पुरुष कंडोम की जानकारी, फायदे और नुकसान

Benefits And Side-effects Of Male Condom in hindi

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एक नज़र

  • पुरुष कॉन्डोम अनचाही प्रेग्नेंसी और यौन रोगों से बचने का उपाय है।
  • पुरुषों के लिए बने कॉन्डोम अलग-अलग प्रकार के मिलते हैं।
  • सेक्स में पुरुषों के द्वारा पहने जाने वाले कॉन्डोम के साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं।
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Introduction

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कंडोम का इस्तेमाल न सिर्फ अनचाही प्रेगनेंसी से बचने के लिए किया जाता है, बल्कि, कंडोम के फ़ायदों में सबसे अहम फायदा यह भी है कि यह यौन संचारित रोगों को रोकने में बहुत उपयोगी है।

वे रोग जो संबंध बनाने के दौरान फैलते हैं उन्हें यौन संचारित रोग या एसटीडी कहा जाता है, जैसे, एचआईवी- एड्स (HIV- AIDS), हर्पीज़ (herpes) , क्लैमिडिया (chlamydia) , गोनोरिया (gonorrhoea) और सिफलिस (syphilis)।

इन बिमारियों से बचने के लिए यह बहुत जरुरी है की सेक्स के दौरान कंडोम का इस्तेमाल किया जाये। कंडोम के इस्तेमाल से न सिर्फ यौन संचारित रोगों से बचा जा सकता है बल्कि यह यौन सुख को बढ़ने में भी मदद करता है।

समाज में हमेशा से सेक्स को न केवल आनंद प्राप्ति का जरिया माना जाता है बल्कि परिवार आगे बढ़ाने का वैधानिक तरीका भी माना जाता है।

लेकिन कुछ युगल सेक्स करते समय उन सुरक्षा के उपायों को अपनाना पसंद करते हैं जिनसे केवल आनंद की प्राप्ति हो और गर्भ ठहरने का भय न रहे। इसके लिए अपनाए जाने निरोध के उपाय में मेल कंडोम का इस्तेमाल सबसे अधिक किया जाता है।

वैसे तो कंडोम की जानकारी लगभग सभी को होती है, लेकिन कंडोम का उपयोग कैसे करें और कंडोम को सही तरह से लगाने का तरीका क्या है इसकी पूरी जानकारी न होने के कारण इसका प्रभाव कम होता है।

आइये कंडोम के बारे में पूरी जानकारी इस लेख में लेते हैं। जानते हैं कंडोम क्या होता है, कंडोम के फायदे और साइड इफेक्ट्स क्या हैं? और कंडोम का इस्तेमाल सही तरह से कैसे किया जाता हैं? इस लेख में पुरुष कॉन्डोम के फायदे और साइड इफेक्ट के बारे में बताया गया है।

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इस लेख़ में

 

पुरुष कंडोम क्या है?

What is Condom in hindi

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संभोग करते समय अपनाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के गर्भनिरोधकों (contraceptive) के रूप में पुरुष कंडोम (male condoms) सबसे अधिक प्रचलित और सरल उपाय माना जाता है।

पुरुष कंडोम का सही उपयोग एसटीडी और अनचाही प्रेगनेंसी से बचने का कारगर उपाय है। यहाँ यह बात ध्यान देने वाली है कि कंडोम का उपयोग अगर सही ढंग से न किया जाये तो यह प्रभावी नहीं रहता है।

आइये जानते है कि कंडोम क्या होता है और कंडोम का सही उपयोग कैसे करें ताकि अनचाही प्रेगनेंसी और एसटीडी बीमारियों से बचा जा सके।

कंडोम एक छोटी पाउच जैसी रबड़ की थैली होती है जिसे पुरुष सेक्स से पहले अपने लिंग (penis) पर चढ़ा लेते हैं।

यह थैली बहुत पतले रबड़ या प्लास्टिक की बनी होती है। इसको लिंग पर चढ़ा लेने के बाद सेक्स में पुरुष के लिंग से निकालने वाला वीर्य (sperm) इस थैली नुमा कॉन्डोम में इक्कठा हो जाता है।

इस प्रकार सेक्स के समय पुरुष का स्पर्म योनि (vagina) के रास्ते महिला के शरीर में प्रवेश नहीं कर पाता है और शुक्राणु का अंडे के साथ मिलन न होने के कारण गर्भधारण नहीं हो पता।

