गर्भावस्था के दौरान रक्तचाप

Blood pressure in pregnancy in hindi

Garbhavastha mein raktchap in hindi


एक नज़र

  • प्रेगनेंसी के दौरान नियमित रूप से महिला के ब्लड प्रेशर की जांच होती है।
  • हार्मोनल असंतुलन के कारण रक्तचाप में उतार-चढ़ाव होते हैं।
  • प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में ब्लड प्रेशर कम होना सामान्य है।
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Introduction

Garbhavastha_mein_raktchap_in_hindi

गर्भावस्था के दौरान जब भी आप एंटीनेटल विज़िट के लिए डॉक्टर के पास जाती हैं तो उस दौरान नियमित रूप से आपके ब्लड प्रेशर की जांच की जाती है।

गर्भावस्था के दौरान रक्तचाप की निगरानी करना बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि गर्भावस्था के दौरान आपके यूरिन में प्रोटीन की मात्रा अधिक रहने के साथ-साथ आपका ब्लड प्रेशर भी ज़्यादा है, तो आप प्री-एक्लेमप्सिया (pre-eclampsia) नामक गंभीर स्थिति से जूझ सकती हैं।

यह एक प्रमुख गर्भावस्था जटिलता हो सकती है, जो अनुपचारित (untreated) होने पर गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। इससे प्लेसेंटा की मात्रा में रक्त का प्रवाह कम हो सकता है, जिससे बच्चे को पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व नहीं मिल पाएंगे।

ऐसे में इन स्थितियों से बचने के लिए या समय से पहले इसके बारे में पता लगाने के लिए एंटीनेटल विज़िट के दौरान नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच की जाती है।

इस लेख की मदद से जानिए क्यों प्रेगनेंसी के दौरान ब्लड प्रेशर का नार्मल रहना आवश्यक होता है और इसमें उतर-चढ़ाव क्यों और कब होते हैं।

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इस लेख़ में

  1. 1.गर्भावस्था के दौरान रक्तचाप पर नज़र रखना
  2. 2.गर्भावस्था के दौरान सामान्य रक्तचाप कितना होता है?
  3. 3.गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप कितना होता है?
  4. 4.गर्भावस्था के दौरान निम्न रक्तचाप कितना होता है व इसके लक्षण क्या हैं?
  5. 5.गर्भावस्था के दौरान रक्तचाप में परिवर्तन
  6. 6.गर्भावस्था में रक्तचाप क्यों मापा जाता है?
  7. 7.गर्भावस्था के दौरान अपने रक्तचाप को सामान्य बनाए रखने के लिए आप क्या कर सकते ह
  8. 8.निष्कर्ष
 

गर्भावस्था के दौरान रक्तचाप पर नज़र रखना

Tracking blood pressure during pregnancy in hindi

Garbhavastha ke dauran blood pressure par nazar rakhna in hindi

ब्लड प्रेशर रीडिंग एक फ्रैक्शन होता है : आपके डायस्टोलिक रक्तचाप (diastolic blood pressure) पर सिस्टोलिक (systolic) रक्तचाप!

जब आपका दिल सक्रिय रूप से धड़क रहा होता है तब ब्लड प्रेशर के ऊपर की संख्या आपके सिस्टोलिक दबाव को इंगित करती है, जो आपके आर्टरीज़ पर दबाव का माप है। किसी व्यक्ति के शांत होने पर "सामान्य" सिस्टोलिक रक्तचाप 120 मिमीएचजी (mmHg) या उससे कम होता है।

जब दिल सामान्य रूप से धड़क रहा होता है तब डायस्टोलिक दबाव, ब्लड प्रेशर रीडिंग के नीचे वाली संख्या होती है, जो आपकी आर्टरीज़ में ब्लड प्रेशर का माप है। आराम के दौरान "सामान्य" डायस्टोलिक रक्तचाप 80 मिमीएचजी (mmHg) या इससे कम होता है।

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गर्भावस्था के दौरान सामान्य रक्तचाप कितना होता है?

What is considered as normal blood pressure during pregnancy? in hindi

Pregnancy ke dauran samanya raktchap

गर्भावस्था के दौरान सामान्य रक्तचाप 120/80 मिमीएचजी (mmHg) से कम होता है।

हालाँकि, आपका "सामान्य" रक्तचाप क्या है, यह निर्धारित करने के लिए, आपके डॉक्टर पहली एंटीनेटल विज़िट (antenatal visit) में बेसलाइन ब्लड प्रेशर चेक कर सकते हैं। फिर वे हर विज़िट के दौरान आपके रक्तचाप को मापेंगे।

और पढ़ें:30 की उम्र के बाद गर्भावस्था के जोखिम क्या हैं ?
 

गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप कितना होता है?

What is considered as high blood pressure during pregnancy? in hindi

Pregnancy ke dauran uch raktchap

अगर गर्भावस्था की शुरुआत होने पर रक्तचाप 130/90 मिमीएचजी (mmHg) से अधिक होता तो यह चिंता का कारण हो सकता है।

वहीं गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप को 140 मिमीएचजी (mmHg) या उच्च सिस्टोलिक के रूप में परिभाषित किया जाता है, जिसमें डायस्टोलिक 90 मिमीएचजी (mmHg) या अधिक होता है।

उच्च रक्तचाप या हाई बल्ड प्रेशर के तीन ग्रेड होते हैं:

  • हल्का उच्च रक्तचाप (mild hypertension) तब होता है जब ऊपर का आंकड़ा 140 और 149 के बीच और निचला आंकड़ा 90 और 99 के बीच होता है।
  • मध्यम उच्च रक्तचाप (moderate hypertension) तब होता है जब ऊपर का आंकड़ा 150 और 159 के बीच और निचला आंकड़ा 100 और 109 के बीच होता है।
  • गंभीर उच्च रक्तचाप (severe hypertension) तब होता है जब आपका ऊपर का आंकड़ा 160 या अधिक और निचला आंकड़ा 110 या उससे अधिक हो।

वहीं उच्च रक्तचाप के अलग-अलग नाम हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप गर्भावस्था किस अवस्था में है।

20 सप्ताह की गर्भवती होने से पहले , अगर आपको उच्च रक्तचाप है, तो इसे क्रोनिक हाइपरटेंशन (chronic hypertension) कहा जाता है।

इसका मतलब है कि गर्भवती होने से पहले आपको शायद उच्च रक्तचाप था, जिसका पता आपको शायद पहले प्रसवपूर्व जाँच के दौरान पता चले।

20 सप्ताह के बाद, उच्च रक्तचाप को गर्भावधि उच्च रक्तचाप (gestational hypertension) कहा जाता है। ये भी गर्भावस्था के दौरान विकसित होता है।

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गर्भावस्था के दौरान निम्न रक्तचाप कितना होता है व इसके लक्षण क्या हैं?

What is considered as low blood pressure during pregnancy and what are its symptoms? in hindi

Pregnancy mein low blood pressure

प्रेगनेंसी में लो ब्लड प्रेशर को लेकर कोई निश्चित संख्या नहीं है।

लो ब्लड प्रेशर के लक्षण निम्न हैं :

  • सिरदर्द (headache)
  • चक्कर आना (dizziness)
  • जी मिचलाना (nausea)
  • बेहोश होने जैसा अनुभव होना (feeling faint)
  • ठंडी, रूखी त्वचा (cold, clammy skin)
और पढ़ें:अल्फा-फेटोप्रोटीन टेस्ट क्या है और क्यों पड़ती है इसकी ज़रूरत
 

गर्भावस्था के दौरान रक्तचाप में परिवर्तन

Changes in blood pressure during pregnancy in hindi

Garbhavastha ke dauran blood pressure mei parivartan in hindi

गर्भावस्था आगे बढ़ने के साथ-साथ रक्तचाप के स्तर में बदलाव हो सकता है। इस समय रक्तचाप गर्भावस्था से पहले के स्तर में भी पहुंच सकता है। इसके कुछ कारण हो सकते हैं।

गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव के कारण निम्न हैं :

गर्भावस्था में एक महिला के शरीर में रक्त की मात्रा बढ़ जाती है। एक जर्नल के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान एक महिला के रक्त की मात्रा में 45 प्रतिशत की वृद्धि होती है। इस अतिरिक्त रक्त को हृदय को पूरे शरीर में पंप करना ज़रुरी होता है।

इस दौरान लेफ्ट वेंट्रिकल (left ventricle) अधिक मोटा और बड़ा हो जाता है। लेफ्ट वेंट्रिकल दिल का बायाँ भाग है जो महत्वपूर्ण मात्रा में ब्लड पंपिंग करता है। इस स्थिति में गर्भवती महिला के शरीर में बढ़े हुए रक्त को पूरे शरीर में पंप करने के लिए दिल को अधिक काम करना पड़ता है।

किडनी, वासोप्रेसिन की बढ़ी हुई मात्रा को रिलीज करती है। यह एक हार्मोन है जो वॉटर रिटेंशन (water retention) को बढ़ाता है। ज्यादातर मामलों में, गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप बच्चे के प्रसव के बाद कम हो जाता है।

हालांकि, अगर डिलीवरी के बाद भी ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ रहता है तो आपके डॉक्टर इसे वापस सामान्य करने के लिए दवा दे सकते हैं।

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गर्भावस्था में रक्तचाप क्यों मापा जाता है?

