क्या पहले गर्भपात का प्रभाव दूसरी प्रेग्नेंसी पर हो सकता है?

Can problems of first abortion affect second pregnancy also in hindi

Kya pehli pregnancy ki mushkil ka prabhav dusri pregnancy par ho sakta hai?


एक नज़र

  • गर्भपात होने के विभिन्न शारीरिक व चिकित्सीय कारण हो सकते हैं।
  • पहले गर्भपात के बाद कई बार प्रजनन अंगों में चोट लग जाती है।
  • गर्भपात आंशिक या पूर्ण , कुछ भी हो सकता है।
  • दूसरे गर्भधारण से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
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Introduction

Kya_pehli_pregnancy_ki_mushkil_ka_prabhav_dusri_pregnancy_par_ho_sakta_hai_

किसी भी महिला के लिए पहली बार गर्भधारण के बाद गर्भपात हो जाना ना सिर्फ़ दुखदायी होता है बल्कि यह महिला के मन में कई सवालों को भी जन्म देता है।

एक महिला के मन में पहले गर्भपात के बाद यह सवाल आना लाज़मी है कि क्या पहले गर्भपात का प्रभाव दूसरे गर्भधारण पर पड़ सकता है ?

दरअसल आपके पहले गर्भपात का प्रभाव आपके दूसरे गर्भधारण पर कितना और कैसे पड़ता है यह कुछ ख़ास बातों पर निर्भर करता है।

आज हम इस लेख में जानेंगे कि किन कारणों से पहले गर्भपात का असर दूसरे गर्भधारण पर पड़ता है व अगर आप पहली प्रेग्नेंसी के बाद गर्भपात की अवस्था से गुज़र चुकी हैं तो दूसरी बार गर्भधारण के वक़्त आपको क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए।

आइये देखें :

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इस लेख़ में

 

पहले गर्भपात का प्रभाव दूसरी प्रेग्नेंसी पर कब और क्यों हो सकता है

Why and how first abortion can affect second pregnancy in hindi

pahle garbhpat ka effect second pregnancy par kab aur kitna ho sakta hai in hindi

पहले गर्भपात का प्रभाव दूसरी प्रेग्नेंसी पर कब और क्यों हो सकता है आइये देखें : -

  1. गर्भपात का कारण (Causes of Abortion):
    अगर महिला के पहले गर्भपात का कारण, गर्भाशय में परेशानी या कोई अन्य जटिलता नहीं है तब यह कारण अस्थायी माना जा सकता है।
    दूसरे शब्दों में इस प्रकार के गर्भपात का दूसरे गर्भधारण पर कोई प्रभाव नहीं होगा और महिला अपना गर्भकाल स्वस्थ रूप से पूरा कर सकती है।
    विशेषकर यदि पहले गर्भधारण का अंत पहली या दूसरी तिमाही में हो जाता है तब महिला कि दूसरी प्रेग्नेंसी पर पहले गर्भपात का कोई बुरा प्रभाव नहीं हो सकता है।
  2. गर्भाशय में इन्फेक्शन (Uterus infection):
    कुछ परिस्थितियाँ ऐसी भी हो सकती हैं जब महिला का गर्भपात पूर्ण न हुआ हो।
    दूसरे शब्दों में गर्भपात के समय गर्भ में कुछ अंश शेष रह गए हों।
    इस स्थिति में गर्भाशय में इन छूटे हुए अंशों के कारण गर्भाशय में इन्फेक्शन होने का भय रहता है।
    दूसरी ओर कभी यह भी हो सकता है कि डॉक्टर के द्वारा भी गर्भपात करवाने के समय जब गर्भाशय को साफ किया जाता है तब किसी औज़ार से गर्भाशय में चोट लग सकती है।
    इससे गर्भाशय में इन्फेक्शन या फिर फैलोपिन ट्यूब के बंद होने का डर बन जाता है।
    ऐसा अगर कुछ भी हो जाता है तब महिला को दूसरी बार गर्भ धारण करने में कठिनाई आ सकती है।
  3. गर्भाशय में चोट (Injury in Uterus):
    अगर महिला का पहला गर्भपात किसी विशेष कारण से न हुआ हो लेकिन उसके बाद उसका मासिक धर्म अगर समय से न शुरू हो तब यह चिंता का विषय हो सकता है।
    गर्भपात के बाद अधिक समय तक नियमित मासिक धर्म का न शुरू होना या फिर बहुत कम मात्रा में होना केवल एक ही स्थिति की ओर संकेत करता है।
    इसका अर्थ ही कि महिला के गर्भाशय में चोट लग चुकी है जिसके कारण वहाँ घाव हो गया है।
    सामान्य रूप से यह घाव कुछ समय बाद अपने आप ही ठीक हो जाते हैं और महिला का मासिक धर्म पुनः शुरू हो जाता है।
    यह इस बात की ओर संकेत करता है कि दूसरी बार गर्भधारण में परेशानी नहीं आएगी।
    लेकिन ऐसा न होने पर चिकित्सक जांच के बाद ही कोई फैसला ले सकते हैं।
    कुछ विषम स्थितियों में डॉक्टर को गर्भाशय निकालने का निर्णय भी लेना पड़ सकता है।
  4. गर्भाशय ग्रीवा में कमजोरी (Weakness in Cervix):
    कभी-कभी महिला का गर्भपात होने के कारण गर्भाशय ग्रीवा या सरल शब्दों में जिसे बच्चेदानी का मुंह कहते हैं, कमजोर हो जाता है।
    डॉक्टर इसे पुनः मूल रूप में लाने के लिए टांके से बंद करने का प्रयास करते हैं।
    ऐसे में यह दूसरे गर्भधारण के लिए तैयार तो हो जाता है।
    लेकिन सावधानी के तौर पर महिला को यही सुझाव दिया जाता है कि इस स्थिति में दूसरे गर्भ से पहले डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।
    इसके अतिरिक्त पहले गर्भपात के बाद दूसरे गर्भधारण के लिए महिला को छह माह से लेकर एक वर्ष तक का समय भी लेना चाहिए।
    इससे गर्भपात की चोट सहे हुए शरीर को पुनः आंतरिक रूप से स्वस्थ होने का पर्याप्त समय मिल सकता है।
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पहले गर्भपात के बाद दूसरे गर्भधारण में बरतें सावधानी