साथ ही वीर्य और योनी द्रव के न मिलने से यौन संचारित रोग यानि एसटीडी (sexually transmitted disease) के होने का डर भी नहीं रहता।

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पुरुष कंडोम इस्तेमाल करने का सही तरीका

How To Use Condom in hindi

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जैसा हम आपको पहले बता चुके हैं कंडोम का इस्तेमाल करने से प्रेगनेंसी और एसटीडी से बचा जा सकता हैं। यदि कंडोम का उपयोग सही तरह से किया जाये तो रिसर्च के अनुसार यह प्रेगनेंसी को 90% तक रोकने में सहायक होता है।

इसे अकेले इस्तेमाल किया जा सकता हैं या अन्य गर्भनिरोधक तकनीकों जैसे, गर्भ निरोघक गोलियों या आईयुडी (IUD) के साथ भी कंडोम का यूज़ किया जा सकता है।

अगर आपको लैटेक्स से एलर्जी है तो आपको पोलीयुरिथेन से बने कंडोम का इस्तेमाल करन चाहिए। कंडोम के उपयोग से पहले इस बात का ध्यान रखना बहुत जरुरी है कि आपके कंडोम के यूज़ करने की नियत तिथि (expiry date) नहीं निकली है।

आइए अब पुरुष कंडोम का सही तरह से इस्तेमाल की पूरी जानकारी लेते है :-

स्टेप 1: हर बार नए कंडोम का इस्तेमाल करें। इस बात का ध्यान रखें कि कंडोम अच्छे ब्रांड का हो और उसकी एक्सपायरी डेट न निकली हो।

स्टेप 2: कंडोम का उपयोग करने से पहले इस बात की पूरी जानकारी रखें कि उसके इस्तेमाल की नियत तिथि न निकली हो और कंडोम का पैकेट कहीं से फटा या टूटा हुआ न हो।

स्टेप 3: कंडोम को पैकेट से निकालें। इस बात का खासतौर पर ध्यान रखे कि कंडोम को निकालने के लिए चाकू या कैंची का इस्तेमाल न करें। हाथ या उँगलियों के अत्यधिक जोर से कंडोम फट सकता हैं इसलिए सावधानी बरतें।

स्टेप 4: कंडोम के मुख या नोक से हवा बाहर निकालने के लिए उसे चुटकी से दबायें। तनाव युक्त लिंग पर एक हाथ की मदद से लिंग पर कंडोम लगायें और दूसरे हाथ से कंडोम को खोलते हुए लिंग पर पूरी तरह से लगायें।

स्टेप 5: अगर लुबरीकेशन बढ़ाना चाहते हैं तो सिर्फ जल आधारित लुबरीकेन्ट जैसे केवाई जेली (KY Jelly) का इस्तेमाल करें। तेल आधारित लुब्रीकैनट जैसे बेबी ऑयल या वेसलीन के इस्तेमाल से कंडोम फटने का डर रहता है।

स्टेप 6: इजैकुलेशन के बाद और लिंग के कमजोर होने से पहले कंडोम के रिम को पकड़ कर निकालें ताकि वीर्य योनि पर न फैले।

स्टेप 7: टिश्यू या टॉयलेट पेपर में इस्तेमाल किये गए कंडोम को लपेट कर कचरे के बॉक्स में डाल दें। हर बार संभोग से पहले नए कंडोम और चिकनाई (lubricant) का इस्तेमाल करे।

स्टेप 8: यदि सम्भोग के दौरान कंडोम फिसल जाये या फट जाये तो आप आपातकालीन गर्भ निरोधन के लिए फार्मेसी मे उपलब्ध दवाई ले सकते हैं।

प्रेगनेंसी को रोकने के लिए सिर्फ कंडोम पर निर्भर रहना सही नहीं है। अगर आप कंडोम के साथ अन्य गर्भनिरोधक उपाय जैसे - गर्भ निरोधक गोलियां या आईयुडी (IUD) का इस्तेमाल करते हैं तो कंडोम फटने की स्थिति में भी प्रेग्नेंट होने का डर नहीं रहता।

गर्भनिरोधक गोली या ईयुडी (intra- uterine contraceptive device) के लिए आप आपने डॉक्टर से मिल कर सलाह ले सकती हैं।

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पुरुष कंडोम के प्रकार

Types Of Male Condom in hindi

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बाज़ार में कई तरह के कंडोम उपलब्ध हैं, किसी भी नज़दीकी फार्मेसी से कंडोम काफी सही दामों में ख़रीदा जा सकता है।

