सामान्य डिलीवरी के 9 फ़ायदे

9 benefits of normal delivery in hindi

Samany prasav ke 9 fayde in hindi


एक नज़र

  • माँ और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए नॉर्मल डिलीवरी अच्छी मानी जाती है।
  • नार्मल डिलीवरी के बाद माँ को ठीक होने में कम समय लगता है।
  • सामान्य प्रसव बच्चे के लिए सुरक्षित होता है।
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Introduction

Introduction

एक गर्भवती महिला हमेशा इस असमंजस में रहती है कि उसकी डिलीवरी सामान्य होगी या सिजेरियन।

हालांकि, अधिकांश मामलों में डॉक्टर की ओर से नॉर्मल डिलीवरी की अनुसंशा की जाती है लेकिन लेबर के दौरान होने वाले दर्द के कारण महिलाएं कई बार सिजेरियन की ओर रूख करना पसंद करती हैं।

ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि अधिकांश महिलाएं नॉर्मल डिलीवरी के फ़ायदों से अनजान होती हैं या फिर उनकी गर्भावस्था में किसी तरह का जोखिम या जटिलता होती है। अगर आपकी गर्भावस्था में किसी प्रकार का जोखिम नहीं है तो आपको सामान्य प्रसव के लिए अपने शरीर को तैयार करना चाहिए।

सामान्य प्रसव, सिजेरियन डिलीवरी की तुलना में माँ और बच्चे दोनों के लिए कम जोखिम भरा होता है। इसके साथ ही नॉर्मल डिलीवरी में माँ सक्रिय रूप से शामिल होती है। आइए, इस लेख के माध्यम से आपको सामान्य प्रसव की विशेषताओं के बारे में बताते हैं।

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इस लेख़ में

  1. 1.नॉर्मल डिलीवरी में नहीं होता है चिकित्सीय हस्तक्षेप
  2. 2.सामान्य प्रसव में गर्भवती महिला शारीरिक गतिविधि के लिए होती है स्वतंत्र
  3. 3.सामान्य प्रसव में लेबर का दर्द कम समय के लिए होता है
  4. 4.नार्मल डिलीवरी बच्चे के लिए सुरक्षित होता है
  5. 5.सामान्य प्रसव माँ में सशक्तीकरण की भावना को जगाता है
  6. 6.सामान्य प्रसव में साथी और परिवार का साथ होता है
  7. 7.सामान्य प्रसव के तुरंत बाद स्तनपान कराना संभव होता
  8. 8.सामान्य प्रसव में माँ को ठीक होने में कम समय लगता है
  9. 9.सामान्य प्रसव स्वस्थ आंत वनस्पति में सुधार करता है
  10. 10.निष्कर्ष
 

नॉर्मल डिलीवरी में नहीं होता है चिकित्सीय हस्तक्षेप

No medical interventions in normal delivery in hindi

Chikitsa hastakshep ke prawah se bachav in hindi

भले ही नॉर्मल डिलीवरी में माँ को प्रसव पीड़ा से गुजरना पड़ता हो मगर अधिकांश प्राकृतिक प्रसव तकनीक में किसी तरह की सर्जरी की आवश्यकता नहीं पड़ती है। यही कारण है कि नॉर्मल डिलीवरी, माँ और बच्चे दोनों के लिए सुरक्षित मानी जाती है।

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सामान्य प्रसव में गर्भवती महिला शारीरिक गतिविधि के लिए होती है स्वतंत्र

Pregnant woman gets freedom for body movement during normal delivery in hindi

Normal delivery ke dauran garbhwati mahila ko milti hai swatantra

सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान, एपिड्यूरल एनेस्थीसिया (epidural anesthesia) के प्रभाव, पानी चढ़ने और लगातार बच्चे की मॉनिटरिंग के कारण गर्भवती महिला को शारीरिक गतिविधि करने से मना किया जाता है और बिस्तर पर ही रहने को कहा जाता है।

वहीं दूसरी ओर प्राकृतिक प्रसव में भी आपको सतर्क रहने की आवश्यकता तो होती है, लेकिन आप पर किसी तरह की बंदिश नहीं होती है और आप शारीरिक गतिविधि के लिए स्वतंत्र होती हैं। प्रक्रिया के दौरान आपको सहज महसूस हो इसके लिए आप अपनी पोज़िशन बदल सकती हैं।

