Garbhavastha ke samay hone wali aam samasya in hindi

गर्भावस्था के समय होने वाली आम समस्याएँ

Common pregnancy complaints in hindi

Garbhavastha ke samay hone wali aam samasya in hindi

एक नज़र

  • गर्भावस्था में कई तरह की शारीरिक एवं मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
  • गर्भाशय पर दवाब पड़ने के कारण पाचन संबंधी समस्या होने लगती है।
  • गर्भवती महिला को त्वचा संबंधित समस्या होना एक आम बात है।

गर्भावस्था के समय महिलाओं को अनेक तरह की मानसिक और शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

लेकिन, ज़्यादातर ये परेशानियाँ सामान्य होती हैं जो लगभग हर भावी माँ को झेलनी पड़ती हैं।

लेकिन अगर गर्भवस्था के दौरान ऐसी किसी परेशानी की वजह से असहजता या अत्यधिक समस्या हो रही है तो डॉक्टर से परामर्श ज़रूर लें जिससे उनसे आसानी से निपटा जा सके।

इस लेख के माध्यम से गर्भावस्था के दौरान होने वाली ऐसी ही कुछ सामान्य समस्याओं के बारे में बताने की कोशिश की गयी है।

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इस लेख़ में/\

  1. गर्भावस्था के दौरान हो सकता है कमर दर्द
  2. गर्भावस्था के दौरान हो सकता है कब्ज
  3. गर्भावस्था के दौरान हो सकती हैं उँगलियों में सुन्नता और सूजन
  4. गर्भावस्था के दौरान हो सकती है थकान
  5. गर्भावस्था के दौरान हो सकती है शरीर में ऐंठन
  6. गर्भावस्था के दौरान हो सकती है बार-बार यूरिन करने की इच्छा
  7. गर्भावस्था के दौरान हो सकती है त्वचा सबंधी समस्या
  8. गर्भावस्था के दौरान हो सकता है सिरदर्द
  9. गर्भावस्था में हो सकती है उल्टी
  10. गर्भावस्था के दौरान हो सकती है छाती में जलन
  11. गर्भावस्था के दौरान हो सकता है स्तनों में दर्द
  12. गर्भावस्था के दौरान हो सकता है पेट और पैरों में दर्द
  13. गर्भावस्था के दौरान पोषक तत्व की कमी के कारण अन्य चीज़ें खाना
  14. गर्भावस्था के दौरान हो सकते हैं मूड स्विंग्स
  15. गर्भावस्था के दौरान आ सकती है कम नींद
  16. गर्भावस्था के दौरान हो सकता है पसलियों में दर्द
  17. गर्भावस्था के दौरान हो सकती है सांस लेने में तकलीफ़
  18. गर्भावस्था के दौरान बढ़ सकती है दिल की धड़कन
  19. गर्भावस्था के दौरान चक्कर और घबराहट की हो सकती है समस्या
  20. गर्भावस्था के दौरान हो सकती है खुजली
  21. गर्भावस्था के दौरान हो सकती है ब्रेस्ट लिकिंग
  22. निष्कर्ष
 

1.गर्भावस्था के दौरान हो सकता है कमर दर्द

Backache may occur during pregnancy in hindi

Garbhavastha ke dauran ho sakta hai kamar dard in hindi

गर्भावस्था के दौरान पीठ में दर्द होना आम बात है। गर्भ में बच्चे के विकास के कारण महिला की मांसपेशियां ढीली पड़ने लगती हैं ताकि शरीर बच्चे को जन्म देने के लिए तैयार हो जाये। इसके कारण स्त्री के कमर में दर्द होता है जो अक्सर रात में ज्यादा महसूस होता है।

कमर दर्द से बचने के लिए हल्का व्यायाम करें, शरीर का वजन संतुलित रखें और झुककर काम कम से कम करें। शरीर का वजन दोनों पैरों पर समान मात्रा में होना चाहिए। अगर इसके बावजूद भी आपको कमर दर्द से राहत नहीं मिल रही तो डॉक्टर से सलाह लें।

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2.गर्भावस्था के दौरान हो सकता है कब्ज

Constipation may occur during pregnancy in hindi

Garbhavastha ke dauran ho sakta hai kabz in hindi

आमतौर पर गर्भावस्था में स्त्री को कब्ज की शिकायत होती है। इसका मुख्य कारण बच्चे की वजह से आँत पर दबाव होना होता है।