पुरुष कंडोम के चार मुक्य प्रकार हैं : लैटेक्स (latex), पॉलीयुरेथाईन (polyurethane), पॉलीसोप्रेने (polyisoprene), और नैचुरल या लंबस्किन(natural or lambskin)।

वैसे तो अमेरिका की एफडीए (FDA) एजेंसी ने लैटेक्स, पॉलीयुरेथेन (polyurethane), पॉलीआइसोप्रीन् (polyisoprene) कंडोम के प्रकार को प्रेगनेंसी और यौन संचारित रोग या एसटीडी को रोकने में अत्यंत सहायक माना है।

लेकिन रिसर्च की मानें तो लैटेक्स कंडोम एसटीडी और प्रेगनेंसी रोकने में सबसे सहायक होते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि पॉलीयुरेथाईन कंडोम कम खिचाव वाले होते हैं जिसके कारण सेक्स के दौरान उनके टूटने का दर सबसे अधिक रहता है।

नेचुरल कंडोम या लंबस्किन कंडोम भी एसटीडी रोकने में अत्यधिक सहायक नहीं होते हैं क्योंकि इस तरह के कंडोम में छोटे छोटे छेद होते हैं, जो शुक्राणु रोकने में तो सहायक होते हैं, लेकिन एसटीडी फ़ैलाने वाले बैक्टीरिया और वायरस को रोकने मैं सहायक नहीं होते हैं।

इसके अलावा बाज़ार में उपलब्ध अन्य तरह के कंडोम के प्रकार निम्न हैं : -

  • फ्लेवर्ड कंडोम (Flavored condom)

भारत में उपलब्ध कंडोम कई फ्लेवर में आता हैं जैसे, वैनिला, स्ट्राबेरी, सेव, केला, बबलगम, चॉकलेट, कॉफ़ी आदि।

  • अनफ्लेवर्ड कंडोम (Unflavoured condom)

इस तरह के कंडोम एसटीडी और प्रेगनेंसी को रोकने में कारगर होते हैं लेकिन कंडोम की सही जानकारी के भाव में इनका उपयोग असरदार नहीं रहता।

  • अल्ट्रा थिन कंडोम (Ultra thin condom)

कई बार पुरुषों को यह शिकायत होती है की कंडोम के इस्तेमाल से उन्हें चरम सुख पाने में दिक्कत होती है। अल्ट्रा थीन कंडोम बहुत पतला और चिकनाई युक्त होता हैं जो आपको सेक्स के दौरान बहुत नेचुरल महसूस करता हैं।

  • रिब्ड कंडोम (Ribbed condom)

इस तरह के कंडोम के बाहरी सतह पर धारिया लगी होती हैं जो सेक्स के दौरान महिलाओं में चरम सुख की प्राप्ति में मदद करती हैं।

  • डॉटेड कंडोम (Dotted condom)

इस तरह के कंडोम में बाहरी सतह पर डॉट्स होते हैं और यह भी रिब्ड कंडोम की तरह ही काम करता है।

  • एक्स्ट्रा लुब्रिकेटेड कंडोम (Extra lubricated condom)

अगर आपके महिला साथी को योनी में सूखापन या सेक्स के दौरान दर्द की समस्या है तो आप इस तरह के कंडोम का इस्तेमाल कर सकते है।

एक्स्ट्रा lubricated कंडोम में चिकनाई की मात्रा सामान्य कंडोम से दुगनी होती है इस कारण यह घर्षण से होने वाले दर्द और योनी सूखेपन की शिकायतों को कम करता हैं।

  • लॉन्ग लास्टिंग कंडोम (Long lasting condom)

इस तरह के कंडोम का प्रयोग उनके लिए उपयुक्त है जो शीघ्रपतन (premature ejaculation) से ग्रसित हैं।

लॉन्ग लास्टिंग कंडोम में एक ख़ास तरह का क्लिमेक्स कंट्रोल लुब्रिकेंट बेन्जोकाईंन (benzocaine) पाया जाता है।बेन्जोकाईंन लिंग के मुख को सुन्न कर देता है और उतेजन्ना तक पहुँचने में लम्बी अवधि देता है।

  • एलोवेरा कंडोम (Aloe Vera condom)

एलोवेरा का पौधे से कई स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होते हैं। सेक्स के दौरान दर्द को मिटाने के लिए आप एलोवेरा के कंडोम का इस्तेमाल कर सकते है।

