromosome abnormalities i.e. Down syndrome) और रक्त विकारों (blood disorders i.e. fetal hemolytic disease) का पता लगाता है।

निम्नलिखित स्थितियों में से किसी का पता लगाने के लिए कॉर्डियोसेंटेसिस किया जा सकता है:

  • भ्रूण की विकृतियां (Malformations of the fetus)
  • भ्रूण संक्रमण (Fetal infection (i.e. toxoplasmosis or rubella)
  • माँ में भ्रूण प्लेटलेट की संख्या (Fetal platelet count in the mother)
  • भ्रूण एनीमिया (Fetal anemia)
  • आईसोइम्यूनाइज़ेशन (Isoimmunisation)

ये टेस्ट एमनियोसेंटेसिस (aminosentesis) से अलग होता है क्योंकि ये न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट का पता लगाने की अनुमति नहीं देता है।

और पढ़ें:अल्फा-फेटोप्रोटीन टेस्ट क्या है और क्यों पड़ती है इसकी ज़रूरत
 

कोर्डोसेन्टेसिस के जोखिम क्या हैं?

What are the risks of a cordocentesis? in hindi

Cordocentesis ke jokhim kya hai in hindi

कोर्डोसेन्टेसिस में गर्भपात (miscarriage) या समय से पहले जन्म (premature birth) की दर लगभग 1 से 2% होती है और साथ ही संक्रमण होने का भी जोखिम होता है।

कभी-कभी प्रक्रिया के दौरान बच्चे के दिल की धड़कन अस्थायी रूप से धीमी हो जाती है।

अगर गर्भावस्था 26 सप्ताह से अधिक की है और प्रक्रिया के दौरान बच्चा बेचैन (distressed) होने लगता है, तो आपातकालीन सिजेरियन (emergency caesarean) की आवश्यकता होती है।

हालांकि, यह एक बहुत ही दुर्लभ जटिलता (rare complication) है।

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निष्कर्ष

Conclusionin hindi

Nishkarsh

गर्भावस्था के दौरान भ्रूण में मौजूद असमानताओं का पता लगाने के लिए कई तरह के टेस्ट किये जाते हैं।

ऐसे ही एक टेस्ट का नाम है कोर्डोसेन्टेसिस। इस टेस्ट की ओर रूख करने से पहले अपने डॉक्टर से टेस्ट से जुड़े रिस्क और लाभों पर विचार करना आवश्यक है।

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आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 02 Jun 2020

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