स्त्रियों के शरीर में रिलैक्सिन (relaxin) नाम का एक हॉर्मोन निकलता है जिसके कारण शरीर प्रोजेस्टेरोन पैदा करता है, जो आँतों की दीवार और पेट की मांसपेशियों को आराम देता है। इसके कारण पाचन क्रिया धीमी हो जाती है और रक्त की मात्रा बढ़ जाती है।

रक्त की मात्रा बढ़ने के बाद अधिक तरल पदार्थ का सेवन ना करने पर शरीर में पानी की कमी हो जाती है जिसके कारण कब्ज की समस्या होती है।

प्रेगनेंसी के दौरान कब्ज़ की परेशानी से बचने के लिए प्रचूर मात्रा में पानी पिएँ और फाइबर युक्त आहार लें।

 

3.गर्भावस्था के दौरान हो सकती हैं उँगलियों में सुन्नता और सूजन

Problems of numb fingers and swelling occurs during pregnancy in hindi

Garbhavastha ke dauran ho sakti hai ungliyon mein sunnta aur sujan in hindi

गर्भावस्था में महिला का वजन बढ़ जाता है और रक्त का संचार कम हो जाता है जिसकी वजह से शरीर में सूजन आ जाती है। इसका कारण है शरीर में पानी की मात्रा बढ़ना और इसके साथ ही नसों और मांसपेशियों पर दबाव पड़ने से अँगुलियों का सुन्न हो जाना।

सुबह के समय शरीर में सूजन अधिक दिखाई देती है लेकिन काम करना शुरू करने पर सूजन कम होनी शुरू हो जाती है। हाई ब्लडप्रेशर होने से भी सूजन अधिक होती है। इस कारण गर्भवती स्त्रियों को नमक कम और प्रोटीन युक्त पदार्थों का सेवन अधिक करना चाहिए।

सूजन में कमी न होने पर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

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4.गर्भावस्था के दौरान हो सकती है थकान

Tiredness occurs during pregnancy in hindi

Garbhavastha ke dauran ho sakti hai thakan in hindi

गर्भावस्था में पहले तीन माह में थकान ज्यादा लगती है लेकिन समय के साथ यह कम महसूस होने लगती है।

गर्भावस्था के दौरान होने वाली थकान अक्सर खून की कमी की वजह से होती है।

संतुलित आहार, अच्छी नींद तथा मानसिक शांति गर्भावस्था में स्त्री के शरीर के लिए लाभकारी होते हैं।

शरीर में थकान और दर्द का कारण शरीर में खून की कमी भी हो सकती है।

इस स्थिति में कम से कम 8 घंटे की नींद लेनी चाहिए और यदि संभव हो तो दिन में भी आराम करना चाहिए।

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5.गर्भावस्था के दौरान हो सकती है शरीर में ऐंठन

Body cramps can occur during pregnancy in hindi

Garbhavastha ke dauran ho sakti hai shair mein ainthan in hindi

गर्भावस्था के दौरान पैरों की मांसपेशियों में ऐंठन का अनुभव ज्यादा होता है। ऐसा माना जाता है कि गर्भाशय (uterus) के विस्तार से पैर में नसों और रक्त वाहिकाओं (blood vessels) पर दबाव पड़ता है, जिससे पैर में ऐंठन और दर्द हो सकता है पर यह बात प्रमाणित नहीं है।

मांसपेशियों की ऐंठन की अवस्था में कुछ समय टहलना और मालिश करना फायदेमंद साबित होता है।

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6.गर्भावस्था के दौरान हो सकती है बार-बार यूरिन करने की इच्छा

Frequent urination can happen during pregnancy in hindi

Garbhavastha ke dauran ho sakti hai baar-baar peshab karne ki ichha in hindi

गर्भवती होने पर, पहले तीन महीनों में महिला को बार-बार पेशाब जाने की परेशानी हार्मोनल स्तरों में बदलाव के कारण होती है।

वहीं बाद के महीनों में बच्चे के आकार व वजन के बढ़ने से गर्भाशय (uterus) का दबाव मूत्राशय पर पड़ने के कारण बार- बार मूत्र जाना पड़ता है।

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7.गर्भावस्था के दौरान हो सकती है त्वचा सबंधी समस्या

Skin problems occur during pregnancy in hindi

Garbhavastha ke dauran ho sakti hai tvacha sambandhi samasya in hindi

गर्भवती महिला को कई तरह की त्वचा संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे मुहांसे, दाने, व्हाइटहेड्स, ब्लैकहेड्स, सूजन वाले लाल थक्के आदि।