Why blood pressure is measured in pregnancy? in hindi

Pregnancy ke dauran blood pressure kyon check kiya jata hai in hindi

आपके रक्तचाप को मापना, ये बताने का एक तरीका है कि आपकी गर्भावस्था कितनी अच्छी चल रही है। आपके डॉक्टर प्री-एक्लेम्पसिया (खासकर गर्भावस्था के बाद में) जैसे संभावित गंभीर स्थिति के संकेतों के लिए रक्तचाप मापते हैं।

प्री-एक्लेम्पसिया क्यों होता है इसका पता अब तक नहीं चल सका है लेकिन इसके होने की संभावना तब बढ़ जाती है जब प्लेसेंटा ठीक से काम नहीं करता है, जिस तरह से इसे करना चाहिए।

जिस कारण आपको उच्च रक्तचाप और अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं। आपके डॉक्टर यूरिन टेस्ट करने के साथ-साथ ब्लड प्रेशर भी चेक कर सकते हैं। उच्च रक्तचाप के साथ-साथ आपके यूरिन में प्रोटीन की मौजूदगी दोनों ही प्री-एक्लेमप्सिया के लक्षण होते हैं।

पहले से मौजूद उच्च रक्तचाप या गर्भकालीन उच्च रक्तचाप होने का मतलब है कि आपको प्री-एक्लेमप्सिया होने की अधिक संभावना है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपको ये ज़रूर होगा।

हालांकि, अगर आपको गर्भावस्था के 35 सप्ताह से पहले जेस्टेशनल हाइपरटेंशन (gestational hypertension) होता है, तो आपको प्री-एक्लेमप्सिया होने का ख़तरा अधिक होता है।

ऐसा होने की स्थिति में आपके डॉक्टर इस जोखिम से बचाव के लिए नियमित तौर पर आपकी जांच और आपको मॉनिटर कर सकते हैं।

गर्भकालीन उच्च रक्तचाप और प्री-एक्लेमप्सिया होने का पता चल पाना बहुत मुश्किल होता है इसलिए आपको सभी प्रीनेटल अपॉइंटमेंट के लिए ज़रूर जाना चाहिए, ताकि आपके डॉक्टर नियमित रूप से आपके रक्तचाप और यूरिन की जांच कर सके।

कभी-कभी, प्री-एक्लेमप्सिया जल्द विकसित हो सकता है जिस स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता ज़रुरी होती है। प्रीनेटल अपॉइंटमेंट के दौरान आप अपने डॉक्टर से लक्षणों के बारे पूछ सकते हैं।

और पढ़ें:कैसे करें गर्भावस्था किट का प्रयोग ?
 

गर्भावस्था के दौरान अपने रक्तचाप को सामान्य बनाए रखने के लिए आप क्या कर सकते हैं?

What you can do to keep your blood pressure normal during pregnancy? in hindi

Garbhavastha ke dauran blood pressure ko samanya rakhne ke liye kya kare

गर्भावस्था के दौरान अपने रक्तचाप को सामान्य बनाए रखने के लिए टिप्स :

  • चाहे आप कितनी भी फिट क्यों न हो, प्रीनेटल अपॉइंटमेंट के लिए अवश्य जाएँ।
  • सुनिश्चित करें कि आपके रक्तचाप की जांच और यूरिन टेस्ट नियमित रूप से होता रहे।
  • नियमित रूप से व्यायाम करें, वॉक करें और अपने चिकित्सक से परामर्श करने के बाद योग या प्राणायाम करें।
  • अपने बीपी को मैनेज करने के लिए अपने चिकित्सक द्वारा निर्धारित किसी भी दवा को लेने से न चूकें।
  • संतुलित आहार लें और नमक का सेवन कम करें।
और पढ़ें:कैसे सर्विकल म्यूकस को ट्रैक कर आप जल्दी गर्भवती हो सकती हैं?
 

निष्कर्ष

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Nishkarsh

गर्भावस्था, हार्मोन के बदलाव के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक और शारीरिक बदलाव का कारण बनती है। यह तनाव को बढ़ा सकती है, जिससे उच्च रक्तचाप को कंट्रोल करना कठिन हो सकता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान योग और ध्यान अपनाकर तनाव कम करने की तकनीक आज़माए।

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आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 02 Jun 2020

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