Precaution while conceiving after first abortion in hindi

abortion ke baad conceive karne mein kya precaution lena chahiye in hindi

गर्भपात का कारण चाहे कोई भी रहा हो लेकिन जब भी आप पुनः गर्भधारण का प्रयास करें, तब निम्न सावधानी ज़रुर बरतें :

  1. गर्भपात के बाद कुछ समय तक जीवनसाथी के साथ बिना किसी सुरक्षा (कंडोम या कुछ और ) के सेक्स संबंध न बनाएँ।
  2. गर्भपात न केवल मानसिक बल्कि शारीरिक आघात भी होता है। इसलिए कुछ समय तक शरीर को आराम देने के लिए न तो भारी काम करें और न ही कोई भारी वज़न उठाए।
  3. जिस प्रकार दुर्घटना के घटने के बाद जीवन को पुनः शुरू किया जाता है उसी प्रकार अपनी सोच को पॉज़िटिव रखते हुए अपने जीवन को पुनः शुरू करें।
  4. जहां तक हो सके, जीवन साथी के साथ अधिकतम समय बिताए और सेक्स संबंध स्थापित करें।
  5. जब आप पुनः गर्भधारण का निर्णय लें, तब उसके बाद नियमित रूप से डॉक्टर की सलाह से अपने ओव्यूलेशन की जांच ज़रूर करवाएँ।
  6. सेक्स के बाद एकदम न उठे बल्कि अपने पैरों के नीचे तकिया लगाकर थोड़ी देर लेटी रहें।
  7. अपने डॉक्टर से नियमित संपर्क में रहें और उनसे नियमित जांच करवाती रहें।
  8. अपनी जीवनशैली को हेल्दी रखें।

इस प्रकार के उपायों के बाद, पहले गर्भपात के बाद भी सब कुछ ठीक होने की स्थिति में आप पुनः गर्भधारण की स्थिति में आ सकती हैं।

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निष्कर्ष

Conclusionin hindi

Nishkarsh

गर्भपात किसी भी महिला के लिए शारीरिक व मानसिक आघात के समान होता है।

गर्भपात चाहे सर्जिकल तरीके से हो या फिर दवाइयों के माध्यम से हो, पुनः गर्भधारण के लिए महिला को कुछ समय के बाद ही प्रयास करना चाहिए।

जब भी किसी महिला का पहले गर्भधारण में किसी कारण से गर्भपात हो गया हो तब यह जरूरी नहीं कि पुनः गर्भधारण में उसे परेशानी आ सकती है।

जब भी कभी इस प्रकार की स्थिति आती है तब महिला को डॉक्टर की सलाह से ही दूसरे गर्भ के लिए प्रयास करना चाहिए।

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आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 02 Jun 2020

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