इसके पीछे का मुख्य कारण है हॉरमोन के स्तर में बदलाव जिसके कारण त्वचा में अतिरिक्त तेल का उत्पादन होने लगता है।

गर्भावस्था के दौरान त्वचा में निम्न तरह के बदलाव होते हैं :

  • वैरीकोस वेंस (varicose veins)

हल्की नीली नसें उभरना।

  • स्पाइडर वेंस (spider veins)

लाल ब्लड वेसल्स उभरना।

  • ड्राई ईची ऐबडोमेन (dry itchy abdomen)

पेट की त्वचा का रूखा और खुजलीदार होना।

  • लिनिया निगरा (linea nigra)

नाभि से प्यूबिक बोन (pubic bone) तक गहरी काली रेखा उभरना।

  • स्ट्राइ ग्रैवीडारूम (striae gravidarum)

पेट पर स्ट्रेच मार्क्स (stretch marks) उभरना।

  • स्किन टैग्स (skin tags)

शरीर के विभिन्न हिस्सों का रंग गहरा होना जैसे - तिल, मस्से, निपल्स, फ्रेकल्स, लैबिया (labia) आदि।

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8.गर्भावस्था के दौरान हो सकता है सिरदर्द

Headache occurs during pregnancy in hindi

Garbhavastha ke dauran ho sakta hai sir dard in hindi

गर्भवती होने पर शारीरिक और मानसिक तनाव, अत्यधिक गर्मी और थकान, चिंता तथा ब्लडप्रेशर (blood-pressure) आदि अनेक कारणों से सिर दर्द हो सकता है।

स्त्रियों के सिर में दर्द होने के कारण आँखों की रौशनी भी कमजोर हो सकती है। इसी कारणवश गर्भावस्था में नज़र कमजोर होने के कारण का पता लगाना बहुत जरूरी होता है।

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9.गर्भावस्था में हो सकती है उल्टी

Vomiting can happen during pregnancy in hindi

Garbhavastha ke dauran ho sakti hai ulti in hindi

गर्भावस्था में उल्टी होना एक सामान्य समस्या है। बच्चे के विकास के कारण आँतों पर दबाव पड़ता है और इसके साथ ही हॉर्मोन में होने वाले परिवर्तन के कारण भोजन काफी समय तक पचता नहीं है।

इसके कारण पेट का फूलना, पेट में गैस बनना, शरीर से पाचक द्रव अधिक मात्रा में निकलना, पाचन शक्ति का कमजोर होना, एसीडिटी का होना, कब्ज की शिकायत हो जाती है जिसकी वजह से स्त्रियों को उल्टी होती है।

मगर उल्टी अगर ज्यादा होने लगे तब इसे नज़रअंदाज़ करना ठीक नहीं। अधिक उल्टी हाइपरमेसीस ग्रैविडारुम (hyperemesis gravidarum) का लक्षण हो सकती है। इस अवस्था में जी मिचलाने और उल्टी की समस्या आम लक्षण से अधिक होती है। ऐसा होने पर जल्द से जल्द डॉक्टर से सलाह लें।

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10.गर्भावस्था के दौरान हो सकती है छाती में जलन

Heartburn can happen during pregnancy in hindi

Garbhavastha ke dauran ho sakti hai chhati mein jalan in hindi

छाती में जलन होना गर्भवती महिला को होने वाली शिकायतों में से एक है। खाना खाने के बाद छाती के बीचों बीच जलन महसूस होना या झुकने या लेटने पर मुँह में तेजाब या कड़वा स्वाद आना एक आम समस्या है।

इसके पीछे के मुख्य कारण की बात करे तो बच्चे के विकास के साथ पेट पर दवाब बढ़ने लगता है जिसके कारण पेट में जाने वाली भोजन की मात्रा काफी कम हो जाती है।

इसके साथ ही तेज़ मसालों के भोजन या एसिडिटी के कारण भी स्त्री की छाती में जलन हो सकती है। इसलिए गर्भवती स्त्री को थोड़ी- थोड़ी देर में कुछ- कुछ खा लेना चाहिए और भोजन को पचाने के लिए थोड़ा टहलना भी चाहिए।

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11.गर्भावस्था के दौरान हो सकता है स्तनों में दर्द