और पढ़ें:गर्भावस्था में नॉर्मल डिलीवरी के उपाय
 

सामान्य प्रसव में लेबर का दर्द कम समय के लिए होता है

Duration of Labor pain is short in normal delivery in hindi

Samanya prasav mei labor ka dard kam samay ke liye hota hai

प्राकृतिक प्रसव में, ऑक्सीटोसिन (oxytocin) हार्मोन गर्भाशय को संकुचित करने के लिए संकेत देता है, जो बदले में मस्तिष्क को एंडोर्फिन (प्राकृतिक दर्द निवारक) छोड़ने के लिए संकेत देता है।

जिससे लेबर का दर्द कुछ हद तक सहनीय हो जाता है।

दूसरी ओर सिजेरियन सेक्शन डिलीवरी के दौरान गर्भवती महिला को एपिड्यूरल एनेस्थीसिया (epidural anesthesia) देने से सामान्य प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है।

एपिड्यूरल एनेस्थेसिया के प्रभाव से शरीर के निचले हिस्से में किसी तरह के संकुचन का अनुभव नहीं हो सकता है।

इससे प्रसव के समय स्थिति को बदलना और शरीर को एडजस्ट करना असंभव हो जाता है।

सी-सेक्शन के बाद टांकें के कारण महिला को कुछ दिनों तक दर्द का अनुभव होता रहता है।

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नार्मल डिलीवरी बच्चे के लिए सुरक्षित होता है

Normal delivery is safe for the child in hindi

Normal delivery bachhe ke liye surakshit hota hai

प्राकृतिक प्रसव को शिशु के लिए सबसे सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इसमें मां को एनेस्थीसिया (anesthesia) या दर्द निवारक दवा (painkillers) नहीं दी जाती है।

दरअसल, एपिड्यूरल एनेस्थीसिया देने से माँ के ब्लड प्रेशर में गिरावट आ सकती है।

जिस कारण बच्चे तक ऑक्सीजन युक्त रक्त की मात्रा बहुत कम पहुँचती है।

दर्द निवारक दवाएँ (pain relief medications) शिशु में अतिरिक्त दुष्प्रभाव भी पैदा कर सकती हैं।

इन दुष्प्रभावों में से कुछ में सेंट्रल नर्वस सिस्टम डिप्रेशन (central nervous system depression), श्वसन अवसाद (respiratory depression), प्रारंभिक अवस्था में स्तनपान में हानि (impairment in breastfeeding at the early stages), शरीर के तापमान को बनाए रखने की क्षमता में कमी और तंत्रिका संबंधी व्यवहार (neurological behavior) में बदलाव शामिल है।

नवजात शिशु में ये नकारात्मक बदलाव नवजात और मां के लिए लंबे समय तक अस्पताल में रहने का कारण बन सकते हैं।

साथ ही, ऐसे स्थिति के लिए शिशु को अतिरिक्त दवाओं की आवश्यकता हो सकती है।

ये सिजेरियन सेक्शन डिलीवरी के दौरान होता है।

इस तरह की स्थिति नॉर्मल डिलीवरी में शायद ही उत्पन्न होती है।

और पढ़ें:डिलीवरी के बाद पीरियड लाने के उपाय
 

सामान्य प्रसव माँ में सशक्तीकरण की भावना को जगाता है

Normal delivery arouses a feeling of empowerment in the mother in hindi

Samanya prasav maa mein sashaktikaran ki bhawna ko jagata hai

दिलचस्प बात ये है कि कई महिलाएं प्राकृतिक प्रसव प्रक्रिया को सशक्तिकरण की भावना से जोड़ती हैं।

कुछ महिलाओं में यह देखा गया है कि वे तीव्र प्रसव क्षणों से गुज़रने के बाद उपलब्धि जैसा महसूस करती हैं।

यहाँ तक कि दर्दनाक लेबर से गुज़रने के बावजूद कई महिलाएं भविष्य में फिर नॉर्मल डिलीवरी का ही चयन करना चाहती हैं क्योंकि दूसरे प्रसव में दर्द को सहन करने की शक्ति अधिक हो जाती है।

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सामान्य प्रसव में साथी और परिवार का साथ होता है

During normal delivery there is involvement of the partner or support system in hindi