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मेल कंडोम के फायदे

Benefits Of Using Male Condom in hindi

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कंडोम किसी भी फार्मेसी या केमिस्ट की दुकान पर आसानी से खरीदे जा सकते हैं। आज के इस आधुनिक युग में आप कंडोम का आर्डर ऑनलाइन भी कर सकते हैं।

कंडोम का इस्तेमाल न सिर्फ एसटीडी (STD) को होने से रोकता है बल्कि अनचाही प्रेगनेंसी से भी बचाता है।

कंडोम के फायदे निम्न हैं : -

  • कंडोम के फायदे - यौन संचारित रोगों से बचाव (Prevention from STD)

कॉन्डोम के प्रयोग करने से महिला व पुरुष दोनों ही सेक्स प्रक्रिया में होने वाले यौन संचारित रोगों के संपर्क में आने से बच जाते हैं।

किसी भी अन्य गर्भनिरोधक की तुलना में पुरुष कॉन्डोम एसटीडी को बढ़ने से रोकने के लिए सबसे अधिक प्रभावी साधन माना जाता है।

विशेषज्ञों की मानें, तो कंडोम का इस्तेमाल एचआईवी को रोकने मे 80 से 87 प्रतिशत तक कारगर है। यहाँ यह बात ध्यान रखने वाली है कि स्किन कंडोम एसटीडी को रोकने में कारगर नहीं है क्योंकि इस तरह के कंडोम में छोटे छेद होते हैं जो कीटाणुओं को रोकने में असफल रहते हैं।

  • कंडोम कम कीमत में सरलता से मिलता है (Condoms are easily available at low price)

आमतौर पर पुरुष निरोध किसी भी केमिस्ट की दुकान से बहुत कम कीमत में लिया जा सकता है। भारत व अन्य विकासशील देशों में यह ग्रामीण जनता को सरकारों द्वारा भी आसानी से उपलब्ध करवाया जाता है।

कहीं-कहीं, जैसे सामुदायिक केंद्र (community centres) व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (primary health centres) पर तो यह मुफ्त ही मिल सकता है।

भारत में आसानी से मिलने वाले कुछ कंडोम की लिस्ट कुछ इस प्रकार है : -

  • मैनफ़ोर्स कंडोम
  • मूड्स कंडोम
  • ड्यूरेक्स कंडोम
  • कोहिनूर कंडोम
  • डीलक्स निरोध - भारत सरकार द्वारा वितरित भारत का सबसे पुराना ब्रांड

आप इसमें से किसी भी कंडोम का इस्तेमाल कर अपने और आपने साथी को एसटीडी से बचा सकते हैं।

  • सेक्स के आनंद में कंडोम बाधा नहीं करता (Condom does not interfare with sex enjoyment)

जैसे कि हम पहले भी बता चुके हैं, आधुनिक समय में उपभोक्ता की मांग और पसंद को ध्यान में रखते हुए आजकल मेल कॉन्डोम विभिन्न प्रकार के स्वाद और आकृति के मिल रहे हैं।

इनके कारण पुरुष व स्त्री दोनों को ही कॉन्डोम के इस्तेमाल के कारण सेक्स के आनंद में बाधा नहीं आती है।

  • कंडोम का लाभ है अनचाही प्रेगनेंसी से बचाव (Condom is the safest contraceptive method)

कॉन्डोम का इस्तेमाल क्यों किया जा सकता है, सामान्य रूप से कोई भी व्यक्ति इसके बारे में सोच सकता है! जबाव यह है कि कंडोम गर्भ निरोधक उपायों में सबसे अधिक सफल उपाय है।

हालांकि, कोई भी गर्भनिरोधक उपाय शत-प्रतिशत सुरक्षित और उपयोगी नहीं माना जा सकता है फिर भी इस एक बैकअप प्लान के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

संबंध बनाने से पहले हर बार अगर कंडोम का सही तरीके से इस्तेमाल किया जाये तो प्रेगनेंसी और अन्य योनि के इन्फेक्शन को रोका जा सकता है।

  • कंडोम के इस्तेमाल से कोई दुष्प्रभाव नहीं है (Condom is safe to use)

वैसे तो सामान्य रूप से कॉन्डोम के कोई दुष्प्रभाव नहीं देखे जाते हैं। लेकिन कुछ लोगों को लैटेक्स (latex) की एलर्जी हो सकती है। यदि व्यक्ति इस एलर्जी से अनजान हो तो लैटेक्स से बने कंडोम के यूज से उन्हें एलर्जी हो सकती है।