Pain in breasts can happen during pregnancy in hindi

Garbhavastha ke dauran ho sakta hai stanon mein dard in hindi

गर्भाशय में बच्चे का आकार बढ़ने से मां के पेट का आकार बढ़ता है। इस कारण गर्भ के 6 महीने बाद स्तनों के नीचे और स्तनों में भी दर्द होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

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12.गर्भावस्था के दौरान हो सकता है पेट और पैरों में दर्द

Pain in legs and stomach can happen during pregnancy in hindi

Garbhavastha ke dauran ho sakta hai pet aur pairon mein dard in hindi

जैसे- जैसे माँ के गर्भ में बच्चे का विकास होता जाता है वैसे ही कूल्हे (hips) की हड्डियों के जोड़ भी मुलायम होते जाते हैं जिससे प्रसव (delivery) के समय बच्चे को अधिक स्थान मिल सके। इस कारण गर्भवती महिला के पेट और टांगों में दर्द होना स्वाभाविक है।

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13.गर्भावस्था के दौरान पोषक तत्व की कमी के कारण अन्य चीज़ें खाना

You can eat uneadle substances due to lack of nutrients in pregnancy in hindi

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गर्भवती महिला के शरीर में कैल्शियम (calcium), प्रोटीन (protein), लौह पदार्थ (iron), विटामिन (vitamin) और खनिज पदार्थ (minerals) आदि की कमी आने के कारण अक्सर स्त्री ऐसी चीज़ों खाने लगती है उदाहरण के लिए मिट्टी, कच्चे चावल, कोयला, खट्टी चीजें, चूना, खड़िया आदि जो शरीर के लिए नुकसानदायक होती हैं ।

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14.गर्भावस्था के दौरान हो सकते हैं मूड स्विंग्स

Mood swings can happen during pregnancy in hindi

Garbhavastha ke dauran ho sakte hai mood swings in hindi

गर्भावस्था के समय हॉर्मोन स्तर में उतार चढ़ाव होने के कारण स्त्री के स्वभाव में अचानक अंतर आने लगता है। कभी स्त्री बहुत खुश हो जाती है और कभी अचानक रोने लगती है।

इसलिए स्त्री को अपने मन को शांत रखने की कोशिश करनी चाहिए ताकि उसे ऐसी स्थिति का कम से कम सामना करना पड़े।

साथी को या परिवारजनों को इस बात को समझते हुए हमेशा गर्भवती महिला का साथ देना चाहिए और ख्याल रखना चाहिए।

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15.गर्भावस्था के दौरान आ सकती है कम नींद

Insomnia can happen during pregnancy in hindi

Garbhavastha ke dauran aa sakti hai kam nind in hindi

गर्भावस्था के दौरान शरीर में होने वाले बदलावों, मानसिक उलझनें ,पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक चिंताओं आदि अनेक कारण हैं जिसके कारण रात को नींद नहीं आती है।

इसके अलावा रात में पेशाब करने के लिए बार-बार उठना, सांस लेने में परेशानी होना, बार-बार भूख लगना, दस्त होना, खुजली, थकान, दर्द आदि तकलीफें होने के कारण भी नींद पूरी नहीं हो पाती है।

इसलिए स्त्री को रात में पेशाब करके सोना चाहिए और चाय-कॉफी आदि तरल पदार्थों का सेवन कम से कम करना चाहिए।

योग एवं व्यायाम करने से रात को अच्छी नींद आती है इसलिए गर्भवती महिला को सुविधानुसार यह अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। इस दौरान इस समस्या से बचने के लिए आपको संभोग नहीं करना चाहिए।

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16.गर्भावस्था के दौरान हो सकता है पसलियों में दर्द

Pain in ribs can happen during pregnancy in hindi

Garbhavastha ke dauran ho sakta hai pasliyon mein dard in hindi

गर्भाशय के आकार में बदलाव होने पर बच्चेदानी की ऊपर की सतह लगभग पसलियों के निचली सतह पर दबाव डालने लगती है, जिसके कारण होने वाली माँ को दाहिनी ओर ज्यादा दर्द होता है क्योंकि गर्भाशय का विकास दाहिनी तरफ होता है। लेकिन कभी-कभी दर्द दोनों ओर बराबर भी हो सकता है।

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17.गर्भावस्था के दौरान हो सकती है सांस लेने में तकलीफ़