Samanya prasav mei saathi aur pariwar ka saath hota hai

सामान्य प्रसव के फायदे ये हैं प्रसव के दौरान महिला के साथी या परिवार के सदस्य को महिला के साथ रहने का मौका मिलता है।
महिला के साथ रुकने वाला सदस्य, दर्द के दौरान राहत देने के लिए महिला को पोज़िशन बदलने में मदद कर सकता है।

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सामान्य प्रसव के तुरंत बाद स्तनपान कराना संभव होता

Breastfeeding is possible immediately after normal delivery in hindi

Samanya prasav ke turant baad stanpan karana sambhav hota hai

नार्मल डिलीवरी के फायदे बहुत हैं लेकिन इसका सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है डिलीवरी के तुरंत बाद बच्चे को स्तनपान कराना।

सामान्य प्रसव में, नई मां बच्चे को पौष्टिक दूध पिला सकती है, जिसे कोलोस्ट्रम (colostrum) कहा जाता है।

ये बच्चे की इम्युनिटी के लिए ज़रूरी होता है और साथ संक्रमण से दूर रहने में भी मदद करता है।

सिजेरियन सेक्शन के मामले में, एनेस्थिसिया के कारण बच्चे की चूसने, निगलने और सांस लेने की क्षमता अव्यवस्थित (disorganized) हो सकती है।

जिससे बच्चे को दूध पीने में परेशानी आती है।

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सामान्य प्रसव में माँ को ठीक होने में कम समय लगता है

Mother takes less time to recover in normal delivery in hindi

samanya prasav mei maa ko thik hone mei kum samay lagta hai

सामान्य प्रसव के फायदे में एक यह भी है कि सामान्य प्रसव प्रक्रिया के माध्यम से अपने बच्चे को जन्म देने वाली माँ है, प्रसव के समय चीरों (incisions) और कट (cuts) के कम उपयोग के कारण जल्दी से ठीक हो जाती है।

इससे माँ और बच्चे के बीच बिना किसी विलम्ब के स्किन-टू-स्किन कांटेक्ट होता है और माँ अपने बच्चे को जल्द-से-जल्द स्तनपान कराने में सक्षम हो जाती हैं।

वही सी-सेक्शन में अस्पताल में रहने की अवधि, रिकवरी की अवधि अधिक लंबी होती है और नई माँ के लिए संक्रमण का अधिक ख़तरा भी होता है।

मां के स्वास्थ्य के साथ-साथ बच्चे का स्वास्थ्य भी कुछ हद तक खतरे में होता है।

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सामान्य प्रसव स्वस्थ आंत वनस्पति में सुधार करता है

Natural childbirth improves healthy gut flora in hindi

Samanya prasav swasthya aant vanaspati mein sudhar karta hai

हाल के शोधों ने साबित किया है कि योनि प्रसव के माध्यम से पैदा होने वाले शिशुओं में अधिक विविध और स्वस्थ आंत वनस्पति (healthy gut flora) होती है।

प्रसव के समय बर्थ कैनाल से गुज़रते समय बच्चे इस वनस्पतियों को प्राप्त करते हैं।

यह स्टैफिलोकोकस (staphylococcus) और स्ट्रेप्टोकोकस (streptococcus ) बैक्टीरिया की प्रजातियों के कारण होने वाले विभिन्न प्रकार के त्वचा रोगों को रोकता है।

ये सामान्य प्रसव के फ़ायदों में से एक है, क्योंकि प्राकृतिक प्रसव के माध्यम से पैदा होने वाले शिशुओं में पहले से ही स्वस्थ आंत वनस्पति होती है।

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निष्कर्ष

Conclusionin hindi

Nishkarsh

जो महिलाएं शारीरिक रूप से प्रेगनेंसी के दौरान एक्टिव रहती हैं, वे एक प्राकृतिक प्रसव प्रक्रिया के लिए अधिक तैयार होती हैं या उनकी नॉर्मल डिलीवरी होने की संभावना अधिक होती है।

नॉर्मलडिलीवरी प्रक्रिया स्वास्थ्य के नज़रिए से न सिर्फ बच्चे के लिए बल्कि माँ के लिए फ़ायदेमंद होती है।

इसके अलावा सी-सेक्शन के मुकाबले नॉर्मल डिलीवरी में कम खर्च भी होता है।

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आर्टिकल की आख़िरी अपडेट तिथि: : 03 Jun 2020

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