और पढ़ें:ओरल सेक्स दे सकता है कई बिमारियों को न्योता
 

जानिए पुरुष कंडोम के साइड इफेक्ट

Condom side effects in hindi

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कंडोम के इस्तेमाल के जहां फायदे हैं वहीं इसके कुछ साइड इफेक्ट्स भी हैं : -

  • योनि में दर्द और खुजली (Pain and itching in vagina)

कंडोम साइड-इफेक्ट्स में योनि में दर्द और खुजली सबसे अधिक होने वाले प्रभाव हैं। कुछ पुरुषों का यह अनुभव रहा है कि यदि वे हफ्ते में दो बार से अधिक बार कंडोम का इस्तेमाल करते हैं तब महिला की योनि (vagina) में परेशानी हो सकती है।

यह परेशानी योनि के अंदर की परत और हाइमन (hymen) की संवेदनशीलता और प्राकृतिक चिकनाई को कम कर देती है या खत्म कर देती है। इससे योनि में सूखापन आ जाता है और महिला योनि में दर्द सहने की शक्ति बिल्कुल समाप्त हो जाती है।

इस स्थिति में जब मेल कंडोम का प्रयोग करते हैं तब महिला की योनि में दर्द, खुजली और जलन होने की संभावना हो जाती है।

  • सर्विक्स में घाव (Lesions in cervix)

कुछ आदमियों के द्वारा पुरुष कंडोम का प्रयोग अधिक करने से, सेक्स करने पर महिलाओं की सर्विक्स (cervix) में कटने और छिलने की परेशानी हो सकती है।

इसके कारण योनि में सूजन भी हो सकती है। अगर इस हालत में महिला के साथ सेक्स किया जाये तब कंडोम के कारण जो चोट पहले लगी है, उसमें फिर से घाव हो सकते हैं। कभी-कभी तो इन जख्मों से रक्त भी निकल सकता है।

इससे महिला के प्राइवेट पार्ट्स में इन्फेक्शन होने का भी डर होता है। यह इन्फेक्शन कैंसर का रूप भी ले सकता है।

  • लेटेक्स एलर्जी (Latex allergy)

मूल रूप से पुरुष कंडोम लैटेक्स (रबड़) से ही बनाए जाते हैं। कुछ लोगों को इस लैटेक्स से एलर्जी हो सकती है। इसके कारण जब भी इसे पहनते हैं, उनके प्राइवेट पार्ट्स में जलन और खुजली जैसी परेशानी हो सकती है।

हालांकि ,अब इस परेशानी को दूर करने के लिए नॉन-लैटेक्स (non-latex) कंडोम भी बाज़ार में आ गए हैं, लेकिन इनकी बनावट के लिए बहुत ही पतले रबड़ का इस्तेमाल किया जाता है, जिसके कारण यह जल्दी खराब हो सकते हैं।

  • योनि के स्वास्थ्य को हानि (Impact on vaginal health)

महिला की योनि में नैचुरल तरीके से हार्मोनल परिवर्तन से चिकनाहट बनी रहती है।

लेकिन पुरुष द्वारा कंडोम पहनकर सेक्स करने से यह चिकनाहट खत्म हो सकती है और सूखेपन की शिकायत रह सकती हैं।

  • सेक्स के आनंद में कमी (Decrease sex pleasure)

जेन्ट्स कंडोम को पूरी तरह से सुरक्षित उपाय नहीं माना जा सकता है।

इसी कारण महिला या पुरुष द्वारा गर्भ ठहरने की आशंका के कारण सेक्स में पूरा आनंद नहीं आ सकता है।

इसी प्रकार यौन स्वास्थ्य के संभावी खतरे भी सेक्स के एकसाइटमेंट को कम कर सकते हैं।

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निष्कर्ष

Conclusionin hindi

सुरक्षित सेक्स सम्बन्धों के लिए पुरुष कॉन्डोम को सबसे अधिक प्रभावशाली उपाय माना जाता है।

इसके प्रयोग से अनचाहे गर्भ और यौन संचारित रोगों या एसटीडी के होने की संभावना बहुत कम हो जाती है।

लेकिन कॉन्डोम से होने वाले साइड-इफेक्ट के रूप में महिला की योनि में घाव और दर्द की शिकायत हो सकती है।

इस कारण कुछ महिलाएं पुरुषों के द्वारा कॉन्डोम के प्रयोग को पूरे मन से स्वीकार नहीं कर सकती हैं।

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आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 25 Mar 2020

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