Breathing problem can happen during pregnancy in hindi

Garbhawastha ke dauran ho sakti hai saans lene mein taklif in hindi

गर्भ में बच्चे का विकास होने पर गर्भाशय का आकार भी बड़ा होने लगता है जिसके कारण फेफड़ों पर अधिक दबाव पड़ने लगता है और सांस पूर्ण रूप से बाहर नहीं आ पाती। यह समस्या गर्भावस्था के आखिरी महीनों में ज़्यादातर होती है।

इसके साथ-साथ हार्मोनल स्तर में बदलाव आने के कारण नाक के साईनस की दीवारों या म्यूकस मैमब्रेन (mucus membrane) पर सूजन आ जाती है जिसके कारण सांस लेने में कठिनाई होने लगती है।

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18.गर्भावस्था के दौरान बढ़ सकती है दिल की धड़कन

Heart rate can increase during pregnancy in hindi

Garbhawastha ke dauran badh sakti hai dil ki dhadkan in hindi

गर्भवती महिला के दिल की धड़कन तेज होना आम बात है। दिल का कार्य ऑक्सीजन (oxygen) युक्त रक्त को माँ और बच्चे के शरीर को देना होता है। इस कारण दिल की धड़कन बढ़ जाती है।

और पढ़ें:क्या व्यायाम से गर्भधारण करने में मदद मिलती है

 

19.गर्भावस्था के दौरान चक्कर और घबराहट की हो सकती है समस्या

Lightheadedness occurs during pregnancy in hindi

Garbhavastha ke dauran chakkar aur ghabrahat ki ho sakti hai samasya in hindi

गर्भवती स्त्री के शरीर में ऑक्सीजन युक्त रक्त ठीक से ना पहुँच पाने के कारण चक्कर एवं घबराहट की शिकायत होती है।

रक्तचाप में कमी भी इसी कारण की वजह से होता है। मस्तिष्क तक रक्त की कम मात्रा पहुँचने के कारण स्त्रियों को अधिक थकान, सुस्ती और अधिक नींद आने की समस्या हो जाती है।

और पढ़ें:क्या सेक्स के तुरंत बाद ही गर्भावस्था के लक्षणों को महसूस किया जा सकता है

 

20.गर्भावस्था के दौरान हो सकती है खुजली

Itchiness can happen during pregnancy in hindi

Garbhavastha ke dauran ho sakti hai khujli in hindi

गर्भावस्था में स्त्री के पेट और कभी-कभी हाथ-पैरों पर भी खुजली एवं जलन हो सकती है। खुजली होने पर त्वचा में लाल रंग के दाने दिखाई पड़ने लगते हैं।

इस पर नारियल का तेल, ऑलिव ऑयल (olive oil) या फिर कैलाड्रिल लोशन (caladrill lotion) लगाने से आराम मिलता है।इसके अलावा स्त्री की योनि में भी अक्सर जलन और खुजली हो जाती है।

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21.गर्भावस्था के दौरान हो सकती है ब्रेस्ट लिकिंग

Breast leaking can happen during pregnancy in hindi

Garbhavastha ke dauran ho sakti hai breast leaking in hindi

गर्भावस्था के दौरान, डिलीवरी से कुछ हफ्तों या महीने पहले गर्भवती महिला के स्तन दूध का उत्पादन करना शुरू कर देते हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान निपल्स लीक हो सकते हैं। इस दौरान स्तन से बाहर आने वाले पदार्थ को कोलोस्ट्रम (colostrum) कहते हैं।

कोलोस्ट्रम बच्चे के फीड के लिए माँ के स्तन में तैयार होने वाला पदार्थ है। ज़्यादातर ब्रेस्ट लिकिंग सामान्य होती है, इसमें चिंता करने जैसी कोई बात नहीं है।

फिर भी अगर आप अधिक ब्रेस्ट फीडिंग से असहज महसूस करती हैं तो आप डॉक्टर से मिल सकती हैं।

और पढ़ें:गर्भधारण करने से पहले टीकाकरण

 

22.निष्कर्ष

Conclusionin hindi

Nishkarsh

गर्भवती महिला के शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं जिनके चलते उसे शारीरिक एवं मानसिक दोनों प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

यह सभी परेशानियाँ लगभग हर भावी माँ को झेलनी पड़ती हैं लेकिन इससे निपटने के तरीके भी आने चाहिए ताकि नौ महीने का समय ठीक से बीते और माँ और बच्चा दोनों ही स्वस्थ रहें।

लेकिन यदि होने वाली माँ को किसी भी तरह की असहजता या अत्यधिक परेशानी लगे तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: 21 Dec